Voice_of_Iran के नए इश्यू का एडिटोरियल पेश है, जिसका शीर्षक हैः एप्स्टीन आइलैंड के बच्चों के हत्यारे; ग़ज़ा पट्टी से मिनाब तक
05/03/2026
दुश्मन के हमले की स्थिति में ईरान की रणनीति क्या होगी? सदाए ईरान अख़बार के संपादकीय में इस सवाल का जवाब पेश है।
24/02/2026
एप्सटीन द्वीप पर सुनियोजित अपराध के केस सिर्फ़ एक यौन रुसवाई या कुछ पैसे वालों के यौन दुराचार का मामला नहीं है, बल्कि यह केस अब पश्चिमी मानवाधिकार के नज़रिए की कभी न भुलाई जाने वाली आलोचना में एक संपूर्ण दस्तावेज़ बन चुका है। जहाँ पश्चिम के राजनेता, पूंजीपति, मीडिया सेलिब्रेटीज और विद्वानों का एक नेटवर्क, जो बरसों तक ख़ुद को मानवाधिकार और महिला अधिकार का संरक्षक बताता रहा है, आज यौन उत्पीड़न, लड़कियों की स्मगलिंग और यौन दासता की सबसे घिनौनी पृष्ठिभूमि में से एक में, उन का नाम सीधे तौर पर या इंडायरेक्ट तौर पर सामने आ चुका है। जो कुछ दस्तावेज़ प्रकाशित हुए हैं, फ़्लाइट्स की लिस्ट और बाक़ी तस्वीरों से ज़ाहिर होता है, वह सिर्फ़ यौन भ्रष्टाचार का एक नेटवर्क नहीं बल्कि उस सिस्टम की वास्तवकि तस्वीर है जो कई दशकों से महिला अधिकार और आज़ादी के संरक्षक होने का दावेदार रहा है।
24/02/2026
सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता राष्ट्रीय विकास के सबसे अहम इंडीकेटर्ज़ में से एक है। यह एक ऐसा इंडीकेटर है जो न केवल आम जनता के जीवन की गुणवत्ता को दर्शाता है, बल्कि सामाजिक न्याय स्थापित करने और लोगों को सेवाएं प्रदान करने में सरकारों की कार्यक्षमता को भी दिखाता है। आज ईरान में चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र की स्थिति की जांच और इस्लामी क्रांति से पहले की स्थितियों से तुलना से पता चलता है कि इस्लामी गणराज्य न केवल स्वास्थ्य इंडीकेटर्ज़ को बेहतर बनाने में सफल रहा है, बल्कि उसने इतिहास के सबसे कठिन प्रतिबंधों के बीच चिकित्सा में न्याय और आत्मनिर्भरता का एक कारगर मॉडल भी प्रस्तुत किया है। यह एक ऐसा बड़ा बदलाव है जिसे पश्चिम के दावों के विपरीत, ठोस आंकड़ों से भी साबित किया जा सकता है।
08/02/2026
इंसानियत को मुक्तिदाता की ज़रूरत "इंसानियत की तारीख़ में शायद ही कोई ऐसा दौर गुज़रा हो जब समाज का हर शख़्स, पूरी दुनिया में मानव समाज में, इंसानियत के मुक्तिदाता की ज़रूरत को इतना महसूस किया गया हो जितना आज महसूस किया जा रहा है...एक मुक्तिदाता की ज़रूरत का एहसास, इमाम महदी की ज़रूरत के एहसास, अल्लाह की हिमायत रखने वाली एक ताक़त का एहसास, एक मासूम इमाम की ज़रूरत का एहसास, इसमत (हर गुनाहों व ऐबों से पाक होने) और अल्लाह की ओर हिदायत की ज़रूरत का एहसास; इतिहास में कम ही दौर ऐसे होंगे जब इंसान में इस आला हक़ीक़त की ज़रूरत के ये सब जज़्बे मौजूद रहे हों।" (20 अप्रैल 2020)
