हम शुरू नहीं करेंगे। हम किसी पर ज़ुल्म नहीं करना चाहते। किसी मुल्क पर हमला नहीं करना चाहते। लेकिन उस शख़्स के मुक़ाबले में जो ललचायी नज़र रखता है, हमला करना चाहता है, तकलीफ़ देना चाहता है, ईरानी क़ौम उसे भरपूर तमाचा मारेगी।
02/02/2026
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता, जंग के मोर्चे का पल पल नेतृत्व कर रहे थे और ज़रूरी आदेश जारी कर रहे थे, यहाँ तक कि क़रीब क़रीब पूरे वक़्त वे जंग और अवाम की ज़रूरतों को पूरा करने में लगे रहे।
15/11/2025
एक नौजवान का पढ़ना लिखना, इबादत करना, अच्छा अख़लाक़, समाज सेवा, सही और उचित खेल कूद और ज़िन्दगी में अच्छी आदतें और तौर तरीक़े अपनाना, ये सब अच्छे काम हैं। कुछ घरानों में नौजवानों के अधिकारों का ख़याल नहीं रखा जाता और कुछ परिवारों में ख़ास तौर पर बच्चों के अधिकारों का ख़याल नहीं रखा जाता, इन सब बातों की ओर उनका ध्यान ले जाना चाहिए और उन्हें बताना चाहिए कि बच्चों के अधिकारों का हनन सिर्फ़ यह नहीं है कि उनके साथ मोहब्बत न करे, जी नहीं! ग़लत तरबियत, उनके प्रति लगाव न होना, उनकी ज़रूरतों का ख़याल न रखना, मोहब्बत में कमी और इसी तरह की दूसरी बातें भी उन पर ज़ुल्म के दायरे में आती हैं। इमाम ख़ामेनेई 15/12/2000
01/11/2025
पहला व्यवहारिक सबक़ यह है कि विश्व स्तर पर ज़ुल्म का अंत न सिर्फ़ यह कि मुमकिन है बल्कि निश्चित है। यह बहुत अहम बात है कि इंसानी नस्लें आज ऐसा न सोचने लगें कि विश्व स्तर पर फैले ज़ुल्म के मुक़ाबले में कोई काम नहीं किया जा सकता, वह चीज़ जो इंसानों को व्यवहार और अमल के लिए प्रेरित करती और आगे बढ़ाती है वह उम्मीद की ताक़त है। इमाम महदी के ज़ाहिर होने का अक़ीदा दिलों में उम्मीद की किरण भर देता है। इमाम ख़ामेनेई 22/10/2002
30/05/2025
जो हुकूमत इस्लाम की बुनियाद पर क़ायम होती है उसकी कार्यशैली की बुनियाद हैः"न तुम ज़ुल्म करोगे और न तुम पर ज़ुल्म किया जाएगा।" (सूरए बक़रह आयत 279) इमाम ख़ामेनेई 7 मार्च 2024
08/03/2024
इस्लामी जुम्हूरिया का उदय एक ज़लज़ला था जिसने दो मोर्चों की स्थिति पैदा की। एक लिबरल डेमोक्रेसी का मोर्चा और दूसरा इस्लाम पर आधारित जुम्हूरी मोर्चा। लिबरल डेमोक्रेटिक सिस्टम के नेचर में हमला और अतिक्रमण शामिल है जबकि दीनी लोकतंत्र का सबसे अहम मिशन ज़ुल्म का मुक़ाबला है। इमाम ख़ामेनेई 7 मार्च 2024
08/03/2024
एक क़ौम अपनी सरज़मीन में अत्याचारों का निशाना बनती है, उनकी औरतें, उनके बच्चे, उनके मकानात बेरहमी से मिटाए जाते हैं और कुछ देश रोकना तो दरकिनार इसमें सहयोग करते हैं। अमरीका, ब्रिटेन और कुछ यूरोपीय देश। हम इसके विरोधी हैं। इमाम ख़ामेनेई 7 मार्च 2024
07/03/2024
डॉक्टर अब्बास मूसवी, पाकिस्तान इतिहास गवाह है कि ज़ालिम ने हमेशा तरह तरह के ज़ुल्म के ज़रिए पीड़ित इंसानों पर क़ाबू पाने की कोशिश की ताकि हमेशा के लिए अपना वर्चस्व क़ायम रख सके। लेकिन नतीजा इसके बरख़िलाफ़ ज़ाहिर हुआ। फ़िरऔनों से लेकर यज़ीदों तक सब के सब मूसा और हुसैन जैसों के सामने मिट गए और मज़लूमों ने अस्थायी कठिनाइयों के मुक़ाबले में दृढ़ता दिखाकर साम्राज्यवादियों पर फ़तह हासिल की।
31/10/2023