तेहरान में शहीद इमाम ख़ामेनेई के चेहलुम का आयोजन
हुज्जतुल इस्लाम वलमुस्लेमीन हाज अली अकबरीः ट्रम्प खाना पहुंचाने वाली गाड़ी से इतिहास के कूड़ेदान में चला जाएगा
तेहरान में इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर के चेहलुम की मजलिस आयोजित हुयी जिसमें बड़ी तादाद में अवाम, सरकारी और सैन्य अधिकारियों, तीनों पालिकाओं के प्रमुखों और शहीद इमाम के परिवार के लोगों ने शिरकत की।
18 अगस्त 2026 की शाम को तेहरान के इमाम ख़ुमैनी मुसल्ला में आयोजित मजलिस में, अवाम ने भरपूर तरीक़े से शिरकत कर इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद इमाम को याद किया और उनके रास्ते को जारी रखने पर बल दिया। मजलिस का आग़ाज़ क़ुरआन मजीद की तिलावत से हुआ और उसका सवाब शहीद इमाम सैयद अली ख़ामेनेई की रूह को हदिया किया गया और अहलेबैत के मद्दाहों ने मर्सिया पढ़ा।
मजलिस में "अमरीका मुर्दाबाद" और "इस्राईल मुर्दाबाद" के नारों से हाल गूंज रहा था और अवाम के हाथों में ऐसे प्लेकार्ड्स थे जिन पर शहीद इमाम के क़ातिलों से बदला लिए जाने और उनको दंडित किए जाने के मुतालबे दर्ज थे। इसी तरह "इमाम के साथ हमारा अहद, इंतेक़ाम इंतेक़ाम" और "सैयद मुज्ताब लब्बैक" के नारों से भी हॉल गूंज रहा था।
तेहरान के इमामे जुमा हुज्जतुल इस्लाम वलमुस्लेमीन हाज अली अकबरी ने मजलिस पढ़ी, जिसमें उन्होंने 'इंतेक़ाम' को इस्लामी इंक़ेलाब के सर्वोच्च नेता और मिशन के लिए मबऊस हुए अवाम का कीवर्ड बताया और बल दिया कि ट्रम्प कैटरिंग गाड़ी से कूड़ा ले जाने वाली गाड़ी में और फिर कूड़ा ले जाने वाली गाड़ी से इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दिया जाएगा।
उन्होंने शहीद इमाम की इल्मी, आध्यात्मिक और जेहादी शख़्सियत की ओर इशारा करते हुए कहा कि उनकी फ़क़ीह, ज़ाहिद और मुजाहिद पिता की सरपरस्ती और समझदार, पढ़ी लिखी, नेक और सादात माँ की आग़ोश में परवरिश हुयी और वह इल्म, अध्यात्म और जेहाद के आला दर्जे पर पहुंचे।
हुज्जतुल इस्लाम वलमुस्लेमीन हाज अली अकबरी ने इस बात का ज़िक्र करते हुए कि शहीद इमाम फ़िक़्ह और इज्तेहाद के सबसे ऊंचे दर्जे पर पहुंचे, कहाः आध्यात्म और जेहाद के मार्ग में भी ऊंचे मक़ाम पर पहुंचे और उन्होंने अपनी सलाहियतों को उपयोग करते हुए, अपने वजूद को अध्यात्म और तक़वे के प्रकाश से संवारा और इमाम की राह में चलते हुए, नैतिक ख़ूबियों के सबसे ऊंचे रुतबों को हासिल किया।
तेहरान के जुमे के इमाम ने शहीद इमाम के इमाम ख़ुमैनी से संपर्क की ओर इशारा करते हुए कहाः उन्होंने इमाम रुहुल्लाह की संगत से उनकी पाकीज़ा नफ़्स, मज़बूत इरादे, महानता और जेहाद के चरम पर होने जैसी ख़ूबियों से फ़ायदा उठाया और जवानी के आग़ाज़ से ही स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी की राह पर चलते हुए, जेहाद के मार्ग पर बढ़े।
उन्होंने कहाः शहीद इमाम ने ईमानदार इमाम के बतौर, उम्मत की इमामत की बड़ी ज़िम्मेदारी और इलाही विलायत को संभाला और हिदायत के परचम को फहराया, ऐसा परचम जो रेज़िस्टेंस का केन्द्रीय बिंदु था।
इस मजलिस के ज़ाकिर ने, शहीद इमाम के समाज के मार्गदर्शन में 37 बरसों के योगदान पर बल देते हुए कहाः उन्होंने सभ्यता के जानकार और सभ्यता के निर्माता फ़क़ीह के बतौर मुल्क में महान इमाम ख़ुमैनी के रेज़िस्टेंस के मत को व्यावहारिक बनाया और अपनी दूरदर्शिता व सूझबूझ भरी योजना से ईरानी क़ौम की ज़िंदगी के मुख़्तलिफ़ आयामों को रेज़िस्टेंस के मार्ग पर क़रार दिया।
तेहरान के जुमे के इमाम ने कहाः इस राह में शैक्षणिक रेज़िस्टेंस, शैक्षणिक और प्रशैक्षणिक सिस्टम के लिए, डटने वाले इंसान तैयार करने का रास्ता पेश करना और इसी तरह दुश्मन की सांस्कृतिक यलग़ार के मुक़ाबले में ईरानी क़ौम के ईमानी, धार्मिक और राष्ट्रीय पहचान की मज़बूती के ज़रिए सांस्कृतिक रेज़िस्टेंस भी शामिल था।
उन्होंने बल दिया कि शहीद रहबर ने इल्म और इज्तेहाद, नैतिकता और अध्यात्म, धैर्य और जेहाद के मैदान में ऊंची चोटियों को फ़तह किया और ईरानी क़ौम के सम्मान और तरक़्क़ी की राह की हैसियत से रेज़िस्टेंस के मार्ग को मज़बूत किया।
18/08/2026