03/02/2026
पृष्ठिभूमि ईरान की संप्रभुता पर संयुक्त राज्य अमरीका और ज़ायोनी शासन की हालिया हिंसक आक्रामकता, इस्लामी गणराज्य ईरान के ख़िलाफ़ चल रही हाइब्रिड जंग को और तीव्र करने की एक नई पहल है। इस ऑपरेशन का एक निरंतर प्रक्रिया के रूप में विश्लेषण किया जाना चाहिए, जो सैन्य आक्रमण और टार्गेट किलिंग, दमनकारी आर्थिक प्रतिबंधों, निरंतर मनोवैज्ञानिक ऑप्रेशन, व्यापक झूठी खबरों के प्रसार और फिर से सैन्य कार्रवाई की लगातार धमकियों और पिछली कार्रवाइयों पर आधारित है। ये साम्राज्यवादी रणनीतियाँ मिलकर ईरान के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में अस्थिरता और तनाव का माहौल बनाती हैं; एक ऐसा माहौल जो लोगों के दैनिक जीवन और रोज़गार, साथ ही राष्ट्रीय एकता को गहराई से प्रभावित करता है।
01/02/2026
हाल के हफ्तों में, कई अमरीकी अधिकारियों ने ईरान को अलग-अलग धमकियां देने के लिए अलग-अलग तरीक़े अपनाए हैं। इन धमकियों के जवाब में, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के अधिकारियों के कड़े जवाब के अलावा, पश्चिम एशियाई क्षेत्र में भी ईरान के लिए सपोर्ट की एक बड़ी लहर उठी है।
31/01/2026
इस्लामी गणराज्य ईरान के विदेश मंत्री डॉ. अब्बास इराक़ची ने KHAMENEI.IR के ऑनलाइन अख़बार #सदाए ईरान के लिए लिखे अपने एडिटोरियल में देश के हालिया फ़ितने में अमरीका की खुली दख़लअंदाज़ी की क़ानूनी लेहाज़ से जवाबदेही की व्याख्या की है।
28/01/2026
वह एक नर्स थीं। तीन साल की बच्ची की माँ। उनके साथ काम करने वाले, उनकी बहुत दयालुता और उस प्रतिबद्धता की बात करते हैं जिसके लिए उन्होंने अपनी ज़िंदगी के आख़िरी पल तक समर्पित कर दिए थे।
26/01/2026
अगर हम इस सवाल का सही जवाब देना चाहते हैं कि “हमें किन हालात का सामना है?”, तो हमें ज़रूर इसे लार्जर पिक्चर में देखना होगा कि क्या हुआ है और क्या हो रहा है। मेरी राय में, बारह दिन के युद्ध की कहानी और मौजूदा हालात से इसके कनेक्शन पर पूरी नज़र डालने पर, हम साफ़ तौर पर देख सकते हैं कि हम अभी भी एक युद्ध के माहौल में हैं। एक ऐसा युद्ध जो न तो शांति से ख़त्म हुआ, न ही अपने क़ानूनी और राजनीतिक टर्म में पीस डील से। जो हुआ वह बस एक दोतरफ़ा सीज़फ़ायर था; बिना किसी लिखित समझौते के, बिना किसी मॉनिटरिंग सिस्टम के, और बिना किसी बाध्यकारी ज़िम्मेदारियों के। इसलिए, युद्ध की स्थिति से बाहर निकलने का विचार एक समीक्षात्मक गलती है। यह सच्चाई की हम अभी भी युद्ध की स्थिति में हैं, इस सच्चाई के अपने दायित्व हैं।
21/01/2026
