कभी कभी मर्द अपनी ज़िन्दगी के कामों में ऐसे दोराहे पर पहुंच जाता है कि या तो दुनिया को चुने या ईमानदारी और सच्चाई के रास्ते को। इन दो में से एक को चयन करना है। यही वह जगह है जहाँ बीवी, मियां को पहली राह या दूसरी राह की ओर खींच सकती है। बिलकुल ऐसी ही दूसरी तरफ़ भी है। मियां भी बीवियों की ज़िन्दगी में इस तरह का असर डाल सकते हैं। आपस में इसी तौर पर रहने की कोशिश कीजिए। दोनों कोशिश करें अल्लाह की राह में, इस्लाम की राह में, सत्य की राह में, ईमानदारी और सच्चाई की राह में, धर्म का पालन करें और गुमराही या ग़लत राह की स्थिति में एक दूसरे को रोकें। इमाम ख़ामेनेई 11/03/2001
09/11/2025
औरत के फ़रीज़े का केन्द्र बिन्दु उसकी फ़ैमिली है और हक़ीक़त भी यही है। घर का वजूद बीवी की मौजूदगी के बिना, बीवी के सहयोग के बिना और बीवी में फ़रीज़े के एहसास के बिना मुमकिन नहीं है चल सके। इमाम ख़ामेनेई 4/01/2023
01/10/2025