टार्गेटः घर वाले, बच्चे और औरतें

उनका रेज़िस्टेंस और प्रतिरोध के मोर्चे के जवानों पर बस नहीं चलता तो परिवार वालों पर टूट पड़ते हैं, बच्चों, मज़लूमों और बूढ़े लोगों की जान ले लेते हैं। मानवाधिकार के लिए शोर मचाकर दुनिया के कान के पर्दे फाड़ने वाले कहां हैं? क्या ये इंसान नहीं हैं? क्या इनके अधिकार नहीं हैं?

इमाम ख़ामेनेई

10 अप्रैल 2024

2180 परिवारः

जिनके सभी सदस्य शहीद हो गए हैं, कोई भी ज़िंदा नहीं बचा।

 

20000+ बच्चेः

ज़ायोनी शासन के हाथों क़त्ल हुए हैं।

 

5070 परिवारः

ऐसे हैं जिनमें सिर्फ़ एक ही सदस्य ज़िंदा बचा है।

 

12400+ औरतें:

ज़ायोनी शासन के हाथों क़त्ल हुयी हैं।

02/05/2025

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