बक़ौल इमाम ख़ुमैनी: इमाम हुसैन की क़ुर्बानी ने इस्लाम को बचाया
यह बात जो हालिया दिनों में हमारे जवानों के मन में बिठाई जा रही है कि आख़िर यह रोना धोना और मजलिस मातम कब तक चलेगा? आप दिखावा करते हैं! ये लोग नहीं जानते कि यह मजलिस व मातम क्या है? और इसकी बुनियाद को किस चीज़ ने अब तक बचाए रखा है? इस हक़ीक़त को नहीं समझते और इन लोगों को हम समझा भी नहीं सकते, ये लोग नहीं समझते कि इस मजलिस व मातम और इस रोने से इंसानों का निर्माण होता है, यह इंसानियत के निर्माण का ज़रिया है। ये शोक सभाएं, इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की मजलिस में शोकाकुल बयान, ज़ुल्म के ख़िलाफ़ प्रचार है। यह सरकशों के ख़िलाफ़ उठाई जाने वाली आवाज़ है। वे ज़ुल्म जो मज़लूम पर ढाए गए हों, उनका ज़िक्र व बयान हमेशा के लिए बाक़ी रखना चाहिए... वह बुनियाद जिसने अब तक सभी चीज़ों को बाक़ी व महफ़ूज़ रखा है, यही है। पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम ने भी फ़रमायाः "मैं हुसैन से हूं" यानी दीन को वह बचाएंगे और इस क़ुर्बानी से इस्लाम धर्म बचा है।
इमाम ख़ुमैनी
25/11/1979
10/09/2023

