लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के महासचिव द्वारा बैअत और सांत्वना संदेश भेजे जाने पर इस्लामी इंक़ेलाब के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा ख़ामेनेई का जवाब
लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के महासचिव द्वारा बैअत और सांत्वना संदेश भेजे जाने पर इस्लामी इंक़ेलाब के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा ख़ामेनेई ने जवाब दिया है।
बिस्मिल्लाह अर्रहमान अर्रहीम
मेरे अज़ीज और मुजाहिद भाई, हिज़्बुल्लाह के महासचिव जनाब शैख़ नईम क़ासिम (अल्लाह उनकी उम्र और इज़्ज़त बढ़ाए और उन्हें आफ़ियत अता करे)
सलामुन अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकातोहू
इस्लामी इंक़ेलाब के महान नेता की शहादत पर आपका सांत्वना संदेश और हिज़्बुल्लाह लेबनान के मुजाहिद भाइयों की ओर से मोहब्बत के जज़्बात मुझ तक पहुंचे।
इस बात में शक नहीं कि इस्लामी जगत के सबसे बड़े दुश्मन यानी अमरीका और क्षेत्र में उसकी प्रॉक्सी फ़ोर्स-निर्दयी ज़ायोनी शासन- के मुक़ाबले में दृढ़ता और धैर्य, इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद इमाम की सबसे अहम ख़ूबियां थीं। इस रेज़िस्टेंस और दृढ़ता को जो उस अज़ीम नेता के नेतृत्व में बरसों जारी रही और हाज क़ासिम सुलैमानी सहित आईआरजीसी और सेना के दूसरे बड़े कमांडरों की क़ीमती शहादत का नज़राना, इस रास्ते के सही होने का सबसे बड़ा सुबूत है।
इस बात में शक नहीं कि इस्लामी रेज़िस्टेंस का इतिहास जेहाद, बहादुरी और शहादत के जज़्बे से भरा हुआ है, रेज़िस्टेंस के कमांडरों ने, किसी ख़तरे की परवाह किए बिना, दूसरे मुजाहिदों से पहले अपनी जान इस राह में क़ुर्बान कर दी। शैख़ राग़िब हर्ब और अब्बास मूसवी से लेकर रेज़िस्टेंस के शहीदों के सरदार अज़ीज़ शहीद सैयद हसन नसरुल्लाह और सैयद हाशिम सफ़ीउद्दीन तक, सभी इस राह के नमूने थे।
आप ख़ुद जो लेबनान में मुबारक रेज़िस्टेंस की फ़्रंटलाइन पर रहे हैं, इस संवेदनशील और ऐतिहासिक लम्हे में, इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। आप की सूझबूझ, बुद्धिमानी और बहादुरी की मुझे जो समझ है, मुझे उम्मीद है कि आप ज़ायोनी दुश्मन की साज़िश को नाकाम करेंगे और लेबनान की अज़ीज़ क़ौम एक बार फिर सुरक्षा और गौरव की भावना महसूस करेगी।
एक बार फिर ताकीद करता हूं कि इस्लामी गणराज्य की स्थायी नीति, मरहूम इमाम (ख़ुमैनी) और शहीद नेता (इमाम ख़ामेनेई) के रास्ते को जारी रखते हुए, ज़ायोनी-अमरीकी दुश्मन के मुक़ाबले में रेज़िस्टेंस का सपोर्ट जारी रखने की है।
एक बार फिर आपकी ओर से हमदर्दी भरे जज़्बात का शुक्रिया अदा करते हुए आप की और सभी अज़ीज़ मुजाहिद भाइयों की कामयाबी और सरबुलंदी की कामना करता हूं।
आप सब पर सलाम और अल्लाह की रहमत और बर्कत हो।
सैयद मुज्तबा ख़ामेनेई
10 शव्वाल 1447 हिजरी क़मरी बराबर 31 मार्च 2026
01/04/2026

