अगर बातचीत तर्क के आधार पर हो और इस्लामी गणराज्य के सम्मान को मद्देनज़र रखा जाए तो हम बातचीत के लिए तैयार हैं। इस वक़्त भी बातचीत के लिए तैयार हैं इस शर्त के साथ कि बातचीत के उसूलों का पालन हो।
19/10/2025
अगर ईरान वार्ता की पेशकश को क़ुबूल न करता और अमरीका सैन्य हमले करता, तो यह सवाल उठता कि क्यों वार्ता नहीं की कि जंग न हो? लेकिन हमने वार्ता को क़ुबूल किया, गंभीर वार्ता के पाँच दौर किए, उसके बाद भी अमरीकियों ने हम पर हमले किए।
18/10/2025
मैं यह कहना चाहता हूं कि मौजूदा हालात में, जो स्थिति है, मुमकिन है, 20 साल बाद, 30 साल बाद हालात दूसरे हों, उससे मुझे कुछ लेना देना नहीं है, मौजूदा हालात में अमरीका के साथ बातचीत हमारे राष्ट्रीय हित में नहीं है।
01/10/2025
सामने वाले पक्ष ने धमकी दी है कि अगर तुमने वार्ता नहीं की तो ऐसा और वैसा होगा, हम बमबारी करेंगे। ऐसी वार्ता को स्वीकार करना जो धमकी के साथ जुड़ी हो, कोई सम्मानीय राष्ट्र बर्दाश्त नहीं करता, कोई भी समझदार राजनीतिज्ञ इसका समर्थन नहीं करता है।
29/09/2025
वह चाहता है कि ईरान, अमरीका के अधीन रहे। ईरानी क़ौम, इस बड़े अपमान से बहुत दुखी होती है और उन लोगों और उस शख़्स के मुक़ाबले में जो ईरानी क़ौम से यह ग़लत अपेक्षा रखता है, पूरी ताक़त से डट जाएगी।
06/09/2025