ओलम्पियाडों और स्पोर्ट्स के मुक़ाबलों में मेडल जीतने वाले जवानों से ख़ेताब
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने सोमवार 20 अक्तूबर 2025 को सुबह इंटरनैश्नल साइंस ओलंपियाडों में मेडल हासिल करने और स्पोर्ट्स में चैंपियनशिप का ख़ेताब जीतने वाले जवावनों से मुलाक़ात की और सभा को ख़िताब किया।
स्पीचः
बिस्मिल्लाह अर्रहमान अर्रहीम
अरबी ख़ुतबे का अनुवादः सारी तारीफ़ पूरी कायनात के पालनहार के लिए है और दुरूद व सलाम हो हमारे सरदार हज़रत मोहम्मद और उनकी पाक नस्ल पर ख़ास कर ज़मीनों पर अल्लाह के ज़रिए बाक़ी रखी गई हस्ती पर।
आप सब का स्वागत है! इस सभा में आपके आने से बहुत ख़ुश हूं जो नौजवानों की राष्ट्रीय सलाहियत और क्षमता की प्रतीक है।
खेल और साइंस दोनों मैदानों में मेडल पाने वालों ने अवाम को ख़ुश कर दिया। यह बहुत अहम है। आपने अपनी मेहनत और कोशिशों से अवाम को ख़ुश कर दिया और नौजवानों में जोश और शौक़ पैदा कर दिया। यह बहुत बड़ी बात है। इस साल, इन कुछ महीनों में आपने अपनी मेहनत से यह जो मेडल हासिल किए हैं, मेरी नज़र में दूसरे मेडलों पर इन्हें श्रेष्ठता हासिल है। क्योंकि हम सॉफ़्ट वॉर की हालत में हैं। सॉफ़्ट वॉर में दुश्मन की कोशिश यह है कि अवाम में नाउम्मीदी और निराशा पैदा कर दे। उन्हें उनकी सलाहियतों की ओर से निराश कर दें। आप यह मेडल हासिल करके दुश्मन की कोशिशों के विपरीत रास्ते पर बढ़ते हैं और ईरानी नौजवानों में और ईरानी क़ौम में जो ताक़त व क्षमता मौजूद है, उसको व्यवहारिक तौर पर आपने साबित कर दिया। इसलिए कहा जा सकता है कि इन मेडलों की अहमियत ज़्यादा है। यह सबसे ठोस जवाब है जो दुश्मन को दिया जा सकता था और आपने यह जवाब दे दिया।
हमारा प्यारा ईरान उम्मीद का प्रतीक है, उम्मीदों का आइना है। यह जो कुछ लोग नौजवानों और नौजवान नस्ल में मायूसी की बातें करते हैं, बिना रिसर्च के इस तरह की बातें करते हैं। ईरान उम्मीदों का प्रतीक है। ईरानी नौजवान प्रतिभाशाली और सक्षम हैं। यह बहुत अहम है कि हम ईरानी नौजवानों की सलाहियतों, महारतों और क्षमताओं को पहचानें और समझें। ईरानी नौजवान चोटियों को फ़तह करने की सलाहियत रखते हैं, जैसा कि आप लोग चोटी पर पहुंचे हैं। आपने खेल-कूद और साइंस के मैदानों में विश्व चैंपियनशिप हासिल की और चोटी पर पहुंचे। ईरानी नौजवान, चोटी को फ़तह करने की सलाहियत रखता है, लेकिन शर्त यह है कि कोशिश में लग जाए। उनके अंदर यह सलाहियत मौजूद है। बस उन्हें हिम्मत, मेहनत और आगे बढ़ने की ज़रूरत है।
