ज़िन्दगी जिद्दो जेहद का मैदान है, जहाँ इंसान हमेशा एक तरह की बेचैनी का शिकार रहता है, अगर यह चैन व सुकून सही तरीक़े से हासिल हो जाए तो ज़िन्दगी ख़ुशहाली से भर जाती है।बीवी ख़ुद को ख़ुशक़िस्मत महसूस करती है, बच्चे जो इस घर में पैदा होते और परवरिश पाते हैं, किसी भी तरह की मनोवैज्ञानिक मुश्किलों के बिना परवान चढ़ते हैं और कामयाब रहते हैं यानी इस लेहाज़ से पूरे घर की ख़ुशहाली का रास्ता समतल हो जाता है। इमाम ख़ामेनेई 22/07/1997
25/10/2025
बीवी के रोल में औरत सबसे पहले सुकून व चैन का प्रतीक हैः "और फिर उसकी जिन्स से उसका जोड़ा बनाया ताकि वह (उसकी रिफ़ाक़त में) सुकून हासिल करे..."(सूरए आराफ़, आयत-189) आराम व सुकून! क्योंकि ज़िंदगी हलचल और उलझनों से भरी हुयी है। मर्द ज़िंदगी के इस दरिया में काम काज में व्यस्त और परेशानियों में उलझा होता है। वह जब घर आता है तो उसे आराम व सुकून की ज़रूरत होती है। यह चैन व सुकून घर में बीवी पैदा करती है। इमाम ख़ामेनेई 2 फ़रवरी 2023
03/11/2024