क़ुरआन मजीद, इंसान के दुखों के इलाज की किताब है, चाहे वो आत्मिक, मनोवैज्ञानिक और वैचारिक हों और चाहे मानव समाज की पीड़ाएं हों जैसे जंग, ज़ुल्म और नाइंसाफ़ी। शहीद इमाम ख़ामेनेई 22 फ़रवरी 2024
03/07/2026
यह कि राष्ट्रपति शहीद रईसी संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में क़ुरआन हाथ में उठाएं या शहीद सुलैमानी की तस्वीर अपने हाथ में लें, यह राष्ट्र के लिए गौरव है। इमाम ख़ामेनेई 20 मई 2025
21/05/2025
अगर क़ुरआन की सही तरीक़े से तिलावत हो और ध्यान से सुना जाए तो हर बीमारी दूर हो जाती है। क़ुरआन की अच्छे तरीक़े से तिलावत हो और हम उसे सुनें और उस पर अच्छी तरह ध्यान दें तो हमें बहुत बड़े नतीजे हासिल होंगे।
02/03/2025
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने पहली रमज़ानुल मुबारक सन 1446 हिजरी क़मरी (मुताबिक़ 2 मार्च 2025) को "क़ुरआन से उंस" महफ़िल से ख़ेताब करते हुए तिलावत की अहमियत पर रौशनी डाली और इसे पैग़म्बरों का अमल बताया।(1)
02/03/2025
ईरानी क़ौम ने अल्लाह के क़ानून पर अमल किया यानी हक़ के परचम को उठाया, हक़ को लागू करने की ज़िम्मेदारी अपने कांधों पर उठाई और मैदान में आ गयी। अल्लाह ने भी अपनी मदद को, जैसा कि उसने क़ुरआन मजीद में बार बार वादा किया है, उसे पहुंचाया। इमाम ख़ामेनेई 8 जनवरी 2005
01/10/2024
हिदायत, मार्गदर्शन और अल्लाह से दूरी की ज़्यादातर वजह तक़वा (अल्लाह का ख़ौफ़) न होना है। जो शख़्स तक़वे की फ़िक्र में रहे, अल्लाह भी उसकी रहनुमाई करता है। "और जो लोग हमारी ख़ातिर जद्दोजेहद करते हैं, हम उनको ज़रूर अपने रास्ते दिखा देते हैं और बेशक अल्लाह मोहसेनीन के साथ है।" (सूरए अन्कबूत, आयत-69) इमाम ख़ामेनेई 08/12/2018
22/07/2024
ग़ज़ा में दृढ़ प्रतिरोध का चरम बिंदु जिस चीज़ ने दुनिया को दिखाया वह वहां के निवासियों का क़ुरआन से गहरा लगाव है। इमाम ख़ामेनेई 12 मार्च 2024
13/03/2024
क़ुरआन इंसान के दर्द और पीड़ा का इलाज है। चाहे रूहानी, मनोवैज्ञानिक और वैचारिक पीड़ाएं हों या इंसानी समाजों के दर्द, जंगें, ज़ुल्म, बेइंसाफ़ियां। क़ुरआन इन सब का इलाज है। इमाम ख़ामेनेई 22 फ़रवरी 2024
23/02/2024
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने 22 फ़रवरी 2024 को ईरान में चालीसवें अंतर्राष्ट्रीय क़ुरआन मुक़ाबले के प्रतिभागियों से ख़ेताब में क़ुरआन को मार्गदर्शन और चेतावनी देने वाली किताब क़रार दिया। आपने क़ुरआनी शिक्षाओं के विषय पर बात करते हुए ग़ज़ा और फ़िलिस्तीन के सिलसिले में इन शिक्षाओं पर अमल की मौजूदा स्थिति के बारे में कुछ अहम सवाल किए। (1)
23/02/2024
इस्लामी दुनिया में बहुतों को क़ुरआन से लगाव नहीं है। एक कड़वी सच्चाई है। क्या इस्लामी देशों के नेता ग़ज़ा के बारे में क़ुरआनी हिदायत पर अमल कर रहे हैं? क़ुरआन हमसे कहता है किः "मोमेनीन मोमिनों को छोड़ कर काफ़िरों को दोस्त न बनाएं।" क्या इस आयत पर अमल हो रहा है? इमाम ख़ामेनेई 22 फ़रवरी 2024
23/02/2024
क़ुरआन मार्गदर्शन की किताब है। मार्गदर्शन की सबको ज़रूरत है। क़ुरआन चेतावनी देने वाली किताब है। उन ख़तरों के बारे में चेतावनी जो इंसानों के लिए पेश आने वाले हैं। चाहे इस दुनिया में या बाद की दुनिया में जहां अस्ली ज़िंदगी है। इमाम ख़ामेनेई 22 फ़रवरी 2024
22/02/2024