इंसानियत को मुक्तिदाता की ज़रूरत "इंसानियत की तारीख़ में शायद ही कोई ऐसा दौर गुज़रा हो जब समाज का हर शख़्स, पूरी दुनिया में मानव समाज में, इंसानियत के मुक्तिदाता की ज़रूरत को इतना महसूस किया गया हो जितना आज महसूस किया जा रहा है...एक मुक्तिदाता की ज़रूरत का एहसास, इमाम महदी की ज़रूरत के एहसास, अल्लाह की हिमायत रखने वाली एक ताक़त का एहसास, एक मासूम इमाम की ज़रूरत का एहसास, इसमत (हर गुनाहों व ऐबों से पाक होने) और अल्लाह की ओर हिदायत की ज़रूरत का एहसास; इतिहास में कम ही दौर ऐसे होंगे जब इंसान में इस आला हक़ीक़त की ज़रूरत के ये सब जज़्बे मौजूद रहे हों।" (20 अप्रैल 2020)
03/02/2026
आज आप लोग दुनिया के हालात पर नज़र डालें, वही चीज़ हो हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम (हमारी जानें उन पर क़ुरबान) के ज़ुहूर से संबंधित रिवायतों में है, आज दुनिया में छायी हुयी है। दुनिया का ज़ुल्म से भर जाना, आज दुनिया ज़ुल्म से भर गयी है। हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम (अल्लाह उन्हें जल्द से जल्द ज़ाहिर करे) से संबंधित रिवायतों, दुआओं और मुख़्तलिफ़ ज़ियारतों में मिलता हैः “ज़मीन के ज़ुल्म व नाइंसाफ़ी से भर जाने पर, उसे न्याय से भर देंगे।” वैसे ही जैसे एक दिन पूरी दुनिया ज़ुल्म से भरी होगी, जिस ज़माने में ज़ुल्म इंसानियत पर छा जाएगा, उसी तरह अल्लाह उनके ज़माने में ऐसे हालात बना देगा कि पूरी इंसानियत में न्याय फैला हुआ नज़र आएगा। वह वक़्त यही है, इस वक़्त ज़ुल्म मानवता पर छाया हुआ है, आज इंसानी ज़िन्दगी विश्व स्तर पर ज़ुल्म के हाथों पिसी हुयी है (और ज़ालिमों के वर्चस्व का शिकार है) हर जगह ज़ुल्म का माहौल है। इमाम ख़ामेनेई 17/04/2008
08/08/2025
ज़माने की उम्मीद, इमाम महदी के बारे में ऐसी बातें कही गयीं जो किसी भी पैग़म्बर, औलिया और इमामों के बारे में नहीं कही गयीं और वह यह है कि ʺज़मीन को उसी तरह अद्ल व इंसाफ़ से भर देंगे जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।ʺ किसी भी पैग़म्बरे के बारे में ऐसी बात नहीं कही गयी है। अल्लाह ने यह बड़ी फ़ज़ीलत उन्हीं से मख़सूस की है, यह उपमा सिर्फ़ उन्हीं के लिए है। इमाम ख़ामेनेई 02/06/2015
31/01/2025
इतिहास में बहुत से दावेदार पैदा हुए हैं। ये दावेदार किसी एक निशानी को अपने ऊपर या किसी और पर मैच कर लेते थे। यह पूरी तरह ग़लत है। कुछ बातें जो इमाम महदी अलैहिस्सलाम के ज़ाहिर होने की निशानी के तौर पर बयान की जाती हैं, निश्चित नहीं हैं। यह ऐसी बातें हैं जिनका भरोसेमंद रवायतों में ज़िक्र नहीं मिलता। कमज़ोर रवायतों में ज़िक्र ज़रूर मिलता है इसलिए उनको माना नहीं जा सकता। इमाम ख़ामेनेई 09/07/2011
15/11/2024
इंतेज़ार के मसले में बहुत बारीकी के साथ साइंटिफ़िक तरीक़े से काम करने की ज़रूरत है। इस सिलसिले में प्रचलित जाहेलाना बातों से सख़्ती से परहेज़ करना चाहिए क्योंकि इन बातों से इमाम महदी होने का झूठा दावा करने वालों के लिए रास्ता समतल होता है। इमाम ख़ामेनेई 09/07/2011
08/11/2024
इंतेज़ार का तक़ाज़ा यह है कि इंसान ख़ुद को उसी हालत में ढाले और वही अख़लाक़ व अंदाज़ अख़्तियार करे जो उस ज़माने के लिए मुनासिब है जिसका उसे इंतेज़ार है। हमें चाहिए कि न्याय को सपोर्ट करें, ख़ुद को हक़ के सामने समर्पित रहने के लिए तैयार करें। इंतेज़ार इस तरह की हालत पैदा कर देता है। इमाम ख़ामेनेई 09/07/2011
25/10/2024
कुछ रवायतों में इमाम महदी को हज़रत यूसुफ़ जैसा कहा गया है कि उनके भाई उन्हें देख रहे थे, हज़रत यूसुफ़ उनके सामने थे, उनके क़रीब जाते थे लेकिन वे उन्हें नहीं पहचान पाते थे। इमाम महदी अलैहिस्सलाम का वजूद इस तरह नुमायां, स्पष्ट और हौसला देने वाली हक़ीक़त है। इमाम ख़ामेनेई 09/07/2011
18/10/2024
इस्लाम में इमाम महदी अलैहिस्सलाम से संबंधित अक़ीदा पूरी तरह मान्य अक़ीदों में है। सभी इस्लामी मतों का यह मानना है कि अंततः दुनिया में इमाम महदी के हाथों न्याय व इंसाफ़ का राज क़ायम होगा। इमाम ख़ामेनेई 09/07/2011
11/10/2024
अगर इमाम महदी के प्रकट होने का अक़ीदा न हो तो इसका मतलब यह होगा कि पैग़म्बरों की सारी कोशिशें, यह सत्य की ओर दावत, ये पैग़म्बरों का भेजा जाना, ये सबके सब बेकार की कोशिश थी, बेफ़ायदा थी। इमाम ख़ामेनेई 09/07/2011
04/10/2024
इंसानियत ने इन गुज़री हुयी सदियों के दौरान पैग़म्बरों की शिक्षाओं के प्रभाव में जो कुछ किया है वह हक़ीक़त में उस राजमार्ग की ओर बढ़ने की कोशिश है जो इमाम महदी अलैहिस्सलाम -अल्लाह उन्हें जल्द से जल्द ज़ाहिर करे- के ज़ाहिर होने के ज़माने में इंसानियत को उच्च लक्ष्यों की ओर ले जाएगी। इमाम ख़ामेनेई 09-07-2011
27/09/2024
इमाम महदी अलैहिस्सलाम के प्रकट होने का अक़ीदा जिस चीज़ की ख़ुशख़बरी देता है वह वही चीज़ है जिसके लिए सभी पैग़म्बर व ईश्वरीय दूतों को नियुक्त किया गया। यह मुख्य लक्ष्य है। इंसान का अल्लाह की ओर से दी गयी सभी सलाहियतों को इस्तेमाल करते हुए इंसाफ़ की बुनियाद पर तौहीद के अक़ीदे वाले समाज का गठन करना है। इमाम ख़ामेनेई 09/07/2011
20/09/2024