बक़ौल इमाम ख़ुमैनी: अवाम के तबक़े से बनने वाले शासक अवाम का दर्द समझते हैं

बक़ौल इमाम ख़ुमैनी: अवाम के तबक़े से बनने वाले शासक अवाम का दर्द समझते हैं

यह अल्लाह की तरफ़ से इस क़ौम पर एक लुत्फ़ व करम है कि ख़ुद अवाम के बीच से, ख़ुद यहाँ के लोगों के दरमियान से लोग चुने गए और उन्होंने सरकार बनायी। जब अवाम के भीतर से सरकार बनी हो, ख़ुद अवाम के बीच से जो पूंजीपति नहीं हैं, वे लोग सत्ता में आए हों जो ख़ुद भी उनकी तरह हों तो ये लोग अवाम का दर्द समझ सकते हैं ... इस बात से डरते रहिए कि कहीं ऐसा न हो कि एक दिन अल्लाह न करे कि इस रास्ते की दिशा बदल जाए, आप दूसरी डगर पर चल पड़ें और इसका अवामी होना आप अपने हाथ से खो दें। इस बात से डरें और होशियार रहें कि अगर दूसरी स्थिति पैदा होती है तो उस वक़्त याद रखिएगा कि ख़तरा पैदा हो जाएगा। उस वक़्त विदेशी तत्व आपकी ओर ललचायी नज़रों से देखना शुरू कर देंगे।

इमाम ख़ुमैनी

19 अगस्त 1982

27/08/2023