क़ुरआन की रौशनी में: हर नेमत अल्लाह की तरफ़ से

क़ुरआन की रौशनी में: हर नेमत अल्लाह की तरफ़ से

हक़ीक़ी शुक्र यह है कि इंसान नेमत को अल्लाह की तरफ़ से समझे। न यह कि ज़बान से कहे, बल्कि पूरे वजूद से माने कि जो नेमत उसके पास है, वह अल्लाह की तरफ़ से है। ऐसा न हो कि यह ख़्याल करे कि यह नेमत उसने अपने बलबूते मुहैया की है। अगर ऐसा सोचा, तो अल्लाह की नाराज़गी और नेमत के छिनने का सबब बनेगा। (क़ारून ने कहा मुझे जो कुछ मिला वह उस इल्म की बदौलत मिला जो मेरे पास है) अगर हम यह कहें कि ये इल्म, ये दौलत व मक़ाम हमने ख़ुद हासिल किया है, ग़लत है। क़ुरआन इस तरह फ़रमाता हैः आपको जो नेकी पहुंचती है, वह तो अल्लाह की तरफ़ से है। (सूरए निसा, आयत-79) हर वह चीज़ जो भलाई में गिनी जाती है, अल्लाह की तरफ़ से है। (और तुम्हारे पास जो भी नेमत है वह सब अल्लाह ही की तरफ़ से है।) दुआ में भी हमको सिखाया गया है कि अल्लाह से कहें कि हमारे पास ऐसी कोई भी नेमत नहीं है जो तेरी तरफ़ से न है। हे अनन्य, तेरा कोई शरीक नहीं, तेरे सिवा कोई परस्तिश के क़ाबिल नहीं। (इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम की अस्र की नमाज़ के बाद की दुआ) जो नेमत भी हमारे पास हैं, तेरी तरफ़ से है। ज़्यादा से ज़्यादा हमें यह कोशिश करनी चाहिए कि ख़ुद को अल्लाह की नेमत पाने और उसे बाक़ी रखने के क़ाबिल बनाएं।

इमाम ख़ामेनेई

28/5/1997

04/01/2023