बग़दाद अंतर्राष्ट्रीय बुक फ़ेयर में हुज्जतुल इस्लाम वलमुस्लेमीन मोहम्मद जवाद मोहम्मदी गुलपायगानीः

“मुझे तुम पर फ़ख़्र है”

जब मैं जेल से बाहर आया और घर पहुंचा, तो मेरे पिता की प्रतिक्रिया भी बहुत अच्छी थी, ख़ास तौर पर मेरी माँ ने जो जुमला कहा उसे मैं कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने कहा कि उनकी माँ ने कहा, "मुझे तुम पर फ़ख़्र है।" माँ की इस प्रतिक्रिया का सरकश शाही शासन के ख़िलाफ़ उनके संघर्ष में बहुत प्रभाव पड़ा।

16/09/2026

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