यह तादाद और ताक़त जिस पर क़ुरआन में बल दिया गया है "अल्लाह के दुश्मन को ख़ौफ़ज़दा कर सको" इससे मुल्क में अमन व सुरक्षा क़ायम होती है, इसलिए आप देख सकते हैं कि काफ़ी मुद्दत तक बार बार कहा करते थे कि फ़ौजी कार्यवाही का विकल्प मेज़ पर मौजूद है। (अब) एक मुद्दत हो गयी यह बात ज़बान पर नहीं लाते। यह आपकी ताक़त का नतीजा है, जब भीतरी सतह पर आप ताक़त बढ़ाते हैं तो उसका नतीजा इस तरह सामने आता है। इमाम ख़ामेनेई 21/08/2023
17/12/2024
आप क़ुरआन मजीद पढ़िए, सुरक्षा के विषय को अल्लाह इतना ऊपर ले आता है कि इसे मुसलमानों को बहुत बड़ी नेमत के तौर पर याद दिलाता हैः "तो उनको चाहिए कि इस घर (ख़ानए काबा) के परवरदिगार की इबादत करें। जिसने उनको भूख में खाने को दिया और ख़ौफ़ में अमन अता किया।" (सूरए क़ुरैश, आयत-3 और 4) यानी उस अल्लाह की इबादत करो जिसने तुम्हे ये बड़ी नेमतें दी हैं, उसने तुम्हें सुरक्षा दी है, तुम्हारे लिए अमन से भरी सुरक्षित ज़िंदगी गुज़ारने का अवसर मुहैया किया है।
31/10/2024
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने 27 अक्तूबर 2024 को सुरक्षा फ़ोर्सेज़ से तअल्लुक़ रखने वाले शहीदों के घर वालों से मुलाक़ात में सुरक्षा की अहमियत और सुरक्षा के अलग अलग स्वरूप पर बात की।
27/10/2024