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Sep. 17, 2026

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home.tags: रमज़ान

दिलों को पाक करने के लिए रमज़ान मुबारक एक मौक़ा

रमज़ान हक़ीक़त में तौहीद का जलवा है। यह दिलों को अल्लाह से जोड़ता है, रमज़ान का महीना अल्लाह से क़रीब होने का मौक़ा है।  तक़वे का ट्रेनिंग स्थल है और नई रूहानी ज़िंदगी का स्रोत है।

05/04/2025

मोमिनों के एक समूह से मख़सूस हिदायत

हिदायत की एक चौथी क़िस्म भी है जिसका नाम हमने "मोमिनों के एक गिरोह से मख़सूस हिदायत" रखा है। यह सारे मोमिनों के लिए भी नहीं है बल्कि उनमें से ख़ास लोगों से मख़सूस है। यह बहुत ही आला स्तर की हिदायत है जो पैग़म्बरों और अल्लाह के विशेष दोस्तों से मख़सूस है। सूरए अनआम की आयतें पैग़म्बर से कहती हैं कि "ये वे लोग हैं जिनको अल्लाह ने हिदायत दी है तो आप भी उनके रास्ते और तरीक़े पर चलें" (सूरए अनआम, आयत-90) अल्लाह के चुने हुए बंदे उसकी ओर से कुछ चीज़ें, कुछ इशारे, कुछ ख़ास हिदायतें हासिल करते हैं। आप देखते हैं कि किसी को क़ुरआन की कोई आयत सुनाई जाती है तो उसके आंसू बहने लगते हैं, उसका दिल बदल जाता है, वह कुछ ख़ास चीज़ समझता है। यह वह मख़सूस हिदायत है। इंसान का स्तर जितना ऊपर उठता वह कुछ इशारे हासिल करता है, उस आयत के कुछ लफ़्ज़ उनके लिए एक हिदायत लिए होते हैं जो हमारे लिए नहीं हैं। ये सभी अल्लाह की हिदायतें हैं, हिदायत का यह मानी मुराद है।  इमाम ख़ामेनेई 1 मई 1991

21/03/2025

अल्लाह की ओर से हिदायत के मानी और क़िस्में

हिदायत के मानी रहनुमाई करने और रास्ता दिखाने के हैं। अल्लाह की ओर से मिलने वाली हिदायत के कई चरण और कई मानी हैं। एक आम स्तर की हिदायत है जिसमें कायनात की सभी चीज़ें शामिल हैं। यह हिदायत वजूद मिलने से जुड़ी है, यह आम हिदायत है और सब चीज़ें इसके दायरे में आती हैं। जिस स्वभाव के तहत चीटियां या शहद की मक्खियां ख़ास तरीक़े से अपना घर बनाती हैं और सामाजिक तौर पर ज़िंदगी गुज़ारती हैं, उसका स्रोत अल्लाह की ओर से मिलने वाली हिदायत है। हमारी मुराद यह हिदायत नहीं है। हिदायत की एक क़िस्म इंसान से मख़सूस है, एक निहित समझ जो अल्लाह के वजूद और कुछ धार्मिक शिक्षाओं की ओर उसकी रहनुमाई करती रहती है। आप अल्लाह को अक़्ल से पहचानते हैं। फ़ितरत और अक़्ल के अलावा अल्लाह को पहचानने का कोई और ज़रिया नहीं है। यही इंसान की अक़्ल की हिदायत है लेकिन यहां हमारी मुराद यह हिदायत भी नहीं है।  इमाम ख़ामेनेई 1 मई 1991

19/03/2025

बंदगी के लिए अल्लाह से मदद मांगने का मतलब

अल्लाह से मदद चाहने का मतलब यह है कि मैं ऐब और ग़लतियों का पुतला इंसान, अगर अपनी पूरी सलाहियतों को भी तेरी बंदगी और इबादत में लगा दूं, तब भी मैंने तेरी बंदगी और इबादत का हक़ अदा नहीं किया है, तुझे मेरी अतिरिक्त मदद करनी चाहिए ताकि मैं यह हक़ अदा कर सकूं। पैग़म्बरे इस्लाम सल्ललाहो अलैहि व आलेही वसल्लम और इमाम अलैहेमुस्सलाम जैसे महापुरूष कहते हैं कि ऐ अल्लाह हम तेरी बंदगी का हक़ अदा नहीं कर सके। हज़रत अली अलैहिस्सलाम और इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम जैसी हस्तियां अल्लाह की बंदगी का हक़, जिसके वह योग्य है, अदा न कर पाने की बात करती हैं जबकि ये हस्तियां अल्लाह की बंदगी में जो काम करती थीं, हम उसके बारे में सोच भी नहीं सकते।   इमाम ख़ामेनेई 24 अप्रैल 1991

