दरस-ए-अख़लाक़: फूट, कमज़ोरी और इज़्ज़त गंवाने का सबब है

इस्लामी जगत की पीड़ा के बहुत से कारण हैं। जब हम फूट का शिकार हों, जब एक दूसरे के हमदर्द न हों जब यहाँ तक कि एक दूसरे का बुरा चाहने वाले बन गए हों तो इसका नतीजा यही है। क़ुरआन फ़रमाता हैः "और अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करो और आपस में झगड़ा न करो वरना कमज़ोर पड़ जाओगे और तुम्हारी हवा उखड़ जाएगी।" (सूरए अनफ़ाल, आयत-46) जब तुम आपस में झगड़ा करोगे तो कमज़ोरी पैदा हो जाएगी। 'फ़शल' यानी कमज़ोरी "तज़हबा रीहोकुम" का मतलब "तज़हबा इज़्ज़तोकुम" यानी इज़्ज़त गंवा दोगे। फूट का शिकार हुए तो स्वाभाविक तौर पर मिट्टी में मिल जाओगे, ज़लील हो जाओगे, अपने ऊपर ग़ैरों के वर्चस्व की राह समतल कर दोगे। फूट का नतीजा यही है। अमीरुल मोमेनीन ने क़ासेआ नामी ख़ुतबे में अपने सुनने वालों को इतिहास के अध्ययन की दावत दी है। इस ख़ुतबे में आप फ़रमाते हैं: "पिछले लोगों को देखो, जब वे एकजुट थे तो उनको क्या सम्मान हासिल हुआ, कैसी शान हासिल की! लेकिन जब उनके बीच आपस में जुदाई, फूट और दुश्मनी फैल गयी तो अल्लाह ने इज़्ज़त व सम्मान का लेबास उनके तन से उतार लिया। वो इज़्ज़त व मक़ाम उन्हें हासिल था, वो सम्मान जिससे उनकी शोभा बढ़ी हुयी थी और वो नेमतें जो अल्लाह ने उनको दे रखी थीं, फूट की वजह से उनसे छीन ली गयीं।" इमाम ख़ामेनेई 14/10/2022

इस्लामी जगत की पीड़ा के बहुत से कारण हैं। जब हम फूट का शिकार हों, जब एक दूसरे के हमदर्द न हों जब यहाँ तक कि एक दूसरे का बुरा चाहने वाले बन गए हों तो इसका नतीजा यही है। क़ुरआन फ़रमाता हैः "और अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करो और आपस में झगड़ा न करो वरना कमज़ोर पड़ जाओगे और तुम्हारी हवा उखड़ जाएगी।" (सूरए अनफ़ालआयत-46) जब तुम आपस में झगड़ा करोगे तो कमज़ोरी पैदा हो जाएगी। 'फ़शलयानी कमज़ोरी "तज़हबा रीहोकुम" का मतलब "तज़हबा इज़्ज़तोकुम" यानी इज़्ज़त गंवा दोगे। फूट का शिकार हुए तो स्वाभाविक तौर पर मिट्टी में मिल जाओगेज़लील हो जाओगेअपने ऊपर ग़ैरों के वर्चस्व की राह समतल कर दोगे। फूट का नतीजा यही है। अमीरुल मोमेनीन ने क़ासेआ नामी ख़ुतबे में अपने सुनने वालों को इतिहास के अध्ययन की दावत दी है। इस ख़ुतबे में आप फ़रमाते हैं: "पिछले लोगों को देखोजब वे एकजुट थे तो उनको क्या सम्मान हासिल हुआकैसी शान हासिल की! लेकिन जब उनके बीच आपस में जुदाईफूट और दुश्मनी फैल गयी तो अल्लाह ने इज़्ज़त व सम्मान का लेबास उनके तन से उतार लिया। वो इज़्ज़त व मक़ाम उन्हें हासिल थावो सम्मान जिससे उनकी शोभा बढ़ी हुयी थी और वो नेमतें जो अल्लाह ने उनको दे रखी थींफूट की वजह से उनसे छीन ली गयीं।"

इमाम ख़ामेनेई

14/10/2022

05/02/2026

दरस-ए-अख़लाक़: फूट, कमज़ोरी और इज़्ज़त गंवाने का सबब है