ईरान में हाल की घटनाओं को सिर्फ़ सामाजिक या आर्थिक ज़रूरतों के हिसाब से एनालाइज़ नहीं किया जा सकता। हालांकि हर समाज अंदरूनी समस्याओं का सामना करता है और विरोध राजनीतिक जीवन का हिस्सा है, लेकिन इस समय जो बात सबसे ज़्यादा सामने आई है, वह है ज़मीनी स्तर पर गतिविधियों का विदेशी साज़िश से जुड़ा होना, जिसके लक्ष्य का दायरा पॉलिसी बदलने से कहीं आगे है। सबूत बताते हैं कि इन घटनाओं के विदेशी योजनाकारों का मुख्य लक्ष्य राष्ट्रीय एकता की नींव को कमज़ोर करना और आखिर में ईरान के टुकड़े करना है।
19/01/2026
तेहरान के एतिहासिक दिन कम नहीं रहे हैं। ऐसे दिन जब लोगों ने महसूस किया कि ज़रूरी है कि वे सड़कों पर आएं, अपनी मौजूदगी से दुश्मन की योजनाओं को नाकाम बना दें और ग़फ़लत के शिकार लोगों को जागरुक कर दें। फिर भी 12 जनवरी को तेहरान में जो कुछ हुआ वह अतीत के यादगार ऐतिहासिक कारनामों से कहीं बढ़कर और अगर एक लफ़्ज़ में कहा जाए, एक बेमिसाल "ख़ुदाई दिन" था। वे लोग, जिनके एक हाथ में क़ुरआन और दूसरे हाथ में अपने मुल्क का पाकीज़ा झंडा था, इस बड़े शहर की हर गली और बाज़ार से निकले और शहर के केन्द्र में जनसैलाब बन गए, ऐसा सैलाब जिस ने गर्द व ग़ुबार को बिठा दिया और दिलों में सुकून पैदा कर दिया।
14/01/2026
हज़रत फ़ातेमा ज़हरा की ज़िंदगी के संबंध में सटीक पहचान होनी चाहिए, उनकी ज़िंदगी को नई नज़र से देखना चाहिए, पहचानना चाहिए और सही मानी में आदर्श क़रार देना चाहिए। 19 अप्रैल 2014, उनकी शख़्सियत ठीक जवानी में सभी ग़ैरतमंद, मोमिन और मुसलमान मर्दों और औरतों यहाँ तक कि ग़ैर मुसलमानों के लिए भी जो उनके दर्जे को पहचानते हैं, आदर्श है; हमें इस महान हस्ती की ज़िंदगी से सीखना चाहिए।(13 दिसम्बर 1989)
25/11/2025
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्ज़ ने शुक्रवार को वियना में आयोजित अपनी बैठक में योरोपीय ट्रॉयका और अमरीका की ओर से ईरान के परमाणु प्रतिष्ठान के बारे में पेश किए गए प्रस्ताव को वोटिंग के लिए पेश किया।
22/11/2025
"ग्रेटर इस्राईल" अब कट्टरपंथी ज़ायोनियों के चुनावी अभियानों में केवल एक धार्मिक मान्यता या वैचारिक आकांक्षा मात्र नहीं रह गया है, बल्कि व्यवहार में यह एक भू-राजनीतिक परियोजना बन गया है। इस विचार की लालची, नाजायज़ क़ब्ज़ा करने वाली और नस्लवादी प्रवृत्ति, जिसने अरब दुनिया और इस्लामी समुदायों की सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय संरचना को निशाना बनाया है, ऐसी है कि अगर इसके पहलुओं को खोलकर समझाया जाए, तो ज़ायोनीवाद की प्रवृत्ति और क्षेत्र और इस्लामी जगत के भविष्य के लिए पश्चिमी सभ्यता की साज़िश को उजागर करने में यह एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसीलिए, ज़ायोनी शासन के नेता क्षेत्रीय नई व्यवस्था, न्यू मिडिल ईस्ट, सामान्यीकरण जैसे कानूनी, सुरक्षा के पहलूओं पर आधारित और लोकप्रिय शब्दों के साथ इस अर्थ को बदलने की कोशिश करते हैं।
