बोस्निया के बारे में इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर की पोज़ीशन की दोबारा घोषणा
बोस्निया में किताब "सारायेवो की सड़कों पर चलहक़दमी" रिलीज़
शनिवार 24 अक्तूबर 2026 को सारायेवो में, तस्वीरी किताब "सारायेवो की सड़कों पर चलहक़दमी; बोस्निया हर्ज़ेगोविना शहीद आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई की नज़र में" रिलीज़ हुयी जिसमें बोस्निया, तुर्किये और ब्रिटेन की हस्तियां मौजूद थीं।
बोस्निया हर्ज़ेगोविना के मामलों में शहीद रहबर के प्रतिनिधि और संविधान की निरीक्षक परिषद के सचिव आयतुल्लाह अहमद जन्नती ने किताब "सारायेवो की सड़कों पर चलहक़दमी" के रिलीज़ होने के मौक़े पर अपने संदेश में बल दिया कि शहीद रहबर दुनिया के मुसलमानों और मज़लूमों के भविष्य की ओर से हमेशा ज़िम्मेदारी का एहसास करते और बोस्निया के अवाम के प्रति सपोर्ट को, इस्लामी जगत का कर्तव्य समझते थे।
आयतुल्लाह अहमद जन्नती ने इसी प्रकार अपने संदेश में ख़तरों और हमलों के मुक़ाबले में मुसलमानों के बीच एकता पर बल देते हुए कहा, "न सिर्फ़ सभी मुसलमान बल्कि दुनिया के सभी आज़ाद लोग एकता के ज़रिए इन सभी अपराधों का विगत की तुलना में ज़्यादा ठोस जवाब दें।"
किताब की रिलीज़ के प्रोग्राम को ख़िताब करने वाले वक्ताओं ने बोस्निया जंग की यादों का ज़िक्र करते हुए, इस मुल्क के मुसलमानों के सपोर्ट में आयतुल्लाह ख़ामेनेई के रोल और ईरान-बोस्निया संबंधों की ऐतिहासिक स्मृतियों की रक्षा पर बल दिया और बोस्निया के मुसलमानों को पब्लिक और अंतर्राष्ट्रीय सपोर्ट के संबंध में अपनी यादों और अनुभवों का ज़िक्र किया।
तुर्किए के क़ुदस टीवी चैनल के निदेशक नूरुद्दीन शीरीन ने सन 1986 और 1992 में आयतुल्लाह ख़ामेनेई से अपनी मुलाक़ातों का ज़िक्र करते हुए कहा, सन 1992 के ईरान के सफ़र के दौरान कि उस वक़्त बोस्निया की जंग जारी थी, आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने दुनिया के मुसलमानों का आह्वान किया था कि अपने सभी राजनैतिक, आर्थिक, सैन्य और सामाजिक संसाधनों के साथ बोस्निया के मुसलमानों की तुरंत मदद के लिए निकलिए।
उन्होंने कहा कि इस आह्वान के बाद तुर्किए से स्वयंसेवियों का एक गिरोह बोस्निया के मुसलमानों की रक्षा के लिए इस मुल्क की ओर रवाना हुआ कि उनमें से कुछ जंग के दौरान शहीद या घायल हुए।
ब्रिटेन में रहने वाली लेखक व पत्रकार आरज़ू मराली ने भी, किताब "सारायेवो की सड़कों पर चलहक़दमी" की रिलीज़ के प्रोग्राम को संबोधित करते हुए कहा, "बोस्निया की जंग के वाक़यों का ब्रिटेन में बहुत से जवान मुसलमानों की ज़िंदगी और सोचने की शैली पर बहुत गहरा और बाक़ी रहने वाला असर पड़ा।"
