ज़्यादातर फ़ैमिली के बिखरने की वजह एक दूसरे का ख़याल न रखना है। शौहर को बीवी का ख़याल रखना नहीं आता, बीवी समझदारी नहीं दिखा पाती। वह हद से ज़्यादा सख़्ती और ग़ुस्से से काम लेता है, ये बेसब्री दिखाती है। हर बात पर एतेराज़ व विरोध होता है। अगर कभी कोई ग़लती हो गयी तो वो फ़ौरन ग़ुस्से में न आए, यह नाफ़रमानी न करे। एक दूसरे से संबंध बनाए रखें तो कोई भी घर बिखरेगा नहीं और फ़ैमिली सुरक्षित रहेगी। इमाम ख़ामेनेई 8/02/1997
15/11/2025
कभी कभी मर्द अपनी ज़िन्दगी के कामों में ऐसे दोराहे पर पहुंच जाता है कि या तो दुनिया को चुने या ईमानदारी और सच्चाई के रास्ते को। इन दो में से एक को चयन करना है। यही वह जगह है जहाँ बीवी, मियां को पहली राह या दूसरी राह की ओर खींच सकती है। बिलकुल ऐसी ही दूसरी तरफ़ भी है। मियां भी बीवियों की ज़िन्दगी में इस तरह का असर डाल सकते हैं। आपस में इसी तौर पर रहने की कोशिश कीजिए। दोनों कोशिश करें अल्लाह की राह में, इस्लाम की राह में, सत्य की राह में, ईमानदारी और सच्चाई की राह में, धर्म का पालन करें और गुमराही या ग़लत राह की स्थिति में एक दूसरे को रोकें। इमाम ख़ामेनेई 11/03/2001
09/11/2025
ज़्यादातर फ़ैमिली के बिखरने की वजह एक दूसरे का ख़याल न रखना है। एक दूसरे से संबंध बनाए रखें तो कोई भी घर बिखरेगा नहीं और फ़ैमिली सुरक्षित रहेगी। इमाम ख़ामेनेई 8 फ़रवरी 1997
20/10/2024
मियां-बीवी दोनों कोशिश करें कि अल्लाह की राह में, इस्लाम की राह में, सत्य की राह में, ईमानदारी और सच्चाई की राह में, धर्म का पालन करें और गुमराही या ग़लत राह पर जाने से एक दूसरे को रोकें। इमाम ख़ामेनेई 11/03/2001
13/10/2024