अल्लाहो अकबर का यही नारा था जिस ने, ईरान से लेकर लेबनान, फ़िलिस्तीन, इराक़ और सीरिया तक, और अफ़्रीक़ा और यमन से लेकर अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान और दुनिया की तमाम आज़ाद क़ौमों तक, इस्लामी उम्मत और रेज़िस्टेंस के मोर्चे के मुजाहिद जवानों के बीच आपसी रिश्तों को मज़बूत बनाया ताकि वो क़ाबिज़ ज़ायोनियों के मुक़ाबले में इस्लामी उम्मत की रक्षा के लिए उठ खड़े हों।
सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई
26 मई 2026
26/05/2026