बग़दाद अंतर्राष्ट्रीय बुक फ़ेयर में "इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर की नज़र से ईरान-इराक़ सांस्कृतिक संबंध" शीर्षक के तहत बैठक का आयोजन
इराक़ की राजधानी बग़दाद में "इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर की नज़र से ईरान-इराक़ सांस्कृतिक संबंध" शीर्षक के तहत ख़ास बैठक आयोजित हुयी जिसमें रिसर्च स्कॉलर्ज़, बुद्धिजीवियों, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने शिरकत की।
Khamenei.ir के मुताबिक़, यह बैठक ईरान और इराक़ की दो क़ौमों के बीच सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सभ्यता के संबंधों के आयामों की समीक्षा और इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर के वैचारिक फ़्रेमवर्क में इराक़ के स्थान की व्याख्या के लिए, आयोजित हुयी, जिसमें ईरान और इराक़ के कुछ विचारकों ने दोनों क़ौमों के बीच सांस्कृतिक समानता की क्षमताओं और इन सांस्कृतिक संबंधों को मज़बूत बनाने के रास्तों के बारे में अपने विचार पेश किए।
इस बैठक की अध्यक्षता अलअस्र अध्ययन व सर्वे सेंटर के प्रमुख डॉक्टर मोहम्मद अस्सहाफ़ ने की और इराक़ के संस्कृति मंत्रालय के पूर्व उपप्रमुख डॉक्टर सैयद जाबिर अलजाबेरी, इस्लामी इंक़ेलाब प्रकाशन केन्द्र के रिसर्च स्कॉलर सैयद उम्मीद मोअज़्ज़ेनी, यूनिवर्सिटी प्रोफ़ेसर व रिसर्च स्कॉलर डॉक्टर माजिद अश्शुवैली ने अपने अपने विचार पेश किए।
इस संभा को संबोधित करने वाले वक्ताओं ने ईरान-इराक़ के बीच व्यापक ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक समानताओं की ओर इशारा करते हुए बल दिया कि दोनों क़ौमों के संबंधों की जड़ें, इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर की नज़र में, सभ्यता के गहरे संपर्क में हैं और इन क्षमताओं की पहचान दोनों मुल्कों के दरमियान वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और वैचारिक सहयोग में विस्तार का मार्ग समतल कर सकती है।
इराक़ के संस्कृति मंत्रालय के पूर्व उपप्रमुख डॉक्टर सैयद जाबिर अलजाबेरी ने ईरान-इराक़ संबंधों में संस्कृति और साहित्य के स्थान की ओर इशारा किया और कहाः शहीद इमाम के वैचारिक फ़्रेमवर्क में दो क़ौमों के बीच संपर्क सिर्फ़ औपचारिक व राजनैतिक संबंध तक सीमित नहीं होते, बल्कि संस्कृति, काव्य, विचार और अहम वैज्ञानिक व साहित्यिक शख़्सियतें इन ऐतिहासिक संबंधों का बड़ा हिस्सा हैं।
उन्होंने अपनी स्पीच के एक भाग में समकालीन अरब इतिहास के बड़े शायर मोहम्मद महदी अलजवाहेरी के साथ अपने ईरान दौरे की याद और इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर से उनकी मुलाक़ात का ज़िक्र किया और इस मुलाक़ात को क़ौमों के बीच संबंधों में संस्कृति और साहित्य की ओर विशेष ध्यान दिए जाने का नमूना बताया।
अलजाबेरी ने इस बात का ज़िक्र करते हुए कि इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर में अरब साहित्य और इस्लामी जगत की सांस्कृतिक हस्तियों की पहचान और उन पर ध्यान, उनकी गहरी सांस्कृतिक नज़र का चिन्ह है। उन्होंने बल दिया कि ईरान-इराक़ संबंधों का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आधार है कि जिस पर सांस्कृतिक और वैज्ञानिक संबंधों को मज़बूत बनाकर पहले से ज़्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए।
इस्लामी इंक़ेलाब प्रकाशन केन्द्र के रिसर्च स्कॉलर सैयद उम्मीद मोअज़्ज़ेनी ने भी इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर के वैचारिक फ़्रेमवर्क में इराक़ के स्थान की ओर इशारा करते हुए कहाः ईरान-इराक़ संबंधों की सिर्फ़ राजनैतिक संबंधों के तहत समीक्षा नहीं हो सकती, बल्कि इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर के नज़रिए की बुनियाद पर, ये संबंध दोनों क़ौमों के इतिहास, संस्कृति, संयुक्त आस्थाओं और सामाजिक मामलों के आधार पर वजूद में आए हैं।
उन्होंने कहाः इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर का मानना था कि इराक़ की सांस्कृतिक क्षमताओं की पहचान और जवान पीढ़ी, शोधकर्ता और वैज्ञानिक केन्द्र के रोल पर विशेष ध्यान, दोनों क़ौमों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मज़बूत बनाने में प्रभावी हो सकता है।
इसालमी इंक़ेलाब के शहीद रहबर ईरान-इराक़ के बीच संबंध को नई इस्लामी सभ्यता के वजूद में आने की दिशा में देखते थे।
आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई इराक़ की धार्मिक व सांस्कृतिक क्षमताओं और हस्तियों की गहरी पहचान रखने की वजह से, इराक़ को नई इस्लामी सभ्यता में दाख़िल होने वाले दरवाज़ों में से एक दरवाज़े के तौर पर देखते हैं।
मोअज़्ज़िनी ने इराक़ की सांस्कृतिक और सामाजिक धाराओं की सटीक पहचान को ज़रूरी बताते हुए बल दियाः दोनों क़ौमों के बीच संबंधों में विस्तार के लिए सतही नज़र से आगे बढ़ते हुए ईरान और इराक़ के बीच संयुक्त सांस्कृतिक क्षमताओं पर ध्यान देना चाहिए।
यूनिवर्सिटी प्रोफ़ेसर व रिसर्च स्कॉलर डॉक्टर माजिद अश्शुवैली ने ईरान और इराक़ के बीच धार्मिक और सांस्कृति समानताओं का ज़िक्र करते हुए कहाः दोनों क़ौमों के सांस्कृतिक संपर्क की जड़ें, ऐतिहासिक लेहाज़ से गहरी हैं और दोनों मुल्कों में ज़ियारतगाहों, वैज्ञानिक केन्द्रों और संयुक्त सांस्कृतिक क्षमताओं ने अवाम के स्तर पर संबंधों में विस्तार का उचित मार्ग समतल कर दिया है।
उन्होंने बल दियाः इमाम शहीद ख़ामेनेई के वैचारिक फ़्रेमवर्क में संस्कृति और सभ्यता के संयुक्त तत्वों पर ध्यान, ईरान और इराक़ की क़ौमों के बीच वैज्ञानिक व सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ाने और पारस्परिक पहचान में मदद कर सकता है।
इस बैठक में ईरान और इराक़ से भाग लेने वालों ने, चर्चित विषयों पर, इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रबहर के वैचारिक फ़्रेमवर्क में ईरान-इराक़ के सांस्कृतिक संबंधों के अनेक आयामों के बारे में अपने विचार और सवाल पेश किए।
04/09/2026

