नर्स, बीमार के लिए रहमत का फ़रिश्ता है; यह हक़ीक़त है, इस में अतिश्योक्ति नहीं है नर्स, हक़ीक़त में हमदर्द, नर्मी से पेश आने वाली और बीमार को सुकून पहुंचाने वाली है, यह रोल बहुत अहम है।
अगर कोई किसी बीमार के पास पूरी ज़िम्मेदारी के साथ दो घंटे बैठे, तब उसकी समझ में आएगा कि उस नर्स का क्या हाल होता होगा जिसे अलग अलग रोगियों के साथ दिन और रात के कई कई घंटे बिताने होते हैं?