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ईरान पर हमले की क़ीमत

ईरान की अज़ीज़ सरज़मीन पर ज़ायोनी सरकार और अमरीका के अग्रेशन के ख़िलाफ़ इस्लामी गणराज्य की आर्म्ड फ़ोर्सेज़ के मुंहतोड़ जवाब पर KHAMENEI.IR का एक नया पोस्टर

23/03/2026

यह क्षेत्रीय जंग है

बैत शेमेश, बैतुल मुक़द्दस से 30 किलोमीटर दूर (1 मार्च 2026)

19/03/2026

शहीद ख़ामेनेई और फ़िलिस्तीन

फ़िलिस्तीन, ज़िंदा है और उस का जेहाद जारी है और अल्लाह की मदद से वह आख़िरकार दुष्ट दुश्मन पर विजयी होगा। 7 मई 2021

13/03/2026

अमीरुल मोमेनीन की तरह हम दुश्मनों की ज़्यादा तादाद से नहीं डरते

अमरीका से नहीं डरना चाहिए और ईरानी क़ौम नहीं डरती। क़ौम के सभी वर्गों में जो बहादुरी की यह भावना, अल्लाह पर भरोसे और जोश व जज़्बा है, उस से यह क़ौम विजयी होगी, अपने लक्ष्य को हासिल करेगी और दुश्मनों को झुका कर रहेगी। कोई भी दुश्मन, ईरानी क़ौम को उस राह पर चलने से नहीं रोक सकता, जो इस्लाम ने उस के सामने रखी है। बस यह बात याद रखनी चाहिए कि अली बिन अबी तालिब की तरह दुश्मन की ज़्यादा तादाद से डरना नहीं चाहिए। इमाम ख़ामेनेई 19 जनवरी 1992

11/03/2026

भ्रष्टाचार और ज़ुल्म का द्वीप

बेलगाम यौन संबंध का द्वीप बनाना कोई मामूली बात है? नैतिक भ्रष्टाचार, व्यावहारिक बुराइयां, ज़ुल्म, मुंहज़ोरी, ताक़त का इस्तेमाल, दख़लअंदाज़ी, जो मिले उसे मार देना, जहाँ पर उन का बस चल जाए, जहाँ मुमकिन हो पंजे मारना। इस्लामी क्रांति के शहीद नेता इमाम ख़ामेनेई की 17 जनवरी 2026 की स्पीच का भाग

10/03/2026

सब से घृणित सरकार

आज क्षेत्रीय क़ौमों की नज़र में अमरीका सब से घृणित सरकार है...इलाक़े के लोगों के मज़बूत इरादे से अमरीका को यहाँ से जाना ही पड़ेगा और वो जाएगा। इमाम ख़ामेनेई 17 मई 2025

07/03/2026

हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा शहीद सैयद अली हुसैनी ख़ामेनेई रिज़्वानुल्लाह अलैहः

ईरानी क़ौम डटी हुयी है, सीना तान कर डट गयी है। दुश्मनी इस वजह से है, लड़ाई इसी वजह से है। उन की बाक़ी बातें (जैसे) मानवाधिकार और इस तरह की दूसरी बातें, बकवास हैं; अस्ल बात यह है। वह ललचायी नज़रें लगाए हुए है, ईरान भी पूरी तरह डटा हुआ है और डटा रहेगा और अल्लाह की कृपा से दुश्मन को दुष्टता और पीड़ा देने से मायूस कर देगा।

05/03/2026

हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा शहीद ख़ामेनेईः

अल्लाह की कृपा से मुल्क यह दिखा देगा कि वह एक ताक़तवर राष्ट्र है और कोई भी ताक़त अपना पूरा ज़ोर लगाकर भी ईरानी राष्ट्र को न तो झुका सकती है और न ही हरा सकती है; महान अल्लाह भी मदद करेगा।

05/03/2026

क्षेत्रीय जंग

अमरीकी जान लें कि अगर उन्होंने इस बार जंग छेड़ी, तो यह जंग, क्षेत्रीय जंग होगी। इस्लामी क्रांति के शहीद नेता 1 फ़रवरी 2026