15/03/2025

हम तुझ से ही मदद चाहते हैं कि सिर्फ़ तेरी ही बंदगी करें न किसी ग़ैर की

"व इय्याका नस्तईन" और सिर्फ़ तुझ ही से मदद चाहते हैं। किस चीज़ में तुझसे मदद चाहते हैं? इस चीज़ में कि हम सिर्फ़ तेरी ही बंदगी करें, किसी दूसरे की नहीं। अल्लाह के अलावा किसी की बंदगी न करना ज़बान से तो बहुत आसान है लेकिन अमल में यह सबसे मुश्किल कामों में है; व्यक्तिगत ज़िंदगी में भी बहुत कठिन है और सामाजिक ज़िंदगी में भी कठिन है, एक क़ौम की हैसियत से भी कठिन है और आप इसकी कठिनाइयों को देख रहे हैं कि जब इस्लामी गणराज्य ने बड़ी ताक़तों के मुक़ाबले में तौहीद का पर्चम उठा रखा है, इससे भी ज़्यादा कठिन हमारे भीतर के उस शैतान और सरकश को भगाना है, यह उससे भी ज़्यादा कठिन है। इच्छाओं और वासनाओं की तुलना में अमरीका से मुक़ाबला आसान है, इच्छाओं से लड़ना कठिन है, उस जंग की बुनियाद भी यह जंग है।   इमाम ख़ामेनेई 24 अप्रैल 1991

14/03/2025

तौहीद को मानने वाले की अल्लाह की इबादत में पूरी सृष्टि के साथ समानता

हम तेरी इबादत करते हैं; इस 'हम' के दायरे में कौन लोग हैं? उसमें एक मैं हूँ। मेरे अलावा, समाज के बाक़ी लोग हैं; 'हम' के दायरे में पूरी इंसानियत का हर शख़्स है न सिर्फ़ तौहीद को मानने वाले बल्कि वे भी हैं जो तौहीद को नहीं मानते और अल्लाह की इबादत करते हैं। जैसा कि हमने कहा कि उनकी फ़ितरत में अल्लाह की इबादत रची बसी है, उनके भीतर जिससे वे अंजान हैं, अल्लाह की इबादत करने वाला और अल्लाह का बंदा है; हालांकि उनका ध्यान इस ओर नहीं है। इससे भी ज़्यादा व्यापक दायरा हो सकता है जिसमें पूरी कायनात को शामिल माना जाए यानी पूरी कायनात अल्लाह की बंदगी का मेहराब हो। मैं और कायनात के सभी तत्व, सारे जीव-जन्तु तेरी इबादत करते हैं; यानी कायनात का हर ज़र्रा, अल्लाह की बंदगी की हालत में है, यह वह चीज़ है कि इंसान अगर इसे महसूस कर ले तो समझिए वह बंदगी के बहुत ऊंचे दर्जे पर पहुंच गया है। वह तौहीद के इस नग़मे को पूरी कायानात में सुनता है, यह एक हक़ीक़त है। मुझे उम्मीद है कि अल्लाह की बंदगी और इबादत में हम ऐसे स्थान पर पहुंच जाएं कि इस सच्चाई को महसूस कर सकें।   इमाम ख़ामेनेई 24 अप्रैल 1991

13/03/2025

स्टूडेंट्स की इस्लामी इंक़ेलाब के नेता से मुलाक़ात

मुल्क के हज़ारों की तादाद में स्टूडेंट्स ने बुधवार 12 मार्च 2025 की शाम को तेहरान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई से मुलाक़ात की। यह सालाना मुलाक़ात हर साल रमज़ान के मुबारक महीने में होती है।   

12/03/2025

ख़ुद फ़रामोशी से मुक्ति का रास्ता

इंसान दुआ से, अल्लाह के सामने गिड़गिड़ाकर, रोज़े से ख़ुद को भूल जाने की इस ग़फ़लत से मुक्ति पा सकता है और अगर यह ग़फ़लत दूर हो जाए तो उस वक़्त इंसान को अल्लाह का सवाल याद आता है और हम ध्यान देते हैं कि अल्लाह हमसे सवाल करेगा।