इंक़ेलाब के बाद, हमारे मुल्क के कुछ विभागों में बहुत तेज़ी से तरक़्क़ी हुयी है उनमें से एक यही खेल-कूद का विभाग है। इस साल हमारे नौजवानों ने स्पोर्ट्स में बहुत तरक़्क़ी की और कुश्ती, वॉलिबॉल और कुछ दूसरे मैदानों में अपनी सलाहियतों का लोहा मनवाया। हमारे अंदर ये हालत और सलाहियतें नहीं थीं। कुल मिलाकर इस साल जो क्षमताएं ज़ाहिर हुयी हैं, शायद मुल्क के खेल के इतिहास में अभूतपूर्व हैं। साइंस के ओलंपियाड में भी यही स्थिति है। साइंस ओलंपियाड में हमारे नौजवानों ने चोटियां फ़तह की हैं। वास्तविक मुक़ाबलों में अपने प्रतिद्वंदवी पर विजय हासिल की। यानी अंतर्राष्ट्रीय मुक़ाबले में ईरान फ़ातेह रहा। आप जो काम भी करते हैं, वह ईरान के नाम लिखा जाता है। आप जो भी कारनामा अंजाम देतें हैं, वह ईरानी क़ौम के नाम लिखा जाता है। यह राष्ट्रीय ध्वज जो उन साहब ने फहराया, बहुत अहम है। ये सजदे जो किए जाते हैं, ये दुआएं जो खिलाड़ी कामयाबी मिलने पर करते हैं, बहुत अहम हैं। ये ईरानी क़ौम की पहचान हैं।
साइंस के ओलंपियाड में मेडल लाने वाले ये नौजवान, चमकते हुए सितारे हैं और अगर मेहनत की तो अगले 10 साल में ये सूरज बन जाएंगे।
मेरी ताकीद यह है, अधिकारियों के लिए मेरी ताकीद यह है कि इन नौजवानों पर ध्यान दें, उन्होंने जो कामयाबी हासिल की है, उसे काफ़ी न समझें बल्कि आगे बढ़ें। ये सितारे आगे बढ़े तो 10 साल में सूरज बन जाएंगे। यह बड़ा काम होगा। अलबत्ता हमने इंक़ेलाब के आग़ाज़ से अपने नौजवानों में इस किरदार को देखा है। आप जानते हैं। अगर हमारे नौजवानों ने किताबों में पढ़ा हो तो (जानते हैं कि) इंक़ेलाब के आग़ाज़ में, इंक़ेलाब की कामयाबी के दो साल बाद (दुश्मनों ने) हमारे मुल्क पर एक जंग थोप दी जो 8 साल तक जारी रही। इंकेलाब की कामयाबी के शुरू के दिनों में थोपी गयी यह आठ वर्षीय जंग (संसाधन के लेहाज़ से) बहुत कमी होने के बावजूद, ईरान की फ़तह का मैदान बनी। यानी ईरान ने अपने दुश्मन को, सद्दाम को, जिसको सब ने सपोर्ट किया था, पराजित किया। यह काम किसने किया? नौजवानों ने। इस जंग में सैन्य आविष्कार नौजवानों ने किए। हम क़रीब से देख रहे थे। इस दौर में ईरानी नौजवानों ने इसी तरह अपने सैन्य आविष्कारों को सुव्यवस्थित किया कि उस दुश्मन को हरा दें जिसके पास बेपनाह ताक़त और क्षमता मौजूद थी। यह जंग के मैदान की हालत थी।
ज्ञान विज्ञान के मैदान में भी यही हुआ। वैज्ञानिक जंग के मैदान में भी हावी हुए। आज बरसों बाद हमारे नौजवान बहुत से रिसर्च सेंटरों में, दुनिया की रिसर्च में पहले नंबर पर हैं। पहली पोज़ीशन हासिल की। या कम से कम शुरुआती दस में जगह हासिल की। नैनो, लेज़र, ऐटमी टेक्नॉलोजी और नाना प्रकार के सैन्य उद्योगों में, अहम मेडिकल रिसर्च में बड़े कारनामे किए हैं। अभी कुछ दिन पहले मुझे सूचना दी गयी कि हमारे एक रिसर्च सेंटर ने एक लाइलाज, ऐसी बीमारी का इलाज ढूंढ लिया जो लाइलाज समझी जाती थी। यह बहुत अहम है। हमारे नौजवान काम कर रहे हैं। मुल्क आगे बढ़ रहा है। मुल्क काम कर रहा है। आप उसके प्रतीक हैं। यह हमारे नौजवानों की पोज़ीशन है।
