शैख़ नईम क़ासिम का ईरानी अवाम से ख़िताब
आपने पूरी दुनिया के सामने दुश्मन के ख़िलाफ़ रेज़िस्टेंस का एक मॉडल पेश किया
नस्र के नाम से मशहूर ऐतिहासिक जुमे की नमाज़ की वर्षगांठ और "हमदर्द ईरान" कैम्पेन के चौथे चरण की शुरुआत के साथ, कोरोना और बंदर अब्बास की घटना से लेकर अल-अक़्सा तूफ़ान और ईरानी राष्ट्र के ख़िलाफ़ ज़ायोनी शासन की 12-दिवसीय जंग तक ईरानी राष्ट्र के सहानुभूति के जज़्बे को बयान करने के लिए एक प्रोग्राम मंगलवार की सुबह तेहरान के इमाम खुमैनी इमामबाड़े में आयोजित किया गया।
इस्लामी क्रांति के नेता के कार्यालय के प्रमुख हुज्जतुल इस्लाम वलमुस्लेमीन मोहम्मदी गुलपायगानी ने "हमदर्द ईरान" कैम्पेन को इस्लामी क्रांति के नेता के आह्वान का जवाब बताया कि जिन्होंने ज़ायोनी दुश्मन के ख़िलाफ़ लड़ाई में नुक़सान उठाने वालों की मदद करने के लिए आगे आने की अपील की थी।
उन्होंने ईरानी क़ौम की पाकीज़ा मदद के कुछ नमूनों का ज़िक्र करते हुए, शादी की अंगूठी को दान में देने या अपने अपार्टमंट को बेचकर इस कैम्पेन में शामिल होने की घटनाओं की ओर इशारा किया।
इस्लामी क्रांति के नेता के कार्यालय के प्रमुख ने संघर्ष के मार्ग में आयतुल्लाह ख़ामेनेई के मुख्य रोल की ओर इशारा करते हुए, रेज़िस्टेंस के जियालों में बलिदान की भावना की सराहना की और कहा कि उन्होंने इस मार्ग में अल्लाह पर भरोसे और अहलेबैत अलैहेमुस्सलाम को वसीला क़रार देते हुए परचम को उठाया है।
हुज्जतुल इस्लाम वलमुस्लेमीन मोहम्मदी गुलपायगानी ने अपनी स्पीच के दूसरे भाग में शहीद नसरुल्लाह का ज़िक्र करते हुए कहा, "क़ुम के धर्मगुरू जो शहीद नसरुल्लाह के बहुत क़रीबी थे, कहते हैं कि सैयद हसन कहा करते थे कि मैं उस ज़माने की कल्पना भी नहीं कर सकता कि मैं रहूं और इस्लामी इंक़ेलाब के नेता न हों।"
उन्होंने इस बात पर बल देते हुए कि इस्लामी इंक़ेलाब के नेता, इस्लाम को ज़िंदा करने में शिया और इस्लामी धर्मगुरूओं के रोल का ही क्रम हैं, कहा, "इस वक़्त यह हस्ती परचम को अपने हाथ में लेकर सरकशों के मुक़ाबले में डट गयी है। अल्लाह ने उन्हें कुछ ख़ुसूसियतें दी हैं जिसमें सबसे पहले उनकी बेमिसाल बहादुरी है।"
इस्लामी क्रांति के नेता के कार्यालय के प्रमुख ने, अपनी स्पीच के अंत में ग़ज़ा पट्टी में ज़ायोनी शासन के अपराधों की ओर इशारा करते हुए, ज़ायोनी शासन के मुक़ाबले में इस्लामी देशों के नेताओं और शासकों की कोताही की आलोचना की।
दूसरी ओर हिज़्बुल्लाह के महासचिव शैख़ नईम क़ासिम ने भी इस प्रोग्राम के लिए एक वीडियो संदेश भेजा जिसमें उन्होंने शहीद सैयद हसन नसरुल्लाह और सैयद हाशिम सफ़ीउद्दीन को याद करते हुए, रेज़िस्टेंस के प्रति इस्लामी इंक़ेलाब के नेता, ईरानी क़ौम और सरकार के सपोर्ट के लिए आभार जताया।
हिज़्बुल्लाह के महासचिव ने सैयद हसन नसरुल्लाह और सैयद हाशिम सफ़ीउद्दीन की शहादत की बरसी पर उन्हें श्रद्धांजलि पेश करते हुए, उन्हें ऐसी हस्तियां बताया जिन्होंने ईमान, विलायत, ख़ुलूस, बलिदान, इस्लामी तरबियत से नस्लों, रेज़िस्टेंस करने वाले समाज और ताक़तवर संघर्षकर्ताओं की तरबियत की।
