इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर इमाम सैयद अली ख़ामेनेई के चेहलुम के मौक़े पर, लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के महासचिव शैख़ नईम क़ासिम का पैग़ाम
इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर इमाम सैयद अली ख़ामेनेई के चेहलुम के मौक़े पर, लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के महासचिव शैख़ नईम क़ासिम का पैग़ाम इस प्रकार हैः
बिस्मिल्लाह अर्रहमान अर्रहीम
रहबर इमाम ख़ामेनेई की शहादत के चालीसवें दिन हम शोक और सरबुलंदी के बीच खड़े हैं। अगरचे उन्हें खोने का दुख बहुत बड़ा है और उन्हें खोने के नुक़सान की क्षतिपूर्ति नहीं हो सकती, लेकिन हमारे वली ने जेहाद के मैदान में जिस दर्जे को हासिल किया-यानी इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की राह पर चलते हुए सम्मानीय शहादत- वो बहुत बुलंद और श्रेष्ठ है।
हमारे वली ने, धर्म को ज़िंदा करने वाले इमाम ख़ुमैनी की राह पर चलते हुए, पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहि वआलेही वसल्लम के शुद्ध इस्लाम के स्तंभों को, मज़बूत किया और उम्मत को दृढ़ता, जेहाद और धैर्य के उसूलों से लैस किया। उन्होंने फ़िलिस्तीन और बैतुल मुक़द्दस की मदद और मक़बूज़ा फ़िलिस्तीन के इलाक़ों को आज़ाद कराने के लिए रेज़िस्टेंस का परचम लहराने की ओर हमारा मार्गदर्शन किया और अल्लाह के इस वादे के आधार पर "ऐ ईमान वालो! अगर तुम अल्लाह की मदद करोगे तो अल्लाह तुम्हारी मदद करेगा और तुम्हें साबित क़दम रखेगा।" (सूरए मोहम्मद आयत-7) हमारे ढांचे में अंतिम सफलता की रूह फूंक दी।
रहबर शहीद इमाम ख़ामेनेई ने पूरी उम्मत और इस्लामी गणराज्य ईरान का भलाई, दृढ़ता, सम्मान और आज़ादी के साथ ज़िंदगी को आगे ले जाने वाले अनुभव की ओर मार्गदर्शन किया। उन्होंने सभी पर अपने दौर की वैज्ञानिक तरक़्क़ी और आत्मनिर्भरता पर बल दिया और वे पूरब और पश्चिम पर निर्भरता को नकारते हुए, स्वाधीनता के अधिकार और उस असली रास्ते पर चलने पर ज़ोर देते थे जो हमें इस्लाम की पाकीज़ा ज़िम्मेदारी, पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहि वआलेही वसल्लम और मासूम इमामों (अलैहेमुस्सलाम) की सीरत से जोड़ता है।
अमरीकी-इस्राईली दुश्मन, इमाम रहबर की टार्गेट किलिंग से इस अस्ली लाइन को ख़त्म और इमाम और उनकी राह से लगाव रखने वाली दुनिया की आज़ाद क़ौमों और ईरानी क़ौम के इरादे को कमज़ोर करना चाहता था लेकिन महान ईरानी क़ौम और आईआरजीसी, सुरक्षा बल और फ़ौजी मैदान में डटे रहे और भीतरी स्तर पर एकता के साथ बड़े पैमाने पर अवाम ने हाज़िर होकर सैन्य, राजनीति और संस्कृति के मैदानों में जेहाद किया। वे अल्लाह की कृपा से इस बात में सफल हुए कि वली-ए-अम्र हज़रत आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा ख़ामेनेई (अल्लाह उनका साया बाक़ी रखे) को उस नेक हस्ती का मुबारक उत्तराधिकारी चुना। इस्लामी गणराज्य उन के नेतृत्व में घावों को भर सका, मैदान को मज़बूत कर सका और अमरीकी-ज़ायोनी दुश्मन को लक्ष्य हासिल करने में नाकाम बनाकर, बड़ी कामयाबी हासिल की यहाँ तक कि दुश्मन ज़लील होकर ईरान की बजा शर्तों पर वार्ता की मेज़ पर आया।
लेबनान का हिज़्बुल्लाह संगठन और क्षेत्र सहित दुनिया में फ़ख़्र के क़ाबिल फ़ोर्सेज़ इस विलायत पर ईमान रखती हैं जो पैग़म्बरे इस्लाम से शुरू हुयी और मासूम इमामों तथा पूरे इतिहास में बड़े धर्मगुरुओं के रास्ते से गुज़रकर यह परचम इमाम महदी अलैहिस्सलाम (अल्लाह उन्हें जल्द ज़ाहिर करे) के हवाले हो जाए। हिज़्बुल्लाह और उसके इस्लामी रेज़िस्टेंस ने सम्मान और दृढ़ता की राह में उम्मत के शहीदों के सरदार, सैयद हसन (रिज़्वानुल्लाह अलैह) और दूसरे बड़े शहीदों को सत्य की बात को ऊंचा करने, वतन की आज़ादी और मानव सम्मान की रक्षा की राह में पेश कर दिया और जितने भी संघर्ष की ज़रूरत हो हम राह पर बाक़ी रहेंगे। क़ाबिज़ इस्राईल अपने लक्ष्य को कभी हासिल नहीं कर पाएगा और हमारे रेज़िस्टेंस करने वाले दक्षिणी भाग में टिक नहीं पाएगा, रेज़िस्टेंस के जवान शहादत के जज़्बे और हमारे अज़ीज़, पाक और बलिदानी अवाम के साथ मिलकर दुश्मन की साज़िश को नाकाम बना देंगे, क्योंकि अल्लाह फ़रमाता हैः "और अल्लाह ने काफ़िरों के बोल को नीचा कर दिखाया और अल्लाह का ही बोल बाला है। और अल्लाह ज़बरदस्त है और बड़ा हिकमत वाला है।" (सूरए तौबा, आयत-40)
नईम क़ासिम
20 शव्वाल 1447 हिजरी क़मरी बराबर 9 अप्रैल 2026
11/04/2026



