11 फ़रवरी को इस्लामी इंक़ेलाब की सालगिरह के जुलूसों में भरपूर शिरकत पर ईरान के अवाम का शुक्रिया अदा करता हूं। अवाम ने अपने जोश व जज़्बे का प्रदर्शन किया। जो ईरानी क़ौम की हताशा की आस में थे चकित रह गए। इमाम ख़ामेनेई 18 फ़रवरी 2024
19/02/2024
इस्लामी इंक़ेलाब की कामयाबी की सालगिरह के मौक़े पर रहबरे इंक़ेलाब ने इमाम ख़ुमैनी और शहीदों के मज़ार पर जाकर श्रद्धांजलि पेश की। 30 जनवरी 2024
31/01/2024
दुनिया की बड़ी ताक़तें, उस ज़माने की सभी बड़ी ताक़तें एक मोर्चे पर इकट्ठा हो गयीं और हम पर, इस्लामी गणराज्य पर और इस्लामी इंक़ेलाब पर हमले में शरीक थीं। एक ऐसी जंग और एक ऐसे मुक़ाबले में ईरानी क़ौम फ़तह की चोटी पर पहुंची, वहाँ खड़ी हुयी और अपनी शान दुनिया को दिखा दी। महानता यह है। इमाम ख़ामेनेई
28/09/2023
आज इस्लामी जगत, इस्लामी इंक़ेलाब की कामयाबी से पहले के दौर और इमाम ख़ुमैनी के ज़माने से पहले की तुलना में ज़्यादा सरगर्म, ज़्यादा तैयार और ज़्यादा पुरजोश है।
05/06/2023
11 फ़रवरी के जुलूस इस्लामी इंक़ेलाब की हैरतअंगेज़ ख़ुसूसियतों में से एक है। सच में यह भी ख़ुद इंक़ेलाब की तरह हैरतअंगेज़ है।
14/02/2023
11/02/2023
ईरानी क़ौम ने दिखा दिया कि वह प्रतिरोध करने वाली क़ौम है। यह बात हमारे दुश्मन तक अपनी समीक्षाओं में कहते हैं। वे कहते हैं कि ईरानी क़ौम से टकराया नहीं जा सकता। वह प्रतिरोध करने वाली क़ौम है, प्रतिरोध करती है, दुश्मन के सामने घुटने नहीं टेकती।
11/02/2023
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने तहरीके इंक़ेलाब के ज़माने के अपने पुराने साथी डाक्टर अब्बास शैबानी की नमाज़े जनाज़ा पढ़ाई और फ़ातेहा ख़्वानी की। नमाज़े जनाज़ा में मरहूम के घरवाले और रिश्तेदार शरीक थे। डाक्टर अब्बास शैबानी इंक़ेलाब आंदोलन के पुराने संघर्षकर्ताओं में थे जिनका 22 दिसम्बर 2022 की शाम इंतेक़ाल हो गया। इंक़ेलाब काउंसिल के सदस्य, संविधान असेंबली के सदस्य, कृषि मंत्री और संसद के पांच दौर के निर्वाचित सदस्य के रूप में डाक्टर शैबानी ने देश और अवाम की ख़िदमत की। डाक्टर शैबानी तेहरान युनिवर्सिटी के चांसलर भी रहे।
23/12/2022