आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई ने 7 ख़ुर्दाद बराबर 28 मई 1980 को इस्लामी गणराज्य ईरान की पहली संसद के गठन की सालगिरह के मौक़े पर, मुल्क को तरक़्क़ी की राह पर ले जाने में सांसदों, ख़ास तौर पर संसद सभापति की कोशिशों की सराहना के साथ ही, क़ौम के वास्तविक प्रतिनिधि को, अवाम के बीच से निकलने वाला बताया और कहा कि जान क़ुरबान करने के लिए तैयार हर वह शख़्स जिस का दिल इस्लाम और इंक़ेलाब या ईरान की स्वाधीनता और सरबुलंदी के लिए, धड़क रहा है, अब से क़ौम की सुव्यवस्थित और जुड़ी हुयी पंक्तियों की एकता की रक्षा के लिए पहले से ज़्यादा कोशिश करे, अनुचित या उचित मतभेदों को विवाद और फूट में न बदले और अपनी करनी और कथनी में क़ौम की एकता का प्रतीक हो।
28/05/2026