अमरीकी जान लें कि अगर इस बार उन्होंने जंग छेड़ी तो यह जंग, क्षेत्रीय जंग होगी। शहीद आयतुल्लाह ख़ामेनेई 1 फ़रवरी 2026
15/03/2026
हुर्मुज़ स्ट्रेट का न तो अमरीका से संबंध है और न ही दुनिया की किसी भी सरकश और मुंहज़ोर ताक़त से संबंध है, बल्कि इस का संबंध इस क्षेत्र की अवाम से है।अगर ऐसा हो कि हमारे हित ख़तरे में पड़ जाएं तो फिर अमरीका और पश्चिमी मुल्कों के हितों के सुरक्षित रहने की क्या वजह हो सकती है?
15/03/2026
किसी ज़माने में फ़िलिस्तीन का मुद्दा, केवल इस्लामी देशों का मुद्दा था, आज फ़िलिस्तीन और ग़ज़्ज़ा का मामला, एक सर्वाजनिक अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा है।
12/03/2026
अमरीकी जान लें कि अगर इस बार उन्होंने जंग छेड़ी तो यह जंग, क्षेत्रीय जंग होगी। शहीद आयतुल्लाह ख़ामेनेई 1 फ़रवरी 2026
11/03/2026
अमरीकी जान लें कि अगर इस बार उन्होंने जंग छेड़ी तो यह जंग, क्षेत्रीय जंग होगी। शहीद आयतुल्लाह ख़ामेनेई 1 फ़रवरी 2026
11/03/2026
शहीद, दुनिया के सब से बड़े सौदे के विजेता हैं। यह रास्ता, वह रास्ता है जिस में कोई डर और दुख नहीं है, ख़ौफ़ और ग़म नहीं है; यह तो अल्लाह का रास्ता है। इस रास्ते पर पूरी दृढ़ता से चलना होता है, इस रास्ते में दुश्मनों के उकसावे से डगमगाना नहीं चाहिए।
05/03/2026
अगर मौजूदा शख़्स नहीं रहा तो असेंब्ली ऑफ़ एक्सपर्ट्स तुरंत क़दम उठाएगी और अगले शख़्स को नियुक्त करेगी।
05/03/2026
ऐसे दुख होते हैं जो पहाड़ों को तोड़ देते हैं (लेकिन) मोमिन इंसान को नहीं तोड़ सकते; रास्ता जारी रहना चाहिए।
04/03/2026
पैग़म्बरे इस्लाम ने फ़रमायाः ऐ अबूज़र! भले कर्म के साथ दुआ उतनी काफ़ी है, जितना खाने के लिए नमक काफ़ी होता है।
28/02/2026
पैग़म्बरे इस्लाम ने फ़रमायाः ऐ अबूज़र जन्नत में दाख़िल होना चाहते हो तो अपनी आरज़ूएं कम करो, मौत को हमेशा आँखों के सामने रखो और अल्लाह से हया करो उस तरह जैसा कि हक़ है।
25/02/2026
पैग़म्बरे इस्लाम ने फ़रमायाः ऐ अबूज़र! जब तुम जनाज़े के जुलूस में शामिल हो, तो अपना मन ग़ौर व फ़िक्र में लगाओ और विनम्र रहो। और जान लो कि तुम भी उससे मिल जाओगे।
24/02/2026
पैग़म्बरे इस्लाम ने फ़रमायाः ऐ अबूज़र! दो रकत नमाज़ ध्यान और ग़ौर व फ़िक्र के साथ, उस रात भर की नमाज़ से बेहतर है जिस में दिल ग़ाफ़िल हो।
22/02/2026
यह जो आप कहते हैं, "शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा मूल अधिकार है" यह चीज़ आईएईए के नियमों और उस के समझौतों में भी दर्ज है, यानी तमाम मुल्कों को यह अधिकार है कि वे अपने देश के भीतर परमाणु प्रतिष्ठान तैयार करें, यहाँ तक कि युरेनियम संवर्धन के प्रतिष्ठान भी तैयार करें।
22/02/2026
पैग़म्बरे इस्लाम ने फ़रमायाः ऐ अबूज़र! अपनी ज़िंदगी की तमाम सरगर्मियों के लिए नेक नीयत निर्धारित करो, यहाँ तक कि खाने और सोने के लिए भी नेक नीयत मद्देनज़र रखो!
