ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा की सर्वोच्च परिषद के सचिव, शहीद अली लारीजानी का शहादत से एक दिन पहले, इस्लामी राष्ट्रों के नाम संदेश
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा की सर्वोच्च परिषद के सचिव, शहीद अली लारीजानी ने शहादत से एक दिन पहले, इस्लामी राष्ट्रों के नाम बयान जारी किया। जो इस प्रकार हैः
बिस्मिल्लाह अर्रहमान अर्रहीम
दुनिया के मुसलमानो और इस्लामी सरकारो!
ईरान को वार्ता के दौरान अमरीका और ज़ायोनी शासन के धूर्ततापूर्ण अग्रेशन का सामना हुआ कि जिसका लक्ष्य ईरान को बांटना था। इस अग्रेशन में इस्लामी क्रांति के बलिदानी व महान नेता, कुछ आम लोग और सैन्य कमांडर शहीद हुए, जिस की वजह से उन्हें ईरान के राष्ट्रीय और इस्लामी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा।
आप जानते हैं कि कुछ राजनैतिक आयाम वाले मौक़ों के अलावा, कोई भी इस्लामी सरकार ईरान की मदद के लिए सामने नहीं आयी है। लेकिन ईरानी क़ौम अपने मज़बूत इरादे से दुष्ट दुश्मन को कुचल देगी। जैसा कि आज दुश्मन नहीं समझ पा रहा है कि रणनैतिक लेहाज़ से इस बंद गली से कैसे बाहर निकले।
ईरान छोटे और बड़े शैतान (अमरीका और इस्राईल) के मुक़ाबले में प्रतिरोध के रास्ते को जारी रखेगा लेकिन क्या इस्लामी सरकारों का व्यवहार पैग़म्बरे इस्लाम (सल्लललाहो अलैहि वआलेही वसल्लम) के इस कथन से "अगर किसी मुसलमान की फ़र्याद को नहीं पुहंचे तो मुसलमान नहीं हो" विरोधाभास नहीं रखता? यह किस तरह का मुसलमान होना है?!
कुछ मुल्क तो इस से भी आगे बढ़ गए और उन्होंने कहा कि चूंकि ईरान ने अमरीका की छावनियों और अमरीका तथा इस्राईल के हितों को उन देशों में निशाना बनाया है, तो ईरान हमारा दुश्मन है! क्या ईरान हाथ पर हाथ धरे बैठा रहे कि आप के मुल्कों में अमरीकी छावनियों से ईरान पर हमला हो?! बहाना ढूंढ रहे हैं; आज लड़ाई का एक पक्ष अमरीका और इस्राईल हैं और दूसरी तरफ़ मुसलमान ईरान और रेज़िस्टेंस फ़ोर्सेज़। आप किस के साथ हैं?
इस्लाम के भविष्य के बारे में सोचिए। आप जानते हैं कि अमरीका आप के साथ कोई वफ़ा नहीं करेगा और इस्राईल आपका दुश्मन है। एक मिनट अपने और क्षेत्र के भविष्य के बारे में सोचिए। ईरान आपका ख़ैरख़ाह है और आप पर वर्चस्व का इरादा नहीं रखता।
इस्लामी जगत की एकता, मुल्कों की सुरक्षा, तरक़्क़ी और स्वाधीनता को पूरे प्रभुत्व के साथ सब के लिए सुनिश्चित कर सकती है।
अल्लाह का बंदा
अली लारीजानी
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा की सर्वोच्च परिषद, तेहरान, 16 मार्च 2026, इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई की शहादत के 16 दिन बाद
18/03/2026

