दरस-ए-अख़लाक़: अल्लाह से गिड़गिड़ाकर दुआ कीजिए

दरस-ए-अख़लाक़: अल्लाह से गिड़गिड़ाकर दुआ कीजिए

हम दुआ को मामूली चीज़ न समझें, अल्लाह से कुछ तलब करने को मामूली बात न समझें। आपसे जहाँ तक मुमकिन हो दुआ को अल्लाह के सामने ऐसे माहौल में पेश कीजिए जिसमें आपकी बेहतरीन हालत हो, रोने और गिड़गिड़ाने का माहौल हो। दुआ में आया हैः “तेरे सामने गिड़गिड़ाने के सिवा कोई चीज़ मुझे तुझते बचा नहीं सकती” (वह हालत हो कि) तेरे सामने हम गिड़गिड़ा सकें, रोना और गिड़गिड़ाना बहुत क़ीमती चीज़ है कि इंसान अपने अल्लाह के सामने गिड़गिड़ाकर कुछ अर्ज़ कर सके। अगर आप अल्लाह के सामने गिड़गिड़ा सके और फ़रयाद कर सके तो उस वक़्त आप दुनिया की खोखली ताक़तों, तथाकथित ताक़तों, झूठी व दिखावे की ताक़त दिखाने वाली किसी भी बड़ी ताक़त के सामने आपना सिर बुलंद रखेंगे, रोएंगे और गिड़गिड़ाएंगे नहीं (अल्लाह फ़रमाता है यह मेरे लिए मुमकिन है) कि मैं तुम्हारी रक्षा करूं और तुम्हारी ओर मुंह करने वाली आफ़तों व मुसीबतों के रुख़ को मोड़ दूं, मुझसे दरख़ास्त करो कि तुम्हारी रहनुमाई करूं। क़ुरआन में भी हमारा मार्गदर्शन किया गया है और हमको हुक्म दिया गया है कि हम अल्लाह से दुआ किया करें।

इमाम ख़ामेनेई

08/04/2018

26/10/2023