15/08/2022
शीया समुदाय के पैकर में आशूर की तपिश नुमायां है। हम देख रहे हैं कि हर जगह शीयों में नज़र आने वाली यह गर्मी उन शोलों से निकली है जिनकी लपटें उस मुक़द्दस रूह और मूल्यवान मिट्टी से उठ रही हैं। यह लोगों की रूहों में समा जाती हैं और इंसानों को दहकती गोलियों में तब्दील करके उनसे दुश्मन के दिल को निशाना बनाती हैं। इमाम ख़ामेनेई 17 मार्च 1974
11/08/2022
इमाम हुसैन को हमेशा हक़ और सत्य के परचम के तौर पर बाक़ी रहना चाहिए। सच्चाई का परचम कभी बातिल की सफ़ में शामिल नहीं हो सकता और बातिल का रंग क़ुबूल नहीं कर सकता। यही वजह थी कि इमाम हुसैन ने फ़रमाया थाः ‘मोहाल है कि हम ज़िल्लत बर्दाश्त कर लें।’ गर्व उस इंसान, मिल्लत और समूह का हक़ है जो अपनी बात पर क़ायम रहे और जिस परचम को बुलंद किया है उसे तूफ़ानों में मिटने और गिरने न दे। इमाम हुसैन ने इस परचम को मज़बूती से थामे रखा और अपने अज़ीज़ों की शहादत और अहले हरम का क़ैदी बनना भी गवारा किया। इमाम ख़ामेनेई 29 मार्च 2002
09/08/2022
इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में शामे ग़रीबां की मजलिस हुई जियमें इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने शिरकत की।
08/08/2022
ज़ालिम, ज़ुल्म सहने वाला और ख़ामोश तमाशाई तीनों अल्लाह की नज़र में गुनाह में शामिल हैं।
08/08/2022
शबे तासूआ (नवीं मुहर्रम की रात) इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की मजलिसे अज़ा इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में आयोजित हुई जिसमें इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने शिरकत की।
07/08/2022
इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने आंदोलन इसलिए किया कि अपने फ़रीज़े पर अमल करें।
06/08/2022
अगर वे 72 लोग भी इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के साथ न होते तब भी इमाम हुसैन की तहरीक रुकने वाली नहीं थी। यह एक सबक़ है। इमाम हुसैन से हमें यह सबक़ लेना चाहिए कि अल्लाह की राह में जेहाद को सख़्तियों और तनहाई के सबब छोड़ना नहीं चाहिए। इस फ़रीज़े और वाजिब को तनहा पड़ जाने, तादाद कम होने और वतन से दूर होने, साथियों के न होने और दुश्मन सामने मौजूद होने के सबब छोड़ना नहीं चाहिए। इमाम ख़ामेनेई 13 अगस्त 1988
06/08/2022