हज़रत फ़ातेमा ज़हरा की ज़िंदगी के संबंध में सटीक पहचान होनी चाहिए, उनकी ज़िंदगी को नई नज़र से देखना चाहिए, पहचानना चाहिए और सही मानी में आदर्श क़रार देना चाहिए। 19 अप्रैल 2014, उनकी शख़्सियत ठीक जवानी में सभी ग़ैरतमंद, मोमिन और मुसलमान मर्दों और औरतों यहाँ तक कि ग़ैर मुसलमानों के लिए भी जो उनके दर्जे को पहचानते हैं, आदर्श है; हमें इस महान हस्ती की ज़िंदगी से सीखना चाहिए।(13 दिसम्बर 1989)
25/11/2025
महान हस्ती अल्लामा मीर्ज़ा नाईनी के बारे में अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ़्रेंस के प्रबंधकों से इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने मुलाक़ात की।
23/10/2025
गदीर का मसला अपनी आला विषयवस्तु के साथ सभी मुसलमानों से संबंधित है क्योंकि यह न्याय की हुक्मरानी, महानता की हुक्मरानी और अल्लाह की विलायत की हुक्मरानी के मानी में है। अगर हम भी सही मानी में अमीरुल मोमेनीन की विलायत से नाता जोड़ने वालों में शामिल होना चाहते हैं तो हमें अपने आपको, अपनी ज़िंदगी के माहौल को न्याय व इंसाफ़ के क़रीब करना होगा। सबसे बड़ा नमूना यह है कि हमसे जितना भी हो सके न्याय क़ायम करें क्योंकि न्याय का दायरा असीम है। इमाम ख़ामेनेई 20/02/2003
24/06/2024
कुछ लोग यह ख़याल करते हैं कि इमामों की विलायत रखने का बस यह मतलब है कि हम इमामों से मुहब्बत करें। वो कितनी ग़लत फ़हमी में हैं, कैसी ग़लत फ़हमी का शिकार हैं?! सिर्फ़ मुहब्बत मुराद नहीं है। वरना इस्लामी दुनिया में कोई भी न होगा जो ख़ानदाने पैग़म्बर से तअल्लुक़ रखने वाले मासूम इमामों से मुहब्बत न करे।
04/07/2023