उन्होंने आयतुल्लाह ख़ामेनेई के विचारों और भाषणों के अपने अध्ययन की ओर इशारा करते हुए कहा कि बोस्निया के बारे में उनके स्टैंड की समीक्षा से पता चलता है कि इस मुल्क के अवाम को सपोर्ट उनकी शख़्सियत की दो अहम ख़ुसूसियतों की वजह से था, एक क़ौमों की संस्कृति और सभ्यता पर गहरी नज़र और दूसरे मज़लूम अवाम के संबंध में ज़िम्मेदारी का एहसास।
आरज़ू मराली ने विक्टर ह्यूगो और टोल्सटॉय सहित दुनिया के अहम लेखकों की रचनाओँ और फ़ारसी साहित्य से आयतुल्लाह ख़ामेनेई के गहरे परिचय की ओर इशारा करते हुए कहा, उनकी नज़र में मुख़्तलिफ़ संस्कृतियों के बीच आपस में संयुक्त मानवीय रिश्ता है और मज़लूमों को सपोर्ट राष्ट्रीय और धार्मिक सीमाओं में सीमित नहीं होना चाहिए।
इस लेखक और पत्रकार ने बल दिया कि आयतुल्लाह ख़ामेनेई का बोस्निया के अवाम को सपोर्ट सिर्फ़ राजनैतिक स्टैंड या भाषणों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने उनकी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए व्यावहारिक क़दम उठाया। उन्होंने इसी तरह बोस्निया की जंग को ऐसी प्रक्रिया के वजूद में आने की पृष्ठिभूमि बताया जो बाद में "ऐक्सिस ऑफ़ रेज़िस्टेंस" के नाम से पहचानी गयी।
लंदन में इस्लामी मानवाधिकार आयोग के प्रमुख मसऊद शजरेह ने बोस्निया की जंग के दौरान ब्रिटेन में मुसलमानों की सरगर्मियों की ओर इशारा करते हुए कहा, "बोस्निया के अवाम के सपोर्ट में आयतुल्लाह ख़ामेनेई का आह्वान बहुत अहम तत्व था जिसने इस मुल्क के अवाम की मदद के लिए मुख़्तलिफ़ मुल्कों में मुसलमानों को संगठित किया और वो स्वयंसेवी के रूप में मदद के लिए सामने आए।"
उन्होंने उस समय ब्रिटेन की संसद में अपनी सदस्यता का ज़िक्र करते हुए कहा कि ऐसे समय में जब अंतर्राष्ट्रीय संगठन बोस्निया में नरसंहार को रोकने के लिए प्रभावी क़दम नही उठा रहे थे, ब्रिटेन के मुसलमानों का एक समूह, बोस्निया के लिए मदद इकट्ठा करता और इस मुल्क को ज़रूरी सामान पहुंचाने में सरगर्म था।
लंदन में इस्लामी मानवाधिकार आयोग के प्रमुख ने फ़िलिस्तीन सहित क्षेत्र के मौजूदा हालात का बोस्निया की जंग से तुलना करते हुए, मज़लूम अवाम के सपोर्ट में एकता और व्यावहारिक क़दम उठाने पर बल दिया और कहा, "बोस्निया के तजुर्बे ने दिखा दिया कि ज़ुल्म से निपटने के लिए ज़िम्मेदारी की भावना, एकता और बलिदान के लिए तैयार रहना ज़रूरी है।"
बोस्निया के राजनैतिक व सामाजिक कार्यकर्ता दमीन महमूद चहाईच ने भी किताब "सारायेवो की सड़कों पर चलहक़दमी" के रिलीज़ के प्रोग्राम को संबोधित किया और इस किताब के छपने की अहमियत की ओर इशारा करते हुए कहाः यह किताब सिर्फ़ ईरानियों के लिए अहम नहीं है, बल्कि सबसे ज़्यादा बोस्निया हर्ज़ेगोविना के अवाम के लिए अहम है ताकि वे जानें कि आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने उनके और उनके संघर्ष के बारे में क्या कहा है।
