इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के रौज़े में उसकी विशेष शर्तो और शान के साथ सेवा करना निश्चित तौर पर सब से बड़े मूल्यों और सब से ज़्यादा फ़ख़्र करने के क़ाबिल कर्मों में से है। मुझे इस बात पर फ़ख़्र है कि मैंने इस रौज़े में सेवा की है...वास्तव में मेरे लिए सबसे मीठे लम्हें वे हैं जब मैं इमाम रज़ा के रौज़े का दर्शन करता हूं।
इमाम रज़ा का सेवक, शहीद इमाम सैयद अली ख़ामेनेई
8 दिसम्बर 1988
28/04/2026