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इस्लामी इंक़ेलाब की कामयाबी की 47वीं सालगिरह और "यौमुल्लाह" 22 बहमन (11 फ़रवरी) के उपलक्ष्य में इस्लामी इंक़ेलाब के नेता का ईरानी क़ौम के नाम टीवी पर पैग़ाम

इस्लामी इंक़ेलाब की कामयाबी की 47वीं सालगिरह और "यौमुल्लाह" 22 बहमन (11 फ़रवरी) के उपलक्ष्य में इस्लामी इंक़ेलाब के नेता का ईरानी क़ौम के नाम टीवी पर पैग़ाम

आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने सोमवार की सुबह टीवी पर एक पैग़ाम में, 22 बहमन (11 फ़रवरी) को ईरानी क़ौम की ताक़त और इज़्ज़त के प्रदर्शन का दिन बताया और इस बात पर बल देते हुए कि इस दिन की रैलियों में अवाम की मौजूदगी और इस्लामी गणराज्य से उनकी वफ़ादारी का इज़हार, दुश्मन के ईरान और राष्ट्रीय हितों के ख़िलाफ़ ललचायी नज़र से पीछे हटने का सबब होगा, कहाः 22 बहमन को अपने इरादे और दृढ़ता से दुश्मन को मायूस कर दीजिए।

इस्लामी इंक़ेलाब के नेता का संदेश इस प्रकार हैः

बिस्मिल्लाह अर्रहमान अर्रहीम

हर साल 22 बहमन ईरानी क़ौम की ताक़त और इज़्ज़त के प्रदर्शन का दिन होता है। वह क़ौम जो बेहम्दिल्लाह मनोबल और इरादा रखने वाली, दृढ़, क़द्रदान और अपने हितों व नुक़सान की ओर से आगाह है। जब पहली बार 22 बहमन का वाक़ेया हुआ, उस दिन ईरानी क़ौम ने बहुत बड़ी फ़तह हासिल की। ख़ुद को और अपने मुल्क को विदेशियों के हस्तक्षेप से नजात दिलाई। वे विदेशी जिन्होंने इन बरसों में पहली वाली हालत को लौटाने के लिए हमेशा कोशिश की।

ईरानी क़ौम डटी हुयी है। इस डटने का प्रतीक 22 बहमन है। यह रैली पूरी दुनिया में बेमिसाल है। दुनिया में कोई ऐसी जगह नहीं है जहाँ इतने बरसों के बाद, हर साल किसी मुल्क की स्वाधीनता और राष्ट्रीय दिवस पर इस तरह पूरे मुल्क में इतनी बड़ी तादाद में लोग इकट्ठा हों और अपना जलवा दिखाएं। आज ईरानी क़ौम सड़कों पर रैलियों में अपना जलवा दिखाएगी और जो लोग इस्लामी ईरान और इस्लामी गणराज्य और इस क़ौम के हितों पर ललचायी नज़र रखते हैं, उन्हें पीछे हटने पर मजबूर करेगी।

राष्ट्रीय शक्ति का मिज़ाईल और विमान से ज़्यादा क़ौमों के इरादे और उनकी दृढ़ता से संबंध होता है। आपने बेहम्दिल्लाह दृढ़ता दिखाई और अपना इरादा ज़ाहिर किया। मुख़्तलिफ़ मामलों में फिर इरादा दिखाइये, दुश्मन को मायूस कीजिए। जब तक दुश्मन मायूस न हो, उस वक़्त तक एक क़ौम यातना और पीड़ा का निशाना बनती है। दुश्मन को ज़रूर मायूस करना चाहिए। 

दुश्मन का मायूस होना आपकी एकता पर निर्भर है, आपकी सोच और इरादे की ताक़त पर निर्भर है, आपके मनोबल और दुश्मन के बहकावे के ख़िलाफ़ आपकी दृढ़ता पर निर्भर है। ये सब राष्ट्रीय शक्ति के तत्व हैं। इंशाअल्लाह हमारी जवान नस्ल मुख़्तलिफ़ मैदानों में, इल्म के मैदान में, अमल के मैदान में, तक़वा और अख़लाक़ के मैदान में, भौतिक और आध्यात्मिक तरक़्क़ी के मैदान में, ज़्यादा से ज़्यादा आगे बढ़े, क़दम उठाए और मुल्क के लिए कारनामे अंजाम दे और 22 बहमन (1फ़रवरी) इन्हीं चीज़ों का प्रतीक है। सड़कों पर सब आते हैं, नारे लगाते हैं, तथ्यों को बयान करते हैं, अपनी एकजुटता का एलान करते हैं और ईरानी क़ौम के इस्लामी गणराज्य से अपनी वफ़ादारी का एलान करते हैं। 

मुझे उम्मीद है कि इंशाअल्लाह इस साल भी 22 बहमन पिछले बरसों की तरह ईरानी क़ौम की शान को दुगना करेगी, बढ़ाएगी और दूसरी क़ौमों, सरकारों, ताक़तों और दूसरों को ईरानी क़ौम का सम्मान करने पर मजबूर करेगी कि इंशाअल्लाह ऐसा ही होगा। 

आप सब पर सलाम और अल्लाह की रहमत व बर्कत हो। 

9 फ़रवरी 2026

09/02/2026