12/03/2025

अल्लाह की बंदगी का स्वाभाविक होना

इस आयत के अंतर्गत एक अहम बिन्दु यह है कि यह बंदगी, इंसान की फ़ितरत में मौजूद है; इंसान अपने स्वभाव के तक़ाज़े के तहत ताक़त के एक बिन्दु, ताक़त के एक ऐसे केन्द्र की ओर आकर्षित होता है जिसे वह अपने से श्रेष्ठ समझता है और उसके सामने समर्पित हो जाता है। यह इंसान की रूह और उसके वजूद में है। चाहे इस ओर उसका ध्यान हो या न हो। दुनिया की सारी बंदगी, अल्लाह की बंदगी है; यहाँ तक कि मूर्ति पूजने वाला भी अपने दिल में, अल्लाह को पूजता है; लेकिन जिस चीज़ की वजह से उसका यह काम ग़लत हो गया है वह उस श्रेष्ठ ताक़त की पहचान में ग़लती है। धर्मों का रोल यह है कि वे इंसान के सोए हुए ज़मीर को जगाएं, उसकी आँख खोलें और कहें कि वह श्रेष्ठ ताक़त कौन है। उस हद तक जितना इंसान का दिमाग़ उसे समझने की सलाहियत रखता है। इमाम ख़ामेनेई 24 अप्रैल 1991

12/03/2025

जो अल्लाह को भूल जाए उल्लाह उसे भुला देता है

अल्लाह के भुला देने का मतलब यह है कि अल्लाह उसे अपनी रहमत और रहनुमाई के दायरे से निकाल देता है।

10/03/2025

रमज़ान ज़िक्र का महीना और क़ुरआन ज़िक्र की किताब

रमज़ान का महीना ज़िक्र का महीना है, क़ुरआन का महीना है और क़ुरआन ज़िक्र की किताब है। 'ज़िक्र' का क्या मतलब है? ज़िक्र, ग़फ़लत और फ़रामोशी की ज़िद्द है।

09/03/2025

सात रमज़ानुल मुबारक को देश के अधिकारियों से ख़ेताब

7 रमज़ानुल मुबारक 1446 हिजरी क़मरी मुताबिक़ 8 मार्च सन 2025 को मुल्क के अधिकारियों ने इस्लामी इंक़ेलाब के नेता से मुलाक़ात की। इस मौक़े पर इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने रमज़ान के मुबारक महीने की फ़ज़ीलतों के बारे में बड़ी अहम चर्चा की और देश विदेश के मुद्दों की समीक्षा की। 

08/03/2025

...

अंतिम जीत, जो ज़्यादा दूर नहीं, फ़िलिस्तीनी जनता और फ़िलिस्तीन की होगी। 

03/11/2023

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English
  • The Right Side of History Magazine, No. 31
  • A mind open to questions
  • A life of spiritual influence
Français
  • Un esprit ouvert aux questions
  • Une vie d’influence spirituelle
  • « Je suis fière de toi »
Español
  • El día que estuve contigo
  • La sepultura purificada del Líder mártir de la Revolución Islámica y de los mártires de su familia
  • Cortejo fúnebre del cuerpo purificado del Líder mártir de la Revolución Islámica en la ciudad santa de Mashhad
Русский
  • Послание великого лидера Исламской революции в связи с похоронами и погребением лидера-мученика Ирана
  • Полное видео церемонии совершения джаназа-намаза над пречистым телом лидера-мученика и телами мучеников его семьи в Мусалла им. Имама Хомейни
  • церемонии совершения джаназа-намаза над пречистым телом лидера-мученика и телами мучеников его семьи
हिंदी
  • सवालों का सामना करने के लिए खुली सोच
  • अध्यात्म से भरी हुयी ज़िंदगी
  • “मुझे तुम पर फ़ख़्र है”
Azəri
  • İslam İnqilabı Rəhbərinin "İranın şəhid Ağası"nın vida və dəfn mərasimi münasibətilə müraciəti
  • Tehrandakı İmam Xomeyni müsəllasında mücahid şəhid İmamın və şəhid ailəsinin pak cənazəsinə qılınan cənazə namazının tam videosu
  • Mücahid şəhid Ayətullah Əl-Üzma Seyid Əli Xamenei və şəhid ailəsinin pak cənazəsinə qılınan cənazə namazının
العربية
  • الفيديو الكامل لمحاضرة الدكتور الشيخ محمد جواد الكلبايكاني في ندوة «نمط الحياة الإيمانية لعائلة الإمام الشهيد السيد علي الخامنئي»
  • لقطات من اليوم الحادي عشر لمشاركة جناح دار الثورة الإسلامية في الدورة الـ27 لمعرض بغداد الدولي للكتاب
  • لقطات من اليوم العاشر لمشاركة جناح دار الثورة الإسلامية في الدورة الـ27 لمعرض بغداد الدولي للكتاب
اردو
  • سوالوں کے لیے ایک کھلی ہوئی فکر
  • روحانیت سے بھرپور زندگی
  • مجھے تم پر فخر ہے

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