इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर के शहादत स्थल के क़रीब, हर साल की तरह इस साल भी अर्बईन की मजलिस का आयोजन
इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर के शहादत स्थल के क़रीब, हर साल की तरह इस साल भी अर्बईन की मजलिस का आयोजन हुआ, जिसमें स्टूडेंट्स की अंजुमनों ने शिरकत की।
इमाम हुसैन अलैहिस्सलालम के चेहलुम के मौक़े पर मंगलवार 4 अगस्त 2026 को हज़ारों की तादाद में स्टूडेंट्स, स्टूडेंट्स की अंजुमन के रूप में इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर के शहादत स्थल के क़रीब इकट्ठा हुए और आज के दिन की विशेष ज़ियारत "ज़ियारते अर्बईन" पढ़ने के साथ ही आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली हुसैनी ख़ामेनेई को श्रद्धांजलि पेश की।
इस प्रोग्राम में, जो पिछले बरसों में शहीद रहबर की मौजूदगी में इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में आयोजित होता था, हुज्जतुल इस्लाम वलमुस्लेमीन तबातबाई नेजाद ने मजलिस पढ़ी, जिसमें उन्होंने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम से विशेष अर्बईन की ज़ियारत "ज़ियारते अर्बईन" की विषयवस्तुओं की ओर इशारा करते हुए, अल्लाह के वली की संगत के प्रभाव के बारे में चर्चा की। उन्होंने इस संगत के नतीजे बयान करते हुए कहा, "अल्लाह के वली की संगत के असर में पाकीज़गी और अल्लाह के वली से मुशाबहत, मारेफ़त और अंतर्दृष्टि, तैयार दिलों में अल्लाह की मोहब्बत का पैदा होना और लोक-परलोक का कल्याण शामिल है।" उन्होंने आगे कहा कि इस संगत की लाज़मी शर्त अतिवाद से बचना है, इस तरह से कि न अल्लाह के वली से पीछे रहना और न उनसे आगे बढ़ना चाहिए या अतिवाद का शिकार होना चाहिए।
मजलिस में जनाब मीसम मुतीई और महदी रसूली ने हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम, ख़ानदाने इस्मत और उनके वफ़ादार साथियों पर पड़ने वाली मुसीबतों को बयान करते हुए, नौहा और मर्सिया पढ़ा।
04/08/2026