21/02/2026
पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत अबू-ज़र से फ़रमा रहे हैं: अल्लाह से डरने वालों जैसा ज़ाहिर न बनाओ जबकि तुम्हारा बातिन ग़फ़लत का शिकार हो। लोग तुम्हारी इज़्ज़त और सम्मान करें इस वजह से कि वह कहें कि यह अल्लाह से बहुत डरने वाला इंसान है, और तुम्हारा दिल गुनाह करने वाला है।
21/02/2026
अमरीकी राष्ट्रपति बार बार कह रहे हैं कि हम ने ईरान की ओर एयरक्राफ़्ट कैरियर भेजा है। बहुत अच्छा, एयरक्राफ़्ट कैरियर एक ख़तरनाक उपकरण है लेकिन उस से ज़्यादा ख़तरनाक वह हथियार हो जो उसे समुद्र की तह में पहुंचा सकता है।
17/02/2026
ईरानी क़ौम वाक़ई कह रही है हमारे जैसी एक क़ौम ऐसी संस्कृति, ऐसे इतिहास वाली, ऐसी उच्च आध्यात्मिक शिक्षा वाली, ऐसे सत्ताधारियों की, जैसे भ्रष्ट लोग आज अमरीका में सत्ता में बैठे हैं, बैअत नहीं करेगी।
17/02/2026
इस मौजूदगी का एक बहुत अहम पैग़ाम है और वह यह है कि इस सिस्टम के लक्ष्य को अपने पूर्वजों के लक्ष्य और अक़ीदे को हमेशा अपनाए रहेंगे, इंशाअल्लाह।
16/02/2026
हम अपनी एकजुटता का एलान करते हैं और ईरानी क़ौम के इस्लामी गणराज्य से अपनी वफ़ादारी का एलान करते हैं।
15/02/2026
अपने ख़ून के आख़िरी क़तरे तक अपने वतन, मुल्क और इस्लामी इंक़ेलाब के नेता का साथ दूंगी, हम आप को अकेले नहीं छोड़ेंगे, हर तरह आप के साथ हैं। मैं कहना चाहता हूं कि जनाब हम आप के पीछे पीछे और आप के साथ हैं।हमारी आँखें और कान आप के इशारे का इंतेज़ार कर रहे हैं।
14/02/2026
आप ने कल 22 बमहन (11 फ़रवरी) को एक महान कारनामा अंजाम दिया। आप ने ईरान का सिर ऊंचा कर दिया। हमेशा की तरह इस्लामी गणराज्य का साथ दिया और उसकी ताक़त को बढ़ाया।
13/02/2026
ईरानी क़ौम डटी हुयी है। इस डटने का प्रतीक 22 बहमन (11 फ़रवरी) का दिन है।
13/02/2026
इस्लामी इंक़ेलाब, दुनिया की दूसरी क्रांतियों से अलग है,यह सिर्फ़ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक इंक़ेलाब नहीं है, सिर्फ़ आर्थिक इंक़ेलाब नहीं है, सिर्फ़ राजनैतिक इंक़ेलाब नहीं है; बहुआयामी इंक़ेलाब है। ख़ुद इस्लाम की तरह है। जिस तरह इस्लाम के आध्यात्मिक और नैतिक पहलू हैं।
11/02/2026
जब तक दुश्मन मायूस न हो, उस वक़्त तक एक क़ौम यातना और पीड़ा का निशाना बनती है। दुश्मन को ज़रूर मायूस करना चाहिए। 9 फ़रवरी 2026
09/02/2026