इस्लामी घराना: मियां बीवी को एक दूसरे से ज़बरदस्ती अपनी बात मनवाने का हक़ नहीं

इस्लामी घराना: मियां बीवी को एक दूसरे से ज़बरदस्ती अपनी बात मनवाने का हक़ नहीं

इस्लाम की नज़र में मियां-बीवी दोनों जीवन साथी हैं। उन्हें चाहिए एक दूसरे के साथ मोहब्बत भरा रवैया अपनाएं। शौहर को यह हक़ नहीं है कि वह बीवी को अपनी बात मनवाने के लिए मजबूर करे, बीवी को भी हक़ नहीं है कि वह शौहर को अपनी बात मनवाने के लिए मजबूर करे। फ़ैमिली व परिवार के भीतर शौहर-बीवी के संबंध के बारे में इस्लाम के हुक्म और नियम बहुत ही सटीक व फ़ितरत के मुताबिक़ हैं। अल्लाह ने मर्द और औरत के मेज़ाज के मद्देनज़र, इस्लामी समाज के हित के मद्देनज़र, ये हुक्म तय किए हैं। ये सब मर्द और औरत के मेज़ाज की वजह से हैं। हर एक की अलग ख़ुसूसियत है। फ़ैमिली में काम और मर्द के अख़लाक़ की औरत से तवक़्क़ो नहीं रखनी चाहिए, औरत के अख़लाक़ की मर्द से तवक़्क़ो नहीं रखनी चाहिए। हर एक की तबीयत व नफ़सियात के लेहाज़ से कुछ ख़ुसूसियतें हैं।

इमाम ख़ामेनेई

15/12/20

24/12/2022