दरस-ए-अख़लाक़ रहमदिली व मोहब्बत से समाज का माहौल जन्नत बन जाएगा

दरस-ए-अख़लाक़ रहमदिली व मोहब्बत से समाज का माहौल जन्नत बन जाएगा

हमारी रवायतों में आया है कि मोमिन एक दूसरे के साथ आपस में रहमदिली व मोहब्बत से पेश आते हैं; यानी आपस में एक दूसरे पर रहम करते और एक दूसरे से मोहब्बत करते हैं। यह एक अख़लाक़ी फ़रीज़ा है और यह चीज़ हमारे समाज की बुनियाद और तरक़्क़ी में असरअंदाज़ होती है। लोग आपस में एक दूसरे पर रहम करें ताकि अल्लाह उन पर रहम करे। जब आम लोगों के दिलों में एक दूसरे के लिए रहमदिली, नर्मी, अच्छी सोच और मोहब्बत है, तो समाज का माहौल जन्नत हो जाएगा। जिस वक़्त लोगों के मन में सियासी या ज़ाती जज़्बात के तहत दुश्मनी, बददिली और बुरा ख़्याल होगा, समाज का माहौल तारीक व घुटन वाला होगा। आपस में एक दूसरे का साथ दें। एक दूसरे की मदद करें। एक दूसरे को माफ़ करने का जज़्बा रखें।

इमाम ख़ामेनेई

 05/04/2002

17/11/2022