अगर इंसानों को आज़ाद छोड़ दिया जाए ताकि वे अपनी यौन इच्छा को जिस तरह चाहें पूरा करें तो ऐसे में या तो परिवार का गठन न हो पाता और वह बेजान होता या उसके सामने हर पल तबाह होने का ख़तरा मंडराता रहता, हवा का एक झोंका परिवार तो तितर-बितर कर देता, इसलिए दुनिया में जहां कहीं भी आप चाहे देख लें, यौन इच्छा को पूरी करने की खुली आज़ादी है, वहाँ परिवार उतने ही कमज़ोर और अस्थिर हैं, क्योंकि मर्द और औरत अपनी इस स्वाभाविक इच्छा को तृप्त करने के लिए इस केन्द्र (इश्क़ व मोहब्बत) को महसूस नहीं करते। इसके लिए परिवार का गठन ज़रूरी है, इस्लाम ने इसका मुतालेबा किया है। मुल्क के सिस्टम को चलाने में, इंसानियत (का क़ाफ़िला) आगे बढ़ाने के सिलसिले में महान काम इस परिवार के ज़रिए हुए हैं। यह बहुत अहम चीज़ है, आपको इस सिलसिले में ख़बरदार रहना चाहिए और इसकी रक्षा करनी चाहिए। इमाम ख़ामेनेई 14/7/1989
24/05/2025
वरिष्ठ धर्मगुरू हुज्जतुल इस्लाम नासिर रफ़ीई आली की स्पीच का एक भाग हुज्जतुल इस्लाम नासिर रफ़ीई ने तेहरान में इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में अपनी तक़रीर में हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के महान किरदार को बयान किया और इस्लाम में अलग अलग मंचों पर महिलाओं के आदर्श योगदान के बारे में बताया। साथ ही इसकी शर्तों पर भी प्रकाश डाला।
09/12/2022