बग़दाद अंतर्राष्ट्रीय बुक फ़ेयर में हुज्जतुल इस्लाम वलमुस्लेमीन मोहम्मद जवाद मोहम्मदी गुलपायगानीः
सवालों का सामना करने के लिए खुली सोच
घर में हर शख़्स, उनका रिश्तेदार और निकटवर्ती कोई भी सवाल उनसे पूछ सकता था, वह कभी भी सवाल से नाराज़ नहीं होते थे। उनकी ख़ुसूसियत यह थी कि सामने वाले की क्षमता भर तर्क के ज़रिए उसे संतुष्ट कर देते थे।