इन रैलियों में भाग लेने वालों का मुख्य पैग़ाम, जो वे नेतनयाहू और ट्रम्प तक पहुंचाना चाहते थे, यह था कि अवाम सरकार, इस्लामी इंक़ेलाब के नेता और इस्लामी सिस्टम के साथ हैं। जो दसियों लाख सड़कों पर आए, वे यह कहने के लिए आए कि ईरानी क़ौम यह है।
27/01/2026
इमाम ख़ुमैनी ने फ़रमाया कि अगर महिलाएं इस मूवमेंट में साथ न देतीं तो इंक़ेलाब कामयाब न हो पाता। अगर इंक़ेलाब के दौरान औरतों की वफ़ादारी, अलग अलग मैदानों में, जुलूसों में, चुनावों में औरतों की भागीदारी और उनके ज़ज्बात का सहारा न होता तो यक़ीनी तौर पर यह अज़ीम अवामी तहरीक यह शक्ल अख़्तियार न कर पाती और आगे न बढ़ पाती। यह इस्लाम का और इस्लामी सिस्टम का नज़रिया है। इमाम ख़ामेनेई 20 सितम्बर 2000
12/11/2022