दुश्मन यह पोज़ीशन नहीं देखना चाहता। पहले तो वह यह पोज़ीशन देखना ही नहीं चाहता और फिर चाहता है कि अगर कोई तरक़्क़ी हो तो उसे रोक दिया जाए। ज्ञान विज्ञान और टेक्नॉलोजी के मैदान में तरक़्क़ी, सेवा के मैदान में तरक़्क़ी और खेल-कूद के मैदान में हमारी कामयाबी दुश्मन नहीं देख सकता; लेकिन जो तरक़्क़ी है वह, उसको रोक नहीं सकता, इसलिए झूठ सच के ज़रिए उसको धूमिल करके दिखाना चाहता है। दुश्मन का काम यह है। कुछ कमियों को बढ़ा चढ़ा कर बयान करता है। कुछ स्पष्ट तथ्यों को छिपाने की कोशिश करता है और हक़ीक़त के ठीक उलटा ज़ाहिर करता है। लेकिन आपने खेल-कूद या ज्ञान विज्ञान के मैदान में चोटी पर पहुंच कर दिखा दिया कि ईरान का माहौल, उज्जवल है। आपने दुश्मन के प्रोपैगंडे के विपरीत हक़ीक़त को साबित कर दिया जो ईरान के माहौल को अंधकारमय बनाना चाहता है। आप चाहते हैं कि आगे बढ़कर यह साबित कर दें कि ईरान का माहौल अंधकारमय नहीं बल्कि उज्जवल है। उनकी (दुश्मनों की) कोशिश यह है कि ईरानी नौजवानों को ख़ुद पर जो विश्वास और यक़ीन है, उससे वंचित कर दे। यह वह काम है जो दुश्मन करना चाहता है।
अलबत्ता हमारे नौजवानों को चाहिए कि अपनी कोशिश बढ़ाएं। नौजवानों में कभी न ख़त्म होने वाली ताक़त पायी जाती है। "नौजवानी" एक असाधारण ताक़त है जो कभी ख़त्म होने वाली नहीं है; आप इस ताक़त से काम लेकर जो काम भी करें जितनी भी कोशिश और मेहनत करें, इस ताक़त का जितना इस्तेमाल करें, यह उतनी ही बढ़ती है। नौजावनी की ताक़त, ऐसी ताक़त है कि उससे जितना काम लिया जाता है, उतनी ही बढ़ती है। हमारे नौजवान, अपनी मेहनत और कोशिश बढ़ा दें। अपनी सलाहियत से क़ौम के लिए काम करें। यह अहम है।
अब मुमकिन है कि कुछ लोग किसी दूसरे मुल्क में रहना चाहते हों लेकिन जान लें कि वहाँ वे ग़ैर होंगे। आप अगर किसी दूसरे मुल्क में जाते हैं तो वहाँ जो काम भी करें, जिस मुक़ाम पर भी पहुंच जाएं वहाँ आप ग़ैर होंगे। (लेकिन) यहाँ आपका घर है। यह आपका मुल्क है। यह सरज़मीन आपकी अपनी है। इसका संबंध आपसे है। आपके बच्चों से और आपकी नस्ल से इसका संबंध है; ईरानी नौजवान इन बिंदुओं पर ध्यान दें। किसी भी मुल्क में कोई भी संशय की हालत में ज़िंदगी नहीं गुज़ार सकता। आप आज मुहाजिरों को देख रहे हैं। ख़ुद उनके लफ़्ज़ों में, अमरीका में और दूसरी जगहों पर मुहाजिरों के साथ किस तरह पेश आ रहे हैं। चूंकि वे ग़ैर हैं इसलिए उनके साथ यह सुलूक किया जा रहा है। कठिनाई, दुर्व्यवहार और उपेक्षित अंदाज़ से पेश आते हैं। निर्दयता का सुलूक करते हैं।
यह ओलंपियाड में मेडल लाने वाले आप नौजवानों के बारे में कुछ बातें थीं।
