हज़रत फ़ातेमा ज़हरा की ज़िंदगी के संबंध में सटीक पहचान होनी चाहिए, उनकी ज़िंदगी को नई नज़र से देखना चाहिए, पहचानना चाहिए और सही मानी में आदर्श क़रार देना चाहिए। 19 अप्रैल 2014, उनकी शख़्सियत ठीक जवानी में सभी ग़ैरतमंद, मोमिन और मुसलमान मर्दों और औरतों यहाँ तक कि ग़ैर मुसलमानों के लिए भी जो उनके दर्जे को पहचानते हैं, आदर्श है; हमें इस महान हस्ती की ज़िंदगी से सीखना चाहिए।(13 दिसम्बर 1989)
25/11/2025
इस आयत पर अमल करें जिसमें अल्लाह ने फ़रमाया है, “बेशक तुम्हारे लिए पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम के वजूद में (पैरवी के लिए) बेहतरीन नमूना मौजूद है। हर उस शख़्स के लिए जो अल्लाह (की बारगाह में हाज़िरी) और क़यामत (के आने) की उम्मीद रखता है और अल्लाह को बहुत याद करता है” (सूरए अहज़ाब, आयत-21) पैग़म्बरे इस्लाम बेहतरीन नमूना हैं यह बात क़ुरआन ने साफ़ लफ़्ज़ों में कही है। “उसवा” हैं! इसका क्या मतलब है? यानी एक नमूना हैं और हमको इस नमूने की पैरवी करनी चाहिए। वह एक ऊंची चोटी पर हैं और हमको जो इस घाटी में हैं उस चोटी पर पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए। क़दम बढ़ाना चाहिए, इंसान जहाँ तक भी जा सकता है आगे बढ़े, उस चोटी की ओर बढ़ता जाए “उसवा” का मतलब यह है। इमाम ख़ामेनेई 4/10/2022
17/11/2025
पैग़म्बरे इस्लाम बेहतरीन नमूना हैं यह बात क़ुरआन ने साफ़ लफ़्ज़ों में कही है। “उसवा” हैं! इसका क्या मतलब है? यानी वह एक नमूना हैं और हमको इस नमूने की पैरवी करनी चाहिए। वह एक ऊंची चोटी पर हैं और हमको जो इस घाटी में हैं उस चोटी पर पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए। क़दम बढ़ाना चाहिए, इंसान जहाँ तक भी जा सकता है आगे बढ़े, उस चोटी की ओर बढ़ता जाए “उसवा” का मतलब यह है। इमाम ख़ामेनेई 14/10/2022
22/10/2024