22/11/2025
हज़रत फ़ातेमा ज़हरा की ज़िंदगी के संबंध में सटीक पहचान होनी चाहिए, उनकी ज़िंदगी को नई नज़र से देखना चाहिए, पहचानना चाहिए और सही मानी में आदर्श क़रार देना चाहिए। 19 अप्रैल 2014, उनकी शख़्सियत ठीक जवानी में सभी ग़ैरतमंद, मोमिन और मुसलमान मर्दों और औरतों यहाँ तक कि ग़ैर मुसलमानों के लिए भी जो उनके दर्जे को पहचानते हैं, आदर्श है; हमें इस महान हस्ती की ज़िंदगी से सीखना चाहिए।(13 दिसम्बर 1989)
20/11/2025
19वीं सदी के आग़ाज़ के अंधकारमय बरसों में, जब दुनिया नेपोलियन के बाद पुनर्निर्माण का विचार कर रही थी, जोज़फ़ नीप्स और लुई डागर ने अपने घर के डार्क रूम में एक आविष्कार किया। फ़ोटोग्राफ़ी का आविष्कार, उस वक़्त की दुनिया ने ऐसा आविष्कार देखा जो किसी चीज़ को उसके वाक़ई रूप में दिखाती थी। तस्वीर, किसी हक़ीक़त को एक छोटे से फ़्रेम में क़ैद करके, सीधे अपने दर्शक को पेश करती है।
29/10/2025
ज़ायोनियों की घिसी पिटी टैक्टिक और उनकी मरने के कगार पर पहुंच चुकी प्रचारिक मशीन के बारे में
16/10/2025
शरम-अलशैख़ समझौते के तहत फ़िलिस्तीनी रेज़िस्टेंस और ज़ायोनी शासन के बीच एक दूसरे के क़ैदियों की रिहाई, पिछले दो साल की जंग में निर्णायक मोड़ समझी जाती है; ऐसी घटना जिससे न सिर्फ़ यह कि ग़ज़ा पट्टी में थका देने वाली जंग का अंत हुआ, बल्कि क्षेत्र में ताक़त के नए संतुलन के बारे में राजनैतिक और रणनैतिक लेहाज़ से अहम संदेश सामने आए।
14/10/2025
22 अगस्त 2025 को ज़ायनी सरकार के प्रधान मंत्री बिनयामिन नेतनयाहू का एक इंटरव्यू आई-24 नेटवर्क पर प्रसारित हुआ जिसमें उन्होंने साफ़ तौर पर "ग्रेटर इस्राईल" के सपने का ज़िक्र किया और उसे अपना आध्यात्मिक और ऐतिहासिक मिशन कहा।
01/10/2025
ईरान में फ़िलिस्तीनी बच्चों और किशोरों के साथ एकजुटता के राष्ट्रीय दिवस पर
30/09/2025
हज़रत ख़दीजा सलामुल्लाह अलैहा के ज़िक्र के बिना इस्लाम के उदय के बारे में बात करना एक अधूरी बात है क्योंकि वे इस महान धर्म की संस्थापकों में से हैं। हज़रत ख़दीजा सलामुल्लाह अलैहा सिर्फ़ पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि व आलेही वसल्लम की बीवी या पहली मुसलमान महिला नहीं थीं बल्कि वे इस्लाम की पहली मददगार, उसकी सबसे बड़ी सपोर्टर, पैग़म्बरे इस्लाम का भावनात्मक सहारा और अल्लाह के पैग़म्बर की आत्मिक व आध्यात्मिक साथी थीं। इन सबके बावजूद जैसा कि इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने बल देकर कहा है कि इतिहास में उनकी महान शख़्सियत के संबंध में लापरवाही बरती गयी है और उसे नज़रअंदाज़ किया गया है।(1)
04/09/2025