इन प्यारे बच्चों ने भी सचमुच और वास्तव में एक अविस्मरणीय ‘गौद’(1) दिखाया, यानी मैंने कभी भी, एक बार को छोड़ कर जो यहीं देखा था, इस तरह के पारम्परिक व्यायाम को नहीं देखा था जो ये बच्चे करते हैं। अलब्ता बच्चों को भारी व्यायाम नहीं करना चाहिए, उन्हें जितना हो सके वार्म अप और हल्की कसरत करनी चाहिए, बस यही काम करने चाहिएलेकिन भारी व्यायाम को कुछ साल बाद के लिए छोड़ देना चाहिए। ख़ैर तोयह बातें खेल और ओलम्पियाड से संबंधित थीं।
इन दिनों हमारे प्यारे ईरान के बारे में कुछ बकवास बातें भी हुई हैं, अब ऐसा तो नहीं हो सकता कि हम उनके बारे में कुछ न कहें। अमरीकी राष्ट्रपति(2) ने अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में कुछ खोखली बातों और मसख़रेपन के साथ निराश ज़ायोनियों को उम्मीद दिलाने और उनका हौसला बढ़ाने की कोशिश की। अमरीकी राष्ट्रपति की अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन की यात्रा और उन्होंने जो काम किए और जो बातें कीं उनके बारे में मेरा विश्लेषण यही है। ये लोग निराश हैं, इन्होंने बारह दिवसीय युद्ध में ऐसा थप्पड़ खाया कि इन्हें यक़ीन ही नहीं हो रहा है, उन्हें इसकी उम्मीद नहीं थी, वे निराश हो गए। वह (ट्रम्प) उनका हौसला बढ़ाने गये, उन्हें निराशा से बाहर निकालने गये, जैसी बातें उन्होंने कहीं, वे निराश अधिकारियों से कही जाती हैं। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि ईरानी मिसाइल, जो ईरानी जवान के हाथों से बना है, अपने शोलों के साथ, अपनी आग के साथ, उनके कुछ संवेदनशील शोध केंद्रों की गहराइयों तक पहुंच कर उन्हें राख में बदल देगा, उन्हें इसकी उम्मीद नहीं थी लेकिन ऐसा हुआ। ये मिसाइल ज़ायोनी शासन के कुछ महत्वपूर्ण केंद्रों की गहराइयों तक घुसने और उन्हें नष्ट करने, तबाह करने में सफल रहे। ये मिसाइल इरानी जवानों ने बनाए थे। हमने ये मिसाइल कहीं से ख़रीदे नहीं थे, हमने ये कहीं से किराए पर नहीं लिए थे, ये मिसाइल इरानी जवानों ने बनाए थे, ये ईरानी युवाओं की पहचान का एक हिस्सा हैं। जब ईरानी जवान किसी मैदान में उतरता है, कोशिश करता है, मेहनत करता है, प्रयास करता है, अपने लिए मूल वैज्ञानिक ढाँचा तैयार कर लेता है, तो वह ऐसे काम करता है, बड़े-बड़े काम करता है। ये मिसाइल हमारे सशस्त्र बलों और सैन्य उद्योगों के पास तैयार थे, उन्होंने इन्हें इस्तेमाल किया, और उनके पास अभी और भी हैं, अगर ज़रूरत पड़ी तो वे दोबारा इनका इस्तेमाल करेंगे। जैसा कि मैंने कहा, मेरा निष्कर्ष यह है: इन साहब ने वहाँ जो बकवास की है, ये ओछी बातें और अशिष्ट व्यवहार, इसलिए था कि सामने वाले का हौसला बढ़ाएं, उनकी हिम्मत बंधाएं, वे हौसला हार चुके हैं। अलबत्ता कुछ अहम बातें हैं:
