सारांश सारांश

गृह मंत्री और गवर्नरों से ख़ेताब

इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने 28 मई 2025 को गृह मंत्री और प्रांतों के गवर्नरों से ख़ेताब में, भ्रष्टाचार से दूर रहते हुए जनसेवा और पदों से विशेष फ़रीज़ों को अदा करने के विषय पर, व्यक्तित्व का निर्माण करने वाली बात की।(1)

28/05/2025

जब हज़रत अबू तालिब ने ईमान का यह अंदाज़ और यह दृढ़ता देखी

क़ुरैश के बड़े सरदारों और समाज के प्रभावी लोगों को अपनी स्थिति ख़तरे में नज़र आने लगी। इसे रोकने के लिए उन्होंने सबसे पहले तो लालच देने की कोशिश की।

28/04/2025

इमामों ने दृढ़ता का रास्ता अपनाया और तर्क और दलील का सबक़ दिया है

24 अप्रैल 2025 को इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) के शहादत दिवस के मौक़े पर मजलिस-ए-अज़ा के बाद इस्लामी क्रांति के नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) और इमामत के विषय पर एक महत्वपूर्ण भाषण दिया। उनके भाषण के कुछ अंश इस प्रकार हैं:  

24/04/2025

सहीफ़ए सज्जादिया से परिचित समाजः अभेद्य

व्यक्ति और समाज के निर्माण के लिए सहीफ़ए सज्जादिया में रुचि लेने के बारे में इस्लामी इंक़ेलाब के नेता के बयानों के चुनिंदा भाग 

04/02/2025

शहीद करबासी और शहीद अव्वाज़ा के बच्चों से मुलाक़ात

शहीद मासूमा करबासी के घरवालों ने 23 अक्तूबर 2024 को इस्लामी इंक़ेलाब के नेता से तेहरान में मुलाक़ात की। शहीद मासूमा करबासी के शौहर लेबनानी थे और वह अपने शौहर के साथ बैरूत में ज़ायोनी शासन के हवाई हमले में शहीद हो गयीं।

05/11/2024

इस्लामी घराना: महिला विरोधी मंसूबे किसी नतीजे तक नहीं पहुँचेंगे

जब तक हज़रत ख़दीजा, हज़रत ज़हरा और हज़रत ज़ैनब जैसे सूरज चमक रहे हैं तब तक महिला विरोधी नए पुराने मंसूबे किसी नतीजे पर नहीं पहुँचेंगे।

03/03/2024

इस्लामी घराना: मियां बीवी को एक दूसरे का ज़रा भी अपमान करने का हक़ नहीं है

अगर आप दुनिया के सबसे अच्छे मर्द हों और आपकी बीवी शिक्षा और मालूमात के लेहाज़ से कम हो, तब भी आपको उसका अपमान करने का हक़ नहीं है। इमाम ख़ामेनेई

24/02/2024

क़ुरआन की रौशनी में:ऐतिहासिक घटनाओं वाले दिनों की याद को बाक़ी रखना क़ुरआन की परंपरा है

क़ुरआन ने इस तरह के दिनों की याद और ज़िक्र को बाक़ी रखने का हुक्म दिया है। दस से ज़्यादा बार क़ुरआन में इस तरह आया हैः 'याद कीजिए, ज़िक्र कीजिए' ... यही क़ुरआन का तरीक़ा है।

14/02/2024

इस्लामी घरानाः मियां और बीवी के दरमियान मोहब्बत, सामाजिक मैदान में औरत की मुश्किलों को कम कर देती है

अगर औरत, अपने घर में अपने अस्ल मोर्चे पर अपने मसलों को कम कर सके तो निश्चित तौर पर वो सामाजिक सतह पर भी यह काम कर सकेगी। इमाम ख़ामेनेई 04/01/2012

10/02/2024

क़ुरआन की रौशनी में: अल्लाह की ताक़त, मुजाहिदों के साथ है

वो लश्कर जिसका अल्लाह मददगार न हो वो कुछ नहीं कर सकता। एक ऐसा लश्कर जिसकी पीठ मज़बूत है, वो सारे काम कर सकता है। एक ऐसा लश्कर जिसकी पीठ पर अल्लाह की ताक़त हो तो क्या ऐसा लश्कर हार सकता है? इमाम ख़ामेनेई 23/5/2016

24/01/2024

इस्लामी घराना: औरत को एक अच्छी माँ और बीवी होने के साथ साथ सामाजिक सरगर्मियों में भी भाग लेना चाहिए

इस्लाम महिला को सामाजिक मामलों में हिस्सा लेने, सामाजिक जद्दोजेहद में भाग लेने और पब्लिक सरगर्मियों में शामिल होने से नहीं रोकता, उसे एक अच्छी माँ और एक अच्छी बीवी भी होना चाहिए और सामाजिक मामलों में भी भाग लेना चाहिए। इमाम ख़ामेनेई 27/07/2005

13/01/2024

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