तंगिस्तान का बहादुर सपूत, ईरान का सिपाही और इस्लाम का मुहाफ़िज़
एडमिरल अली रज़ा तंग्सीरी की शहादत पर इस्लामी इंक़ेलाब के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई का बयान
बिस्मिल्लाह अर्रहमान अर्रहीम
और अल्लाह की राह में क़त्ल होने वालों को मुर्दा न समझो बल्कि वे ज़िंदा हैं और अपने रब के पास से रिज़्क़ पा रहे हैं।
आईआरजीसी की नौसेना के बहादुर और ग़ैरतमंद कमांडर एडमिरल अली रज़ा तंग्सीरी, बर्सों तक जेहाद के बाद शहादत के दर्जे पर पहुंचे। थोपी गयी तीसरी जंग में तंगिस्तान के इस बहादुर सपूत, ईरान के सिपाही और इस्लाम के मुहाफ़िज़ की शहादत, बूशहर के बहादुर अवाम, दक्षिणी इलाक़े के जवानों, इस्लामी गणराज्य की आर्म्ड फ़ोर्सेज़ और ईरानी क़ौम के लिए जो हमेशा ईरान की संप्रभुता और समुद्री सरहदों ख़ास तौर पर फ़ार्स की खाड़ी के रक्षक हैं, एक बड़े कारनामे की दस्तावेज़ है ताकि वह ईरान के समुद्री प्रभुत्व और रेज़िस्टेंस का रास्ता पहले से ज़्यादा समतल करें, इंशा अल्लाह।
मैं इस बहादुर और जांबाज़ कमांडर की शहादत पर उन के सम्मानीय घर वालों, उन के साथियों और नौसेना और आईआरजीसी के कमांडरों की सेवा में बधाई और सांत्वना पेश करता हूं और अल्लाह से इस शहीद के लिए ऊंचे दर्जे की कामना करता हूं।
सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई
30 मार्च 2026
30/03/2026