पहली बात यह है कि निश्चित रूप से अमरीका, ग़ज़ा जंग का मुख्य सहभागी है। यह बात उसने (ट्रम्प ने) भी स्वीकार की है, कहा कि हमने ग़ज़ा में एक साथ काम किया है, अगर नहीं कहते तो भी बात साफ़ थी, उनके हथियार, उनके संसाधन, बड़ी मात्रा में ज़ायोनी शासन को दिए गए ताकि ग़ज़ा के बेसहारा लोगों पर बरसाए जा सकें। अमरीका इस अपराध में भागीदार है। कहता है कि हम आतंकवाद से लड़ रहे हैं, इन हमलों में बीस हज़ार से अधिक बच्चे, शिशु और किशोर शहीद हो गए, क्या वे आतंकवादी थे? चार साल के बच्चे, पाँच साल के बच्चे, नवजात शिशु, तुमने बीस हज़ार ऐसे बच्चों को मार डाला! क्या वे आतंकवादी थे? आतंकवादी तो तुम लोग हो! आतंकवादी तो तुम लोग हो जो दाइश को जन्म देते हो और पूरे क्षेत्र की जान के पीछे लगा देते हो, फिर उन्हें रखे रहते हो ताकि किसी दिन फिर उन्हें इस्तेमाल कर सको, इस वक़्त ऐसा ही है,दाइश के बहुत से लोग अमरीका के नियंत्रण में हैं, उन्हें कहीं रख छोड़ा है ताकि जब चाहें कहीं भी उनका इस्तेमाल कर सकें, आतंकवादी तो तुम हो! आतंकवादी अमरीका है! ग़ज़ा के दो साल के युद्ध में आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार उन्होंने सत्तर हज़ार लोगों को मार डाला।
12 दिवसीय युद्ध में ईरान में अंधाधुंध नरसंहार और बमबारी के अलावा जो एक हज़ार से ज़्यादा लोगों पर की गई और उन्हें शहीद किया गया, हमारे वैज्ञानिकों को भी निशाना बनाया गया। वे (अमरीकी राष्ट्रपति) गर्व करते हैं कि उन्होंने ईरानी वैज्ञानिकों को क़त्ल कर दिया, हाँ, तुमने वैज्ञानिक को क़त्ल किया, तेहरानची(3) और अब्बासी(4) जैसे वैज्ञानिकों को क़त्ल कर दियालेकिन तुम साइंस को क़त्ल नहीं कर सकते। वे (अमरीकी राष्ट्रपति) गर्व से कहते हैं कि हमने ईरान के परमाणु उद्योग को बमबारी करके ख़त्म कर दिया। अच्छी बात है, यही सपना देखते रहिए! लेकिन आप हैं कौन कि अगर किसी देश के पास परमाणु उद्योग है तो आप हस्तक्षेप करें और कहें कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं? आप दुनिया के क्या हैं? ईरान के पास परमाणु प्रतिष्ठान और परमाणु उद्योग है या नहीं, इसका अमरीका से क्या लेना-देना है? इस तरह के हस्तक्षेप, बिल्कुल ग़लत, अनुचित और ज़ोर-ज़बरदस्ती के हस्तक्षेप हैं।
मैंने सुना है कि इस वक़्त अमरीका के सभी राज्यों में लोग सड़कों पर उनके(5) ख़िलाफ़ नारे लगा रहे हैं, जो रिपोर्ट दी गई है उसके मुताबिक़, जो आपने सुनी, अमरीका के विभिन्न शहरों में, अमरीका के विभिन्न राज्यों में सत्तर लाख लोग इस व्यक्ति के ख़िलाफ़ नारे लगा रहे हैं। अगर आप में बहुत गुण है तो इन दसियों लाख लोगों को शांत कीजिए और घर लौटाइए। दूसरे देशों के मामलों में हस्तक्षेप करते हैं, सैन्य अड्डे बनाते हैं। आतंकी, अमरीका है, अस्ल में आतंक का सच्चा प्रतीक तो अमरीका है।