उन्होंने बोस्निया जंग की अपनी यादों का ज़िक्र करते हुए कहा, "अगर ईरान न होता तो आज हम न होते। "महमूद चहाईच ने इस बात का ज़िक्र करते हुए कि ईरान के सपोर्ट के कुछ तज़करों को बोस्निया का समाज भूल गया है, कहाः इसका एक कारण यह है कि बोस्निया के अवाम को इस्लामी गणराज्य ईरान की मदद बिना शर्त और निःस्वार्थ भाव से थी।
उन्होंने कहा कि आयतुल्लाह ख़ामेनेई बोस्निया के अवाम के प्रति सपोर्ट को स्वेच्छा से की जाने वाली मदद नहीं बल्कि धार्मिक व मानवीय कर्तव्य समझते थे और इसी वजह से इस मुल्क के अवाम की मदद को इस्लामी गणराज्य ईरान भी एक ज़िम्मेदारी मानता था।
इस्लामी इंक़ेलाब सांस्कृतिक व रिसर्च फ़ाउंडेशन के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के निदेशक डॉक्टर मोहम्मद अख़गरी ने भी इस प्रोग्राम के नाम लाइव वीडियो संदेश में, किताब "सारायेवो की सड़कों पर चलहक़दमी" को कला, मानव चेतना और इस्लामी ज़िम्मेदारी के संगम का वर्णन बताया और कहा कि यह किताब आयतुल्लाह शहीद सैयद अली ख़ामेनेई के भाषणों, बोस्निया की जंग की सच्चाइयों के एक भाग और इस मुल्क के अवाम को ईरानी क़ौम के सपोर्ट की दोबारा याद दिलाती है।
उन्होंने बोस्निया की जंग के दौरान आयतुल्लाह ख़ामेनेई के स्टैंड की ओर इशारा करते हुए बल दिया कि इस मदद की बुनियाद इस्लामी ज़िम्मेदारी की भावना थी, ऐसी मदद जिसने उनके मुताबिक़, "तेहरान की सड़कों को, सारायेवो की सड़कों से जोड़ दिया था।"
डॉक्टर मोहम्मद अख़गरी ने इसी तरह इस किताब को, बोस्निया के मुसलमानों के नस्ली सफ़ाए पर मानवाधिकार की रक्षा का दम भरने वाले संगठनों और अंतर्राष्ट्रीय हल्क़ों की ख़ामोशी का एक सुबूत बताया और इस प्रोग्राम के आयोजकों और इस किताब के छपने में सहयोग देने वालों की सराहना की।
किताब "सारायेवो की सड़कों पर चलहक़दमी; बोस्निया हर्ज़ेगोविना शहीद आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई की नज़र में "बोस्निया हर्ज़ेगोविना, इस मुल्क की जंग और इसके अवाम के प्रति सपोर्ट के बारे में उनके भाषणों और बयानों पर आधारित है और यह, इन स्टैंड्स का दोबारा ज़िक्र करने और नई नस्लों में पहुंचाने के लिए छपी है। यह किताब जिसमें जंग के दौरान बोस्निया हर्ज़ेगोविना को इस्लामी गणराज्य ईरान की मदद की तस्वीरें शामिल हैं, अल्गोरिथ्म प्रकाशन ने बोस्नियाई ज़बान में छपवाया है।
किताब "सारायेवो की सड़कों पर चलहक़दमी" की प्रस्तावना में आया है, "भविष्य के लिए ज़रूरी है कि अतीत को न भूलें, इस किताब में बोस्निया हर्ज़ेगोविना में हमारे पाठ, रहनुमाई और अनुशंसाएं सुरक्षित हैं। इस किताब को पढ़ना चाहिए, अध्ययन करना चाहिए और सुनना चाहिए।"
इस किताब के मुख्य खंडों की सुर्ख़ियां इस प्रकार हैं: "बोस्निया में इस्लामी निशानियां, यादगारें और भावनाएं", "प्रजातंत्र की नक़ाब में पश्चिम की सलीबी भावनाएं", "मुसलमान होना, बोस्निया के अवाम का जुर्म", "बोस्निया हर्ज़ेगोविना की मुसलमान क़ौम का उज्जवल भविष्य" और "यूरोप में इस्लामी पहचान को बचाने की कोशिश"
25/10/2026

