इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने 28 जून 2024 को मुल्क के चौदहवें राष्ट्रपति चुनाव के लिए पोलिंग का वक़्त शुरू होते ही अपना वोट डाला।
28/06/2024
चुनाव, मैदान में अवाम की मौजूदगी की निशानी और अवाम के इरादे व निर्णय का चिन्ह है। इसलिए हर उस इंसान का क़ौमी फ़रीज़ा है कि चुनाव में शरीक हो जो चाहता है कि मुल्क तरक़्क़ी करे काम करे और बड़े लक्ष्य तक पहुंचे।
10/05/2024
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने शुक्रवार की सुबह बारहवीं संसद के दूसरे चरण के चुनाव के लिए तेहरान में मतदान का आग़ाज़ होते ही इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में अपना वोट डाला।
10/05/2024
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने शुक्रवार 10 मई 2024 को सुबह, संसद के दूसरे चरण के चुनाव में मतदान किया।
10/05/2024
आज ईरानी क़ौम के शुभचिंतकों और दुश्मनों इसी तरह अहम राष्ट्रीय व राजनैतिक पोज़ीशन रखने वालों की निगाहें ईरान पर केन्द्रित हैं। वह देखना चाहते हैं कि ईरानी जनता इस चुनाव में क्या करती है और उसका नतीजा क्या होता है। इमाम ख़ामेनेई 1 मार्च 2024
01/03/2024
संसद और विशेषज्ञ असेंबली के चुनाव के लिए मतदान, रहबरे इंक़ेलाब आयतुल्लाह ख़ामेनेई अपना वोट डालने के लिए इमाम ख़ुमैनी इमाम बारगाह में दाख़िल हुए।
01/03/2024
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता, आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने शुक्रवार 1 मार्च 2024 को संसद और विशेषज्ञ असेंबली के चुनावों के लिए 8 बजे सुबह मतदान का वक़्त शुरू होते ही अपना वोट डाला।
01/03/2024
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने 1 मार्च 2024 को सुबह 8 बजे बारहवीं संसद और छठी विशेषज्ञ असेंबली के चुनाव के लिए मतदान का वक़्त शुरू होते ही अपना वोट डाला।
01/03/2024
आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने शुक्रवार 1 मार्च को सुबह बारहवीं संसद और छठी विशेषज्ञ असेंबली के चुनावों के लिए, मतदान का वक़्त शुरू होते ही तेहरान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में आकर अपना वोट डाला।
01/03/2024
चुनाव भरपूर भागीदारी वाले हों। हम अगर दुनिया को यह दिखा सकें कि क़ौम मुल्क के अहम मैदानों में उपस्थित है तो समझिए कि हमने देश को सुरक्षित कर दिया।
29/02/2024
इमाम ख़ामेनेई से पहली बार वोट डालने वालों की मुलाक़ात का आंखों देखा हाल
29/02/2024
चुनाव राष्ट्रीय और अवामी ताक़त का प्रतीक है। अमरीका, यूरोप पर हावी नीतियां, ज़ायोनी पालीसियां, दुनिया के बड़े पूंजीपतियों और बड़ी कंपनियों की पालीसियां अवाम की भरपूर उपस्थिति से सबसे ज़्यादा डरती हैं। क्यों? क्योंकि उन्हें पता है कि अगर क़ौम मैदान में उतर पड़े तो समस्याओं पर नियंत्रण तय है। इमाम ख़ामेनेई 28 फ़रवरी 2024
28/02/2024