पाकिस्तानी समुदाय की तरफ़ से इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर को श्रद्धांजलि

पाकिस्तानी समुदाय की तरफ़ से इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर को श्रद्धांजलि

इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहरबर आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई को श्रद्धांजलि पेश करने का सिलसिला जारी है।

इसी क्रम में ईरान में रह रहे पाकिस्तानी समुदाय ने तेहरान में रहबर के शहादत स्थल के कुछ मीटर के फ़ासले पर किश्वरदूस्त स्ट्रीट पर विशेष किए गए स्थान पर पहुंच कर "आग़ा और पाकिस्तान" शीर्षक के तहत एक प्रोग्राम रखा।

प्रोग्राम के आग़ाज़ में बच्चों के क्वाएर ग्रुप ने इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर की शान मेंसम्मोहित करने वाली आवाज़ में एक तराना पढ़ा जिस के शेर तीन ज़बानों उर्दूफ़ारसी और अरबी में थे। 

तराने के बादमर्सिया भारत-पाकिस्तान में प्रचलित अंदाज़ में पढ़ा गया। 

मर्सिये के बाद पाकिस्तीनी शायर ने इस्लामी इंक़ेलाब की शहीद रहबर की शान में शेर पढ़े और कुछ शेर ग़ालिब की ग़ज़ल के इस मिसरे "ऐसा कहाँ से लाऊं कि तुझसा कहें जिसे" पर तज़मीन पर आधारित थे। 

उस के बाद मौलाना सैयद कुमैल महदी शीराज़ी ने सभा को पारंपरिक मजलिस के अंदाज़ में संबोधित करते हुए सूरए कहफ़ की आयत नंबर 9 को अपनी स्पीच का शीर्षक क़रार दिया जिस में अल्लाह फ़रमाता है कि क्या आप ख़याल करते हैं कि कहफ़ और रक़ीम (ग़ार और कतबे) वालेहमारी निशानियों में से कोई अजीब निशानी थे।

मौलाना ने अपनी स्पीच में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के उस मशहूर जुमले को कोट किया जिस में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने यज़ीद की बैअत को यह कहते हुए "मुझ जैसा यज़ीद जैसे की बैअत नहीं कर सकता" ठुकरा दिया था।

याद रहे कि इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर आयतुल्लाहिल उज़्मा इमाम ख़ामेनेई ने 17 फ़रवरी 2026 को एक जनसभा को संबोधित करते हुए इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के इस कथन को कोट किया था। 

उस के बाद मौलाना ने इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के हवाले से उस रवायत को पेश किया जिस में एक शख़्स ने इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम से सवाल किया कि मौला क़ुरआन में असहाबे कहफ़ को जवान कहा गया है जबकि ऐतिहासिक पृष्ठिभूमि से पता चलता है कि वे अधेड़ उम्र के थे। इस सवाल के जवाब में इमाम ने कहा कि उन्हें जवानउन के ईमान की वजह से कहा गया है। जिसके पास ईमान होता है वह जवान होता है। 

मौलाना ने अपनी स्पीच में कर्बला में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के भाई और उन के लश्कर के कमांडर हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम के मसाएब पढ़े कि किस तरह उन्हें उस वक़्त शहीद किया गया जब वे ख़ैमों में प्यासे बच्चों के लिए पानी लेने नहरे अलक़मा पर गए और दुश्मन के सिपाहियों ने बड़ी कायरता से उन्हें शहीद कर दिया।

मजलिस के बादहज़रत अब्बास की शान में नौहा पढ़ा गया। 

नौहे के बादप्रोग्राम के ऐंकर जनाब मौलाना मोहम्मद यासीन मजलिसी ने नारे लगवाए जो इस प्रकार हैं: ख़ुदाया ख़ुदाया ता इंक़ेलाबे महदीज़िंदा रहे जहाँ में इल्मो अमल ख़ुमैनीफ़िक्रो अमल हुसैनीक़ायम रहे सरों पर सायए ख़ामेनेई। 

क़ाबिले ज़िक्र है कि तेहरान की किश्वरदूस्त स्ट्रीट परइस्लामी इंक़ेलाब के शहीद नेता को श्रद्धांजलि पेश करने का प्रोग्रामों का सिलसिला लगातार जारी है।

19/06/2026

इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) ने जद्दोजेहद की राह सिखायी है