05/03/2026

पश्चिमी सभ्यता का आइसबर्ग

हमने उन के भ्रष्टाचार के बारे में जो कुछ सुना था वह एक तरफ़ और उस बदनाम और भ्रष्ट जज़ीरे का मामला एक तरफ़! ये चीजें वास्तव में पश्चिमी सभ्यता की तस्वीर पेश करती हैं। यह जो हम पश्चिमी सभ्यता, पश्चिम के उदारवादी लोकतंत्र के बारे में बात करते हैं, वह यही है। दो सौ साल, तीन सौ साल काम करते हैं, उसका नतीजा एक ऐसी चीज़ होती है। यह जज़ीरा एक नमूना है, इस तरह की बातें बहुत अधिक हैं। जिस तरह से यह चीज़ प्रकट नहीं थी मगर सामने आ ही गई, उसी तरह बहुत सी दूसरी चीज़ें भी हैं और वे भी सामने आएंगी। इमाम ख़ामेनेई 17 फ़रवरी 2026

25/02/2026

क़ुरआन की रौशनी में: ऐतिहासिक घटनाओं वाले दिनों की याद को बाक़ी रखना क़ुरआन की परंपरा है

निश्चित तौर पर असत्य पर चलने वाले गिरोहों का लक्ष्य 'अय्यामुल्लाह' पर पर्दा डालना या इस तरह के वाक़यात के रंग को फीका बना देना है। (वो चाहते हैं कि) 11 फ़रवरी (इस्लामी इंक़ेलाब की सालगिरह) के दिन को छिपा दें, 3 नवंबर (अमरीकी जासूसी के अड्डे पर क़ब्ज़े) के दिन को, 9 जनवरी (11 मोहर्रम को क़ुम के अवाम के क़त्ले आम) के दिन को, 29 दिसंबर के (यादगार) दिन को और 17 फ़रवरी तबरेज़ की घटना के दिन को, शहीद सुलैमानी के जनाज़े के जुलूस के दिन को, शहीद होजजी के जनाज़े के जुलूस के दिन को, जो सबके सब 'अय्यामुल्लाह' (ऐतिहासिक दिन) हैं, मिटा दें और इतिहास से ख़त्म कर दें। इनमें हर दिन एक मशाल है जिसे असत्य के मोर्चे की नज़र में बुझा दिया जाना चाहिए। यह क़ुरआन मजीद की शिक्षाओं के ख़िलाफ़ है। क़ुरआन ने इस तरह के दिनों की याद और ज़िक्र को बाक़ी रखने का हुक्म दिया है। "ऐ पैग़म्बर! इस किताब में मरयम का ज़िक्र कीजिए जब वो अपने घरवालों से अलग होकर (बैतुल मुक़द्दस) के एक पूर्वी मक़ाम पर गयीं" (सूरए मरयम, आयत-16) हज़रत मरयम का अहम वाक़ेया भुलाया नहीं जाना चाहिए। इसे इतिहास में बाक़ी रहना चाहिए। शायद दस से ज़्यादा बार क़ुरआन में इस तरह आया हैः 'याद करो, याद करो...' यह क़ुरआन का तरीक़ा है। इमाम ख़ामेनेई 09/01/2023

23/02/2026

इस्लामी घराना : इस्लाम सही उम्र व सही वक़्त पर शादी के लिए ताकीद करता है

शादी की उम्र का मसला भी, जिस पर इस्लामी किताबों में ताकीद की गयी है कि शादी की उम्र कहीं ज़्यादा न हो जाए और जवानों को जल्दी शादी कर लेनी चाहिए, अख़लाक़ी बुराइयों के ख़तरे से बचाने के लिए है। अलबत्ता इसका मतलब यह नहीं है कि कम उम्र में शादी कर दी जाए, जैसा कि कुछ लोग कहते हैं, जी नहीं, जवान लड़के और लड़कियां, मर्द और औरत जहाँ तक हो सके सही वक़्त पर शादी कर लें तो यह इस्लाम की नज़र में ज़्यादा पसंदीदा है, ख़ुद उनके लिए भी निश्चित तौर पर बेहतर है और समाज के लिए भी बहुत अच्छा है। इसलिए जब हम हेजाब के मसले को देखें तो इसे औरत को वंचित करने वाले साधन की नज़र से न देखें। यह अस्ल में एक संपत्ति है, हेजाब सुरक्षा मुहैया करता है, सुरक्षा देता है। इमाम ख़ामेनेई 27/12/2023

21/02/2026

एयरक्राफ़्ट कैरियर से ज़्यादा ख़तरनाक हथियार

अमरीकी राष्ट्रपति बार बार कह रहा है कि हम ने ईरान की ओर एयरक्राफ़्ट कैरियर भेजा है। हाँ ठीक है, एयरक्राफ़्ट कैरियर जहाज़ एक ख़तरनाक उपकरण है लेकिन उस से ज़्यादा ख़तरनाक वह हथियार है जो उसे समुद्र की गहराई में डुबा सकता है। इमाम ख़ामेनेई 17 फ़रवरी 2026

18/02/2026

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