इस्लाम कहता है कि लड़की और लड़का (मियां-बीवी) दोनों को निभाना चाहिए। दोनों को एक दूसरे के सार्थक पहूल को देखना चाहिए और यह तय करना चाहिए कि घरेलू ज़िन्दगी एक दूसरे से इश्क़ व मोहब्बत के साथ, पूरी तरह इत्मेनान, सुकून और पारदर्शी तरीक़े से गुज़ारेंगे, जारी रखेंगे और इसकी हिफ़ाज़त करेंगे। अगर ऐसा हो गया तो ऐसी फ़ैमिली वैसी स्वस्थ फ़ैमिली होगी जैसी इस्लाम चाहता है। इमाम ख़ामेनेई 2/08/1995
15/12/2024
बीवी के रोल में औरत सबसे पहले सुकून व चैन का प्रतीक हैः "और फिर उसकी जिन्स से उसका जोड़ा बनाया ताकि वह (उसकी रिफ़ाक़त में) सुकून हासिल करे..."(सूरए आराफ़, आयत-189) आराम व सुकून! क्योंकि ज़िंदगी हलचल और उलझनों से भरी हुयी है। मर्द ज़िंदगी के इस दरिया में काम काज में व्यस्त और परेशानियों में उलझा होता है। वह जब घर आता है तो उसे आराम व सुकून की ज़रूरत होती है। यह चैन व सुकून घर में बीवी पैदा करती है। इमाम ख़ामेनेई 2 फ़रवरी 2023
03/11/2024