शैख़ नईम क़ासिम ने कहा कि लेबनान में रेज़िस्टेंस, हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनेई की विलायत की देन है जो इमाम ख़ुमैनी के रास्ते पर चल रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, "ये सारे बड़े नतीजे हमें उस मदद की बरकत से हासिल हुए हैं जो हर मैदान में मौजूद रही है चाहे जेहादी मैदान हो, वित्तीय मैदान, ट्रेनिंग, इंफ़्रास्ट्रक्चर, विलायत और समाज से संबंधित मैदान हों।"
हिज़्बुल्लाह के महासचिव ने इस बात की ओर इशारा करते हुए कि रेज़िस्टेंस, ऐसी कठिन और जटिल जंग से बाहर निकला जिसका उसे पिछले 40-45 साल में सामना नहीं हुआ था, कहा, "मैं ख़ुशख़बरी सुनाता हूं कि सैयद हसन के बच्चे बहादुर मुजाहिद हैं और परिवार, शहीद और सभी कमांडर जो मैदान में डटे रहे, इस्राईल को उसका लक्ष्य हासिल करने नहीं देंगे। अल्लाह की कृपा से हम ताक़तवर हैं।
शैख़ नईम क़ासिम ने अपने वीडिया पैग़ाम के दूसरे भाग में, रेज़िस्टेंस के प्रति इस्लामी इंक़ेलाब के नेता, ईरानी सरकार और क़ौम के सपोर्ट पर आभार जताया और कहा, "इस्लामी गणराज्य ईरान के तमाम सपोर्ट के लिए, इस्लामी इंक़ेलाब के नेता इमाम ख़ामेनेई (अल्लाह उनका साया बाक़ी रखे), आईआरजीसी ईरान की मुजाहिद और बहादुर क़ौम, सरकार और सभी सुरक्षा फ़ोर्सेज़ के हम बहुत ही शुक्रगुज़ार हैं। हम महसूस करते हैं कि सारा ईरान, शुरू से आख़िर तक हमारे साथ है। उसने हमारी मदद की और सबब बना कि हम इस संकल्प और ताक़त का एहसास करें।"
हिज़्बुल्लाह के महासचिव ने, हालिया जंग और ज़ायोनी-अमरीकी अग्रेशन के मुक़ाबले में ईरानी क़ौम की दृढ़ता की ओर इशारा करते हुए कहा, "मैं ईरान की इस्लामी सरकार को इस्राईली-अमरीकी अग्रेशन के ख़िलाफ़ 12 दिनों तक हमेशा
याद रहने वाला रेज़िस्टेंस दिखाने पर मुबारकबाद पेश करता हूं। आपने पूरी दुनिया के सामने एक नमूना पेश किया कि कैसे (अग्रेशन का) मुक़ाबला किया जाता है, डट कर खड़े होते हैं और इमाम ख़ामेनेई (अल्लाह उनका साया बाक़ी रखे) की रहनुमाई की बरकत और अवाम की इस अज़ीम एकजुटता के साए सहित आर्म्ड फ़ोर्सेज़ के ईमान के जज़्बे और संकल्प से लैस अमल के ज़रिए बड़ी कामयाबियां हासिल की जा सकती हैं, यह फ़तह मौजूदा ज़माने में और इतिहास में दर्ज होगी।
शैख़ नईम क़ासिम ने अपने बयान के अंत में ईरान के ख़िलाफ़ पश्चिम के हालिया रवैये की ओर इशारा करते हुए कहा, "आज फिर उन्होंने ईरान पर पाबंदियां लगा दी हैं लेकिन क्या पाबंदियां कभी रुकी हैं? पाकीज़ा इस्लामी इंक़ेलाब की कामयाबी के बाद से अब तक पाबंदिया रही हैं यानी 46 साल से अब तक पाबंदियां जारी हैं लेकिन ईरानी क़ौम दिन ब दिन (दुश्मन के) मुक़ाबले में ज़्यादा सफल होती जा रही है और साबित कर रही है कि वह मैदान में डटी रहने वाली और हक़ को मानने वाली है।
इस प्रोग्राम में, हमास के प्रतिनिधि ख़ालिद क़ुदूमी ने अलअक़्सा फ़्लड आप्रेशन की बरसी पर श्रद्धांजलि पेश की और इस आप्रेशन को मोमिनों के सम्मानित होने और ज़ायोनी शासन के अंत की शुरूआत का दिन बताया और कहा, " ईरान के नेता सैयद अली ख़ामेनेई और इसी तरह ईरान की अज़ीम क़ौम का शुक्रगुज़ार हूं कि हमेशा पीड़ितों और ग़ज़ा पट्टी, लेबनान और यमन के अवाम के साथ रहे हैं। ऐसा राष्ट्र जिसका शरीफ़ और अज़ीज़ ख़ून फ़िलिस्तीनियों के ख़ून से मिल गया। आप रेज़िस्टेंस और क्षेत्र के भविष्य में भागीदार हैं।