वे (अमरीकी राष्ट्रपति) कहते हैं कि मैं ईरानी जनता का समर्थक हूँ। झूठ बोलते हैं! ये सेकेंड्री प्रतिबंध, जो अमरीका कई बरसों से लगा रहा है और डर के मारे बहुत सारे देश उसके प्रभाव में आ गए हैं, ये प्रतिबंध किसके ख़िलाफ़ हैं? ईरानी क़ौम के ख़िलाफ़। तुम ईरानी क़ौम के दुश्मन हो, दोस्त नहीं।
अमरीकी राष्ट्रपति कहते हैं कि मैं डील करने वाला इंसान हूँ, मैं ईरान के साथ डील करना चाहता हूँ। ऐसी डील जो मुँह-ज़ोरी पर आधारित हो और जिसका नतीजा पहले से तय हो, वह डील नहीं, डिक्टेशन है और ईरानी क़ौम कभी भी डिक्टेशन को नहीं मानेगी। इसका नाम डील नहीं है। "चलिए बैठकर बात करें और नतीजा यह निकले!" पहले से तय कर देते हैं! यह ज़बरदस्ती है। ईरान को कुछ दूसरे देशों की तरह इन ज़बरदस्तियों से प्रभावित नहीं किया जा सकता।
अमरीकी राष्ट्रपति का कहना है कि उन लोगों के शब्दों में मध्यपूर्व में और हमारे शब्दों में वेस्ट एशिया के इस इलाक़े में, मौत, तबाही और जंग है। ते जंग आप ही शुरू कराते हैं, अमरीका युद्ध समर्थक है, अस्ल में जंग, अमरीका ही शुरू करता है, जंग को जन्म देता है। वह टार्गेट किलिंग के अलावा युद्ध भी भड़काता है। यह युद्ध उनका है, मौत उनकी है, जो काम वे करते हैं, जो काम अमरीका इस इलाक़े में करता है, वह यह है। यह फ़ौजी अड्डे किस लिए हैं? इस इलाक़े के विभिन्न देशों में अमरीका ने इतने सारे सैन्य अड्डे क्यों बनाए हैं? तुम्हारा यहाँ काम क्या है? इस इलाक़े का तुमसे क्या लेना-देना है? यह इलाक़ा, यहाँ के लोगों का है। इसलिए, जो कुछ भी इस व्यक्ति ने स्टैंड के रूप में कहा, वह सब ग़लत और बहुत ज़्यादा झूठ है और ज़ोर-ज़बरदस्ती को दर्शाता है, ज़ोर-ज़बरदस्ती कुछ क़ौमों पर असर डालती है लेकिन अल्लाह की तौफ़ीक़ से ईरानी क़ौम पर कभी भी असर नहीं डाल पाएगी।
आप सब पर अल्लाह का सलाम, उसकी रहमत और बरकत हो।
- गौद यानी अखाड़ा, शाब्दिक अर्थ गहरी जगह। चौकोर या छह कोनों वाली एक ऐसी जगह जो ज़मीन की सतह से नीचे होती है और जहाँ पारंपरिक कुश्ती (पहलवानी) करने वाले व्यायाम करते हैं। पहलवानी और पारंपरिक व्यायाम की इमारत को ज़ूरख़ाने कहा जाता है।
- डोनाल्ड ट्रम्प ने हमास और ज़ायोनी शासन के बीच युद्ध विराम समझौते पर हस्ताक्षर के लिए मिस्र जाने से पहले, ज़ायोनी शासन की संसद में दिए गए एक भाषण में, ज़ायोनी शासन के लिए अपने भरपूर समर्थन पर फिर से ज़ोर देते हुए, इस युद्धविराम के लिए ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले को ज़रूरी बताया और दावा किया कि अमरीका भी और ज़ायोनी शासन भी, ईरानी जनता से कोई दुश्मनी नहीं रखते और सिर्फ़ शांति से रहना चाहते हैं।
- शहीद डॉक्टर मुहम्मद महदी तेहरानची
- शहीद डॉक्टर फ़रीदून अब्बासी
- डोनल्ड ट्रम्प सरकार के भ्रष्टाचार और अक्षमता के विरोध में अमरीका के सभी राज्यों के दसियों लाख लोगों ने देशव्यापी प्रदर्शनों में भाग लिया।
23/10/2025

