इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने क़ुम वासियों के ऐतिहासिक आंदोलन की सालगिरह पर क़ुम के अवाम की सभा को विडियो लिंक के ज़रिए संबोधित किया। इस मौक़े पर सुप्रीम लीडर की स्पीच टीवी व रेडियो चैनलों से लाइव टेलीकास्ट हुयी। 19 देय 1356 बराबर 9 जनवरी 1978 क़ुम के अवाम के ऐतिहासिक आंदोलन की आज सालगिरह है।
09/01/2022
क़ुम में 19 दय 1356 हिजरी शमसी बराबर 9 जनवरी 1978 के आंदोलन की बरसी पर सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने हज़रत मासूमा के रौज़े में एकत्रित लोगों को वीडियो लिंक के माध्यम से संबोधित किया।
09/01/2022
हर साल 19 दय 1356 हिजरी शमसी बराबर 9 जनवरी 1978 के आंदोलन की बरसी पर तेहरान में इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में क़ुम के हज़ारों लोग सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई से मुलाक़ात करते थे, जो इस साल कोरोना वायरस की वजह से मेडिकल प्रोटोकॉल के मद्देनज़र वर्चुअल रूप में हो रही है।
09/01/2022
शहीद क़ासिम सुलैमानी की बरसी पर उनके घरवालों और उनकी बरसी के प्रोग्राम करने वाली कमेटी के सदस्यों ने शनिवार को तेहरान में सुप्रीम लीडर से मुलाक़ात की।
01/01/2022
हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा के शुभ जन्म दिन और नर्स डे के अवसर पर नर्सों और कोरोना से संक्रमितों के इलाज के दौरान शहीद हो जाने वाले मेडिकल स्टाफ़ के परिजनों ने सुप्रीम लीडर से मुलाक़ात की। 12 दिसम्बर 2021 को तेहरान की इमाम ख़ुमैनी इमाम बारगाह में होने वाली इस मुलाक़ात में आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनेई ने हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा के व्यक्तित्व के बड़े अहम पहलुओं पर रौशनी डाली। सुप्रीम लीडर ने अपने संबोधन में नर्सों की सेवाओं की सराहना की और उसकी अहमियत और जीवनदायक आयामों को बयान किया।(1) तक़रीर निम्नलिखित हैः
12/12/2021
अगर कोई किसी बीमार के पास पूरी ज़िम्मेदारी के साथ दो घंटे बैठे, तब उसकी समझ में आएगा कि उस नर्स का क्या हाल होता होगा जिसे अलग अलग रोगियों के साथ दिन और रात के कई कई घंटे बिताने होते हैं?
11/12/2021
ईलाम प्रांत के तीन हज़ार शहीदों की याद में सेमीनार की आयोजक कमेटी के सदस्यों से मुलाक़ात में सुप्रीम लीडर की तक़रीर, जो 21 नवम्बर 2021 को हुई थी, गुरुवार 2 दिसम्बर 2021 की सुबह इस सेमिनार के आयोजन स्थल पर जारी की गई। स्पीच का अनुवाद पेश हैः
02/12/2021
ईलाम प्रांत के शहीदों की याद में सेमीनार के आयोजकों से मुलाक़ात में इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर की तक़रीर
02/12/2021
ईरान की स्वयंसेवी फ़ोर्स, जिसे बसीज कहा जाता है, वह फ़ोर्स है जो देश की रक्षा से लेकर वैज्ञानिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और अवाम की ख़िदमत तक हर मैदान में सक्रिय है। आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई 27 नवम्बर 2019 की अपनी एक तक़रीर में कहते हैं कि ‘बसीज’ के दो पहलू हैं। एक फ़ौजी मैदान में संघर्ष का पहलू है। दूसरा साफ़्ट वार के मैदान में जिद्दोजेहद का पहलू है। यह फ़ोर्स हर जगह मौजूद है और और इससे वह हस्तियां जुड़ी हैं जो नौजवानों के लिए आइडियल हैं।
02/12/2021
प्यारे नौजवानो! ग़ैर मामूली दिमाग़ अल्लाह की नेमत है। अल्लाह की नेमत का शुक्र अदा करना चाहिए। सूरए नह्ल में है कि अल्लाह की नेमत का शुक्र अदा करो अगर तुम उसी की इबादत करते हो। आयतुल्लाह ख़ामेनेई 17 नवम्बर 2021
26/11/2021
इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर ने स्वयं सेवी फ़ोर्स (बसीज) सप्ताह के उपलक्ष्य में एक संदेश में कहा है कि देश की सभी समस्याओं का हल, ऊंचे हौसले, अक़्लमंदी, सही सोच और अल्लाह पर भरोसे से मुमकिन है।
24/11/2021
जवान साइन्टिस्ट व प्रतिभाशाली लोगों के (एलिट) ग्रुप ने 17 नवंबर 2021 को सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई से तेहरान में इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में मुलाक़ात की।
17/11/2021