क़ौमें उस हस्ती को, जिसने पूरी उम्र अपनी कथनी और करनी से रेज़िस्टेंस को मज़बूत किया, नहीं भूलेंगी।
बग़दाद में अंतर्राष्ट्रीय बुक फ़ेयर में इराक़ी बाप और बेटे, शहीद सैयद अली ख़ामेनेई की रचनाओं के स्टाल पर, शहीद रहबर की बंद मुट्ठी के निशान को दिखाते हुए।