हमास के प्रतिनिधि ने शहीद हसन नसरुल्लाह को श्रद्धांजलि पेश की और उन्हें सही मानी में फ़िलिस्तीन और अलअक़्सा की राह का शहीद बताया और कहा, "हमें चिंता नहीं है। शहीद इस्माईल हनीया के शब्दों में, जब कोई मर्द गिरेगा तो दूसरा मर्द उठ खड़ा होगा। दुश्मन को यह भ्रम है कि वह टार्गेट किलिंग के ज़रिए, रास्ते को मोड़ देगा लेकिन आज हम डटे हुए हैं। यह रास्ता फ़िलिस्तीन और मस्जिदुल अक़्सा के पूरी तरह आज़ाद होने तक जारी रहेगा।
शहीद सैयद हसन नसरुल्लाह की बेटी और शहीद सैयद हादी नसरुल्लाह की बहन ज़ैनब नसरुल्लाह ने इस प्रोग्राम में इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह, इंक़ेलाब के शहीदों और क़ुद्स की राह के शहीदों को सलाम और दुरूद भेजा और इस प्रोग्राम में अपनी मौजूदगी का मक़सद आयतुल्लाह ख़ामेनेई का आज्ञापानल करने के अहद को दोहराना बताया।
उन्होंने ईरानी क़ौम का शुक्रिया अदा करते हुए कहा, "आप हमेशा हमारे साथ रहे हैं। आप हैं जिन्होंने जो कुछ आपके पास है, उससे रेज़िस्टेंस की मदद की। पेजर घटना के घायलों का अपने यहाँ इलाज किया और रेज़िस्टेंस के सपोर्ट में डटे रहे।
शहीद नसरुल्लाह की बेटी ने इस्लामी इंक़ेलाब के नेता को संबोधित करते हुए कहा, " ऐ मेरे आक़ा, हम अपने सैयद (शहीद सैयद हसन नसरुल्लाह) की आखों से छलकने वाली मोहब्बत से लबरेज़ होकर, जो आपके इश्क़ में डूबे हुए थे, आए हैं जो अपने अवाम में बड़ी सामाजिक स्थिति के बावजूद, ख़ुद को सिर्फ़ आपका एक सिपाही समझते थे।"
ज़ैनब नसरुल्लाह ने इस बात का ज़िक्र करते हुए कि सैयद हसन की दुआ यह थी अल्लाह उनकी बाक़ी बची हुयी उम्र लेकर आयतुल्लाह ख़ामेनेई की उम्र को बढ़ा दे, कहा, "ऐ हमारे सरदार और सरपरस्त, हम आज आए हैं कि आपका आज्ञापानल करने के अहद को दोहराएं। हम सैयद हसन के बच्चे आपसे यह कहने आए हैं कि हम आपके सिपाही है और इसी राह के लिए ख़ुद को समर्पित कर दिया है।"
इस प्रोग्राम के आग़ाज़ में आयतुल्लाह ख़ामेनेई की रचनाओं का प्रचार-प्रसार और संरक्षण करने वाले कार्यालय के उपप्रमुख ईमान अत्तारज़ादे और "हमदर्द ईरान" कैम्पेन के सचिव ने, एक रिपोर्ट पेश की जिसमें उन्होंने बताया कि किस तरह सन 2020 में प्रभावित वर्ग की पाकीज़ा मदद करने के लिए पहली बार इस कैम्पेन को शुरू किया गया जो अब तक जारी है। ऐसा कैम्पेन जो बंदर अब्बास घटना, प्राकृतिक आपदाओं, अलअक़्सा फ़्लड आप्रेशन, ग़ज़ा पट्टी और लेबनान के अवाम की मदद और फिर 12 दिवसीय जंग में, ईरानी क़ौम के अपने हमवतनों और क्षेत्र में अपने भाइयों और रेज़िस्टेंस के मोर्चे की सहानुभूति के जज़्बे से भरी मदद का वर्णन करता है।
अत्तारज़ादे ने ग़ज़ा पट्टी और लेबनान के मज़लूम अवाम के लिए महिलाओं की ओर से सैकड़ों किलो सोने के भेंट किए जाने को अवाम की ओर से मदद के नमूने बताते हुए कहा, "एक दूसरे की मदद, "हमदर्द ईरान" कैम्पेन की मुख्य चिंता हो गयी। ऐसी प्रक्रिया जिसने अक्तूबर 2024 में सरबुलंद हिज़्बुल्लाह और ग़ज़ा पट्टी के अवाम की मदद में एक नया अध्याय जोड़ा और इस कैम्पेन की ध्वजवाहक भी ईरानी औरतें थीं ताकि इस्लामी इंक़ेलाब के नेता का ग़ज़ा पट्टी और लेबनान के अवाम की मदद करने का हुक्म पूरा हो।
07/10/2025

