शरम-अलशैख़ समझौते के तहत फ़िलिस्तीनी रेज़िस्टेंस और ज़ायोनी शासन के बीच एक दूसरे के क़ैदियों की रिहाई, पिछले दो साल की जंग में निर्णायक मोड़ समझी जाती है; ऐसी घटना जिससे न सिर्फ़ यह कि ग़ज़ा पट्टी में थका देने वाली जंग का अंत हुआ, बल्कि क्षेत्र में ताक़त के नए संतुलन के बारे में राजनैतिक और रणनैतिक लेहाज़ से अहम संदेश सामने आए।
14/10/2025
ईदे क़ुरबान और ईदे ग़दीर के मौक़े पर, इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने 2654 क़ैदियों की सज़ा को माफ़ करने, या कम करने या बदलने पर सहमति दी है। इन क़ैदियों को फ़ौजी अदालत और विभागीय कोर्ट सहित मुख़्तलिफ़ अदालतों से सज़ा मिली